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रंग

मैंने देखा  नहीं मगर रंग शायद ऐसे ही होंगे | प्यार जब कोई बरसाए इस जीवन में लहर ख़ुशी की दौड़े जब मेरे इस मन में उसी आनंद को लाल कहते होंगे मैंने देखा  नहीं मगर रंग शायद ऐसे ही होंगे | रौशनी के नन्हे कतरे टकराएँ जब मुझसे आकर धुप की तपिश के कण जब बुने एक जाल मुझ पर उसी पिंजरे को पीला कहते होंगे मैंने देखा  नहीं मगर रंग शायद ऐसे ही

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Arts Hindi Philosophy Poem Top

ख़ाली बोतल की कहानियाँ

हर ख़ाली बोतल में क़ैद हैं न जाने कितनी  कहानियाँ कुछ में क़ैद है हीर की दास्तां कुछ में रांझाओ की जवानियाँ   वह पहला ख़त जिसे लिखते हुए कांपे थे हाथ जवाब के इंतज़ार में क़ुर्बान हुए हज़ारों दिन लाखों रात हर जाम में बसी थी दिल की बेताबियां ख़ाली बोतल बयां करे कुछ ऐसी कहानियाँ   समेटा दिल के टुकड़ो को भुलाया बीती गलतियों को वादों में कराए बातें अंजानो पर लुटाए रातें क़ैद है इसमे वह सारी बेशर्मियां ख़ाली बोतल बयां करे कुछ ऐसी कहानियाँ   जब ख़वाईशें तड़पाए हवा बन के उसे भड़काए जब ग़ैरों से भी दिल जल जाए तब आंसू बन के उसे बुझाए हर घूंट में समाए इसकी यारियां ख़ाली बोतल बयां करे वह सारी कहानियाँ   डूब गए बाद्शाह मिट गई जन्नतें जल गई क़ायनात बह गई हसरतें कांच के इस मकान में क़ैद है न जाने कितनी बरबादियाँ ख़ाली बोतल बयां करे कुछ ऐसी कहानियाँ   यह ख़ाली बोतल आज मुझसे कुछ कह रही  है ज़िंदगी के सबक ख़ामोशी से पीला रही है डूब गई शाम मुक़म्मल हुआ जाम ख़ुमार अब ख़त्म हो रहा है एक नया सवेरा मुझे बुला रहा है   इस बोतल में क़ैद है ज़िंदगी के हर पल की परछाईयाँ ख़ाली बोतल बयां करे न जाने कितनी कहानियाँ

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Arts Hindi Poem Top

सपने

बाज़ार की भीड़ से दूर, वह एक कोने में खड़ा था, सपने बेच रहा था | “मैं लाया हूँ सपने…अनगिनत…खूबसूरत…अमूल्य | क्या लेना चाहेंगे ?”, उसने लोगों से पुछा | थका हुआ, हड़बड़ी में भागता हुआ एक आदमी इस पुकार को सुनकर रुका और पुछा – “सपने ? भला ये क्या हैं?” सपनो का सौदागर कहने लगा – “सपना वह जगह है जहाँ तुम बेरोक-टोक जा सकते हो | है वो तुम्हारी अपनी दुनिया, सपनो

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Optimism Poem Poetry Top

सागर

जल का भंडारघर, अनंत है यह सागर, ठहरता नहीं, निरंतर ही चलता | किनारे की रेत को दौड़कर समेटता, फिर लहरों संग ले आता उसे तट पर | सुनाई पड़ती है उसकी गर्जना, जब उंडेलता वह लहरों के सफ़ेद झाग – जैसे लड़ पड़ा हो वह किनारों से और चाहता हो उन पर उर्मियों को पटकना | चेहरे पर मेरे कुछ नमकीन छींटे पड़े – अब चट्टानों से टकरायीं लहरें | पत्थरों के बीच से

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Arts Feminism Poem Top

Still I Rise By Maya Angelou

You may write me down in history With your bitter, twisted lies, You may trod me in the very dirt But still, like dust, I’ll rise. Does my sassiness upset you? Why are you beset with gloom? ‘Cause I walk like I’ve got oil wells Pumping in my living room. Just like moons and like suns, With the certainty of tides, Just like hopes springing high, Still I’ll rise. Did you want to see me

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Literature Top

What to write?

There is so much ongoing issues in the world which inspires anyone to write anything, but I am confused here sitting besides my PC and thinking, what to write?   Should I write about those evils overtaking the goodness of world, about the stories of terrorists and the deadly games played for terror? about the chemical bombs which exploded somewhere, about the death polls increasing day by day??   what to write?   Should I

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Life Poem

Thank You God!

Thank you God for my life and all the love, For making me happy when I see a rose or a dove. For letting me enjoy everything I have when I live, Grateful for my wants which are lesser than what you give. For eyes to see my loved ones and for hands to do my own work, To read, to cook, to paint to laugh…to do all the things I care about. To enjoy

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Life Love Love In The Times Of Recession Poetry

Now…Love!

A beautiful poem by  Aditya Kavangal! Our  love shall die At the blink of an eye Dreams burnt to dust Memories will rust Time is the witness For our doom and bliss Let’s not pretend About our inevitable end Now, we have a moment Before we are spent To be here, now, with you Before, I bid adieu To hold your hand Walk on the sand Before dawn and after night Between shadow and light We

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