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Hindi Love Poem Poetry

प्यार–पराया

एक अनजान राह पर चंचल मन साथियों के साथ, प्यासे अरमान भी आशाओं के सहारे चला जा रहा था । एक नजर पड़ गयी उन पर और अगर देख भी लिया यह कोई भूल तो नहीं है । एक विशेष सौन्दर्य के साथ रूप था और सुगंध भी देखा, और सूँघा भी यह कोई फूल तो नहीं हैं । दिल ने चाहा पास भी गया स्पर्श किया तो चुभ वो गया सोचा, मगर यह कोई

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#BetterDemocracy: तुम्हें कसम है कसम तुम्हारी

रख सर पर टोकरी जब मजबूरन, सड़कों पर पत्थर ढोयेगी देख तड़पता भूख से बेटा, जब उसकी ममता रोयेगी नहीं भाग्य, न भगवान ही कोई, जब उसको आकर देखेगा तब बनकर साथी तुम जाना । तुम्हें कसम है कसम तुम्हारी जाकर उसका दुख दर्द बटाना ॥ भरी दुपहरी तेज धूप में, जब हल को हड्डी जोतेगी भोजन की तो बात दूर, जब ब्यालू को दुल्हन सोचेगी नहीं मलिक, न जमींदार ही कोई, जब विवशता उसकी

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वह निश्चित ही मजदूर है

मेरे सामने खड़ा जो मौन है, भला बताओ तो, यह कौन है ? इसके जीवन में धूप ही धूप है, मगर उजाला नहीं इसके जीवन में घुप्प अंधेरा है, मगर दिल कला नहीं आँखों में इसके मोती ही मोती है, मगर गले में माला नहीं यह संसार का निर्माण करता है, मगर अपना नहीं यह सबके सपने पूरे करता है, मगर इसका कोई सपना नहीं यह सबका जीवन दाता तो है, मगर इसका कोई जीवन

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#BetterDemocracy: नेता

नेता नहीं शासक हैं ये प्रशासक नहीं शोषक हैं ये नेता तो जनता का नेतृत्व किया करते हैं ये शासक हैं जनता पर राज किया करते हैं कहने को तो देश सबसे बड़ा लोकतंत्र है पर यहाँ पर सबसे बड़ा भृष्ट तंत्र है जहाँ देखो जिधर देखो बस लुटेरे ही लुटेरे हैं हर गली, हर मुहल्ला बस इनके ही फेरे हैं जनता को लूट कर इन्होनें अपनी कोठियाँ भरी हैं चाहे जिस काल में देखो

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प्रियतम की याद में

हे रमणी, तेरे प्रियजनों को लगता है और ये समझती हैं तेरी सखियां, कि बहुत दिनों के बाद तेरा, लौट कर घर आया है प्रियतम । इसीलिए तू उसे देखकर इतना अधिक शरमाई है, खुशी से तुम पागल हुई और गालों पर लालिमा छाई है । तेरे आस-पास के ये आशिक असल बात को क्या जाने, तेरे ऊपर क्या-क्या बीता ये नासमझ कैसे जाने । विगत दिनों से कितने तुम अपनी आँख बिछाए बैठी थी,

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नारी

हे देवी! कितनी विलक्षण, कितनी महान हो तुम, प्रेम का साक्षात सागर, गुणों की खान हो तुम तुम्हारी महानता की समानता रखने वाला संसार में कोई नहीं, तुमने अपने प्यार रूपी पुष्प की सुख रूपी सुगन्धि से सारे संसार को भर दिया है, तुमने अपने इंद्रियजनित सुखों से सारे संसार को परिपूर्ण कर दिया है तुम्हारा दर्शन सुख! अहा! कितना प्रिय है ये जिसे प्राप्त करने के लिए चाँद भी लुका छिपी करता है, सारी रात

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पापा की कलम

शब्द मेरे पापा के होंगे मैं पापा की कलम बनूँगी रचना होगी मेरे पापा की फिर मैं रचना खूब लिखूँगी ईर्ष्या, द्वेष और नफरत को हम जग से दूर भगाएँगे छुआ-छूत और ऊँच-नींच का भेद मिटाकर भाई चारा लायेंगे धर्म, जाति का भेद मिटाकर अमीर, गरीब मिटाएंगे प्यार की सब कोई भाषा बोले ऐसा सुंदरतम संसार रचूंगी शब्द मेरे पापा के होंगे मैं पापा की कलम बनूँगी   जहाँ पर होगी मां की ममता और

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बाढ़ का सैलाब

घर है छूटा, दर है छूटा सबका छूट गया संसार । अब हम क्या करें? बेटा डूबा, बेटी डूबी मां बाप का डूब गया संसार, दादी बिछड़ी, दादा बिछड़े किसी का बिछड़ गया परिवार । अब हम क्या करें?   जल ही जल है सभी जगह पर धरती का कहीं पर नाम नहीं, ऐसा जल का सैलाब बहा धँस गयी धरती कहीं कहीं । अब हम क्या करें?   मन है टूटा, तन है भूखा

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My Same Story of Everyday

Every night before going to sleep,I recall things of the day, There hardly seems anything that I can be proud of, This is almost the same story of everyday. In this struggle of doing things in a unique way, I am unable to even complete a task in a mediocre way, This is almost the same story of everyday. As the day begins, tactics for the attainment are almost underway, As the work takes it’s

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