Entity-Unknown
Literature Optimism Poetry Top

Entity Unknown

When  silence and darkness fall, night. The Unknown under the bed does crawl. The lights snuffed and switched, off. The Entity‘s forms twitch. Under fatal delusion, waiting. A black mass of sheer illusion. Whirling in self maintained, confinement. Matter scrambled, yet contained. An Entity of some proportion, considerable. Unknown, it stalks with devotion. Listen not, too carefully, at moments, dark. lest you wish to hear it’s laments. Oh how it cries, the weep, haunting. Ice in the veins to keep. Beyond

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Castello_valentino_fronte
Democracy Life Literature Poetry

The Baron’s Manor

IThe Baron owned,All that was upon the moor.He summoned the nobles,To his Manor for a tour.Some came in twos,While others arrived in ones.But all came forth,To attend the Baron’s ballroom dance.Ushered in, by servants,Away from the cold’s kiss.Inside, hot as a beast’s maw,Chill from spines to warmth did transit.Tapestries hung,Calling for their pathos.Heavy as sleepless eyelids,Depicting war, victories and chaos.Arched ceiling and stairways,A gargoyle here and a golem there.Musty yet polished, the light shone,On the

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the-weather-of-love
Happiness Hindi Love Poem Poetry Relationship Romance

प्यार का मौसम

लड़का-      गोरी ए गोरी, गोरी ए गोरी नैन मिले अब चैन कहाँ दिल है वहीं तू रहे जहाँ लड़की-      ए लड़के………………….. मेरी तरफ तुम देखो ना ऐसे कभी फिर छेड़ो ना लाज शरम से मर-मर जाऊँ फिर तेरे पास कभी ना आऊँ लड़का-     ए…….ऐसी भी क्या नाराजी आज मिले हैं हम तुम ऐसे चन्दा को मिली हो बदली जैसे आँचल में तुम मुझे छुपा लो प्यार का तुम मुझे रूप दिखादो लड़की-       बस…बस…बस……………….. कुछ भी

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holding-hands
Hindi Love Poem Poetry

तुझे मेरी कसम है

दिल मेरा सागर चांद तेरा मन है दिल मेरा सोचे कैसे होगा मिलन है तू ही बता दे तुझे मेरी कसम है ।   लिखता हूँ खत तुझे लिख नहीं पाऊँ फूटे हैं नैन मेरे आँसू बहाऊं गिर गया कागज छूटी कलम है तू ही बता दे मुझे कैसी यह लिखन है । दिल मेरा सागर चांद तेरा मन है दिल मेरा सोचे कैसे होगा मिलन है तू ही बता दे तुझे मेरी कसम है

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Life Philosophy Poem Poetry Top

Beneath the Sky

Born beneath the sky Where the birds fly Ground populated People frustrated Less gaiety More jealousy. Love seems to be hidden War and hatred killed many men Trying to control nature We are not that mature. We come here to gain In process we bear some pain, Try to accept the reality, Enjoy God’s creativity. Finally, when our goal is achieved We get buried On earth – beneath the sky Where the birds fly.

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heartbeat
Hindi Life Love Poem Poetry

दिल की धड़कन

छोड़ कर दामन मेरा, अये मेरे सनम कहाँ को तुम चल दिये दुनियाँ में छोड़कर अकेला, तुमने मेरे अरमां भी सारे कुचल दिये । तोड़कर बन्धन मेरा, अये मेरे हमदम मुझे छोड़कर तुम चले गये । मेरी जिंदगी के थे कुछ सपने उन्हें छोड़कर तुम चले गये । कभी कहा था तुमने मुझसे तेरा साथ ना छोड़ेंगे धरती से आसमाँ तक भी तेरा हाथ ना छोड़ेंगे । वही है धरती, वही है आसमाँ मैं भी

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Poverty-in-India
China Democracy Governance Government India Indian Culture Opinion Politics Poverty Social Issues Top Youth Pulse

Plagued by Poverty

PLAGUED BY POVERTY “Poverty is not an accident like slavery and apartheid; it is man-made and can be removed by the actions of human beings…” -Nelson Mandela A fatal disease has broken out, Let me tell you what it’s all about… The people affected by this, Clothes, food and shelter if they had, I wish! This epidemic is not newly discovered, but ageing, It does nothing other than inhibiting a country from prospering. To treat

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Entertainment Hindi India Opinion Politics Top Tour

ये मेरी दिल्ली को ना जाने क्या हो गया है

ये मेरी दिल्ली को ना जाने क्या हो गया है चुनावों  का मौसम आया तो वोटर खो गया है ये मेरी दिल्ली को ना जाने क्या हो गया है जो न हुआ था कभी वो सब अब हो गया है किसी ने किसी को छोडा तो कोई किसी का हो गया है ये मेरी दिल्ली को ना जाने क्या हो गया है लो देखो दिल्ली मे परिवारवाद का तो वजुद ही खो गया है उनके आर.टी.आई से

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Hindi Philosophy Poem Poetry

ऐसा सहित्य लेखो

ऐसा सहित्य लेखो, भिक्षु को देखो । वह जाता, दो भाग कलेजे के करता, पछताता पथ पर जाता । आँत, पेट, पीठ मिलकर हैं एक, जा रहा है लाठी टेक, मुट्ठी भर दाने को – पेट भर खाने को, अरे तू देख मनुज वह जाता, दो भाग कलेजे के करता, पछताता पथ पर जाता । अरे सूरत है कितनी भोली, पड़ी कंधे पर एक फटी-पुरानी झोली, उठें हिलोरें मन में – लगी है आग तन

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love-going-ashtray
Hindi Love Poem Poetry

प्यार–पराया

एक अनजान राह पर चंचल मन साथियों के साथ, प्यासे अरमान भी आशाओं के सहारे चला जा रहा था । एक नजर पड़ गयी उन पर और अगर देख भी लिया यह कोई भूल तो नहीं है । एक विशेष सौन्दर्य के साथ रूप था और सुगंध भी देखा, और सूँघा भी यह कोई फूल तो नहीं हैं । दिल ने चाहा पास भी गया स्पर्श किया तो चुभ वो गया सोचा, मगर यह कोई

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