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यदि तू विस्तार चाहता है

खुशबू बन उड़ जा यदि तू विस्तार चाहता है I मानव को कर प्यार यदि तू प्यार चाहता है I मोती बन मत बैठ कोष्ठ में, सीपी के जैविक प्रकोष्ठ में, सागर में मिल जा, यदि तू विस्तार चाहता है मानव को कर …… I क्या कहता है अंतर्मन में, शंखनाद बन विचार गगन में, चेतन को बिखरा, यदि तू विस्तार चाहता है मानव को कर …… I मनुज योनी का धर्म समझ ले, जीवन का यह मर्म समझ ले, शांतिदूत बन जा, यदि तू विस्तार चाहता है मानव को कर …… I क्यूँ सिमटा सकुचा बैठा है ? जीवन

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देवी-देउता के ऐसे खिल्ली नहीं उड़ाते हैं मेरा बच्चा

मां: हैप्पी दशहरा विनीत. माता रानी,शेरोवाली बुतरू के खूब अकिल-बुद्दि दे. विनीत: हैप्पी दशहरा मां.. मां: की हाल है हमर बच्चा, मना लिया दुर्गापूजा ? विनीत: मनाना क्या, खाए दबाकर दोपहर में ठेठाके सोए, अभी जाकर जलेबी खरीदेंगे. तुम्हारे और घर के बाकी बच्चा लोगों के भीतर भी थोड़ा-थोड़ा रावण जिंदा रहे मां, बाकी तो पब्लिक जलाकर राख कर ही रही है. मां: सालभर के परब में कुछ औ नहीं तो रावण के जिंदा रहे के कामना करता है रे पगला.. जे सीता मईया के गृहस्थी उजाड़ दिया. विनीत: तुम तो मेरे ही साथ रामायण देखकर बूढ़ी हुई है मां और मैं जवान.

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एक बार तो आ जाओ

तेरे दरस के प्यासे नैना, एक झलक दिखला जाओ. मन से तुम्हें पुकारें साईं, एक बार तो आ जाओ. तुम्हें भक्त प्यारे हैं अपने, रखते सबका सदा ख़याल. फिर मुझ पर क्यों कृपा नहीं की ? बस मेरा है यही सवाल. कमी रह गयी कहाँ भक्ति में, इतना तो बतला जाओ. मन से तुम्हें पुकारें साईं, एक बार तो आ जाओ. दीप जलाए जल से तुमने, सबने देखा तेरा कमाल. महामारी को दूर भगाया, आई थी जो बन कर काल. फंसी भंवर में जीवन नैया, आ कर पार लगा जाओ. मन से तुम्हें पुकारें साईं, एक बार तो आ जाओ.

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आरक्षण नीति की समीक्षा का औचित्य

आरक्षण नीति की समीक्षा अथवा आरक्षण समाप्त करने की पहल: आर०एस० एस० के संघ प्रमुख श्री मोहन भागवत ने देश में आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा करने के लिए गैर राजनैतिक समिति बनाने की पहल की है| सीधे तौर पर कहा जाये तो उन्होनें अस्पष्ट रूप में आरक्षण को समाप्त करने की तरफ इशारा किया है| भारतीय जनता पार्टी और कॉंग्रेस के कुछ नेताओं के द्वारा भी कहा गया है कि अब वक़्त आ गया है कि जाति व धर्म के आधार पर दिए जा रहे आरक्षण पर विचार करने की आवस्यकता है| धर्म व जाति के स्थान पर आर्थिक आधार पर

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जाति के नाम पर

यहाँ सब कुछ होता है जाति के नाम पर यहाँ सब कुछ मिलता है जाति के नाम पर देश यहाँ चलता है जाति के नाम पर धर्म यहाँ पलता है जाति के नाम पर समाज भी चलता है जाति के नाम पर बच्चा पैदा होता है जाति के नाम पर वह बड़ा होता है जाति के नाम पर शिक्षा वह पाता है जाति के नाम पर कर्म भी पाता है जाति के नाम पर धर्म भी पाता है जाति के नाम पर नोंकरी मिलती है जाति के नाम पर शादी भी होती है जाति के नाम पर भिखारी यहाँ होते

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देश की तस्वीर

देश अनेकों जाकर तुमने, भारत की शान बढ़ाई मोदी-मोदी बोल रहे हैं, हर देश में एन०आर०आई लंका में जाकर के मोदी, तुमने पुरानी कथा सुनाई किया राम गुणगान वहाँ पर, रावण की याद दिलाई चन्द क्षणों में किया फ़ैसला, ऐसे तुम हो संज्ञानी नेपाल में तुरंत रसद पहुँचाई, मालदीव में पानी बुरे वक्त में साथ दिया और मदद करी मनमानी सेना को भी भेजा तुमने, ऐसे हो वीर बलदानी पर मेरे देश की प्यारी जनता, हाय तुम्हारी यही कहानी तरसे बूँद-बूँद को विदर्भ वासी, नहीं मिला उन्हें था पानी भूख से व्याकुल जनता मर गई, नहीं पहुँचा कोई दानी ऐसे थे

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धुंध, धुआं और हिंदी का हुंआ-हुंआ

चारो तरफ धूल, धुंध और धुआं है। आंखें फाड़कर देखो, तब भी कुछ समझ में नहीं आता कि हो क्या रहा है। हिंदी के जंगल में आजकल सिर्फ हुआं-हुआं है। कितना भी सुनने की कोशिश करो कुछ भी सुनाई नहीं दे रहा है। भाषा, संस्कृति और कला के पहेदारों में आधे गांधी जी के बंदर बन गये हैं। करीब एक चौथाई पाला बदलकर सरकार की गोद में बैठ गये हैं या बैठने की कोशिश कर रहे हैं और जो बाकी बचे हैं, वे हुंआ-हुंआ कर रहे हैं। कोलाहल बढ़ रहा है, लेकिन हिंदी के सपूत क्या कह रहे हैं, किससे

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आम जनता के लिए विश्व हिन्दी सम्मेलन प्रतिभागिता शुल्क मात्र पांच हजार रु:

चूंकि यह आयोजन भोपाल में हो रहा है, अतः नित्य की छोटी बड़ी सूचनाएं और समाचारों को मैं फालो करता रहा हूँ. तो मोटा-मोटी बात यह है – अब तक (और आगे भी, चाहे सरकारें कोई भी, कैसी भी रहें) यह और इस तरह के आयोजन अशोक चक्रधरों और अशोक बाजपेयीयों जैसे चन्द लोगों के हाथों में ही रहेंगे, और उनके ही फालोअर बुलाए जाएंगे. आम जनता के लिए 5000 रुपए का पंजीकरण अनिवार्य था, तो जनता ने बहिष्कार कर दिया. मैंने भी कर दिया. अनुमान था कि (कैपिंग थी 3000 की, प्रथम आओ प्रथम पाओ के तर्ज पर) लोग

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प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का बुद्ध प्रेम

श्री नरेंद्र मोदी जी ने अपनी विदेश यात्राओं जैसे भूटान. चीन, जापान आदि तथा बिहार में बुद्ध एवं बौद्ध धम्म के प्रति जो प्रेम प्रकट किया है उसके लिए वे धन्यवाद के पात्र हैं| “बौद्ध धम्म” के प्रचार और प्रसार के लिए मौर्य वंशी सम्राट अशोक के द्वारा किए गये कार्यों की भी उन्होंने प्रशंसा की| बिहार के बोध गया में 5, सितंबर,2015 को हुए अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन में बौद्ध बिहार के जीर्णोद्धार की भी घोषणा की है| गुजरात के देव नी मोरी में विश्व की सबसे ऊँची दूसरी बुद्ध प्रतिमा लगाने की भी सरकार की योजना है| इन सबके

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प्यार की इंतहाँ

आजा रे……. आजा रे, ओ मेरे प्यार तू आजा आके दिल में समाज़ा रे होकर अधीर यहाँ मैं बैठी आकर धीर बंधाजा रे आजा रे……… तन भी तू है, मन भी तू है,जान भी मेरी तू ही तू है धन भी तू है,इज़्ज़त तू है,मान भी मेरा तू ही तू है कर दिया तुझको सब कुछ अर्पण, कुछ भी नहीं है अपना तुझसे है अब जीवन मेरा, तू ही है अब मेरा सपना पास में मेरे जो कुछ भी था, सब कुछ तुझको यार दिया दिल दे करके मैंने यारा, तन भी तुझ पर वार दिया हो जहाँ भी इच्छा

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