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FREEDOM

Since 1947 on 15th, August of every year, we are celebrating the Independence Day of our country. Each state of the country is celebrating this great day in different ways. Most of the people of country are also enjoying the celebration of independence in their own ways. But the important question is that what type of freedom we are enjoying? Are we enjoying true freedom? No. Not at all. May be some people are enjoying

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Life Poem Poetry

जीवन

जीवन है एक अनुपम ड्रामा आज यहाँ कल और कहीं जाना चाहे कोई कितने कर्म बनाये चाहे कोई कितने धर्म लुटाये जिस दिन आकर डाले घेरा सब रह जाएँ तेरे तंबू और डेरा रह नहीं सकता जिसको है जाना जीवन है एक अनुपम ड्रामा आज यहाँ कल और कहीं जाना दुनियाँ के हैं खेल निराले समझ न पाते इन्हें मतवाले खेल दिखाए आकर मदारी सब खेल देखें बनकर अनारी समझ न आता खेल यह पुराना

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Love Poem Poetry

रास्ता

आये हैं चलने को चलते रहेंगे जलते हैं लोग ये जलते रहेंगे चाहे कहे कोई हमें काली परछाइयाँ चाहे कोई दे हमे लाखों दुहाईयाँ भरते हैं आहें ये भरते रहेंगे जलते हैं लोग ये जलते रहेंगे आये हैं चलने को चलते रहेंगे जलते हैं लोग ये जलते रहेंगे छोड़ो भी इन लोगों को जाने दो इन लोगों को मिलते हैं लोग ये मिलते रहेंगे जलते हैं लोग ये जलते रहेंगे आये हैं चलने को चलते

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mohabbat
Hindi Love Poem Poetry

मोहब्बत

जो तुम मोहब्बत करोगे हमारी तरह हम भी मोहब्बत करेंगे तुम्हारी तरह हमारी मोहब्बत है हीर-रांझे जैसी हमारी मोहब्बत है शीरी-फरहाद जैसी जो तुम्हारी मोहब्बत है लैला-मजनूं की तरह हम भी मोहब्बत करेंगे तुम्हारी तरह मोहब्बत ही मोहब्बत से मोहब्बत किया करती है बेवफा दुनियाँ तो बस दगा किया करती है मोहब्बत में मर जाते हैं मोहब्बत करने वाले मोहब्बत अमर है जो कभी न मरा करती है मोहब्बत में जीते नहीं मोहब्बत जिया करते

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रचना

रचना, रचना, रचना! रचना मैं जब-जब तुम्हारे बारे में सुना करता था तो अक्सर मेरे मन में विचार आया करते थे कि यह रचना कैसी होगी? रचना ऐसी होगी| रचना वैसी होगी| पर सच मानना जब से मैने तुम्हारा अवलोकन किया है, मानो जैसे मेरे तो होश ही उड़ गये हों| मैं तो निःशब्द ही हो गया हूँ| मेरे मन में यही विचार उठते रहते हैं कि किसी की रचना इतनी सुन्दर कैसे हो सकती

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Culture Education Social Social Values and Norms

संस्कृति, संस्कार और शिक्षा (भाग-३)

संस्कृति और शिक्षा: मानव समाज को, स्वस्थ, मानवीय, उत्कृष्ट संस्कृति का स्वरूप प्रदान करने के लिए उसे स्वस्थ, मानवीय संस्कारों को देना होगा जो संस्कृति के मानवीय पक्ष से ही प्राप्त किए जा सकते हैं| इतिहास, संस्कृति परिवर्तन प्रक्रिया है| परिवर्तन उत्पादन के साधनों के परिवर्तन से आता है| उत्पादन के साधनों के परिवर्तन के लिए समाज को सही समझ तथा ज्ञान देना होगा और इसके लिए मानवीय शिक्षा की आवस्यकता होगी| ऐसी शिक्षा की

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Education Hindi India Indian Culture Opinion Social Social Values and Norms

संस्कृति, संस्कार और शिक्षा (भाग-2)

संस्कारों की जननी संस्कृति:- संस्कृति ही संस्कारों की जननी होती है| मानव समाज के विकास और उसके उत्थान के लिए अच्छे, स्वस्थ, मानवीय संस्कारों की आवश्यकता होती है और वे अच्छे, स्वस्थ, मानवीय संस्कार हमें स्वस्थ मानवीय संस्कृति से ही मिल सकते हैं| इतिहास तथा सांस्कृतिक परम्पराओं के प्रति ऐसा ऐतिहासिक तथा विवेकशील दृष्टिकोण अपनाने के लिएसही समझ तथा तथयपूर्ण ज्ञान की आवश्यकता होती है| मानवीय दृष्टिकोण की आवश्यकता है| देश की सांस्कृतिक महानता के

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Culture Hindi India Opinion Social Social Values and Norms

संस्कृति, संस्कार और शिक्षा (भाग-१)

संस्कृति:- सामान्यतः लोग ‘संस्कृति’ का सम्बन्ध कलाओं अथवा ललित कलाओं तक ही सीमित रखते हैं क्योंकि जब कहीं कलात्मक अथवा ललित कलाओं या वाद्य संगीत आदि के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं तो यह कहा जाता है की सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया है| इसी प्रकार यदि कहीं पर साहित्यिक या काव्य पाठ आदि का आयोजन होता है तो उसे साहित्यिक कार्यक्रम का नाम दिया जाता है| धर्म से सम्बन्धित कार्यक्रम को धार्मिक, विज्ञान

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नेता और नैतिकता

कटते हैं सर जवानों के देश की सरहदों पर दुश्मनों से लड़ते-लड़ते थकती नहीं जवां नेताओं की अपनी बहादुरी बयाँ करते-करते दुश्मनों से तो बस जवान ही लड़ा करते हैं नेता लोग तो दूर ही से आदेश दिया करते हैं नेता खाते हैं घूस हथियारों की खरीद में गोली खाते हैं सीने पर जवान दुश्मनों की नेता तो बस कूटनीति ही किया करते हैं ये तो जवान हैं जो सीधे युद्ध किया करते हैं नेता

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