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Hindi Love Poem Poetry

प्रेम कहानी

लड़की:–   तू मेरे दिल का राजा मैं तेरे दिल की रानी आओ हम तुम दोनों मिलकर लिखें प्रेम कहानी तू मेरे दिल का राजा मैं तेरे दिल की रानी लड़का:–   मैं तेरे दिल का राजा तू मेरे दिल की रानी आओ हम तुम दोनों मिलकर लिखें प्रेम कहानी लड़की:–   ऋतु ये सुहानी आई सावन के बदरा लाई जब ये बादल छाए गगन में रिम-झिम बरसा पानी तू मेरे दिल का राजा मैं तेरे दिल की

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Democracy Governance Government India Opinion Politics Poverty Social Top

आरक्षण नीति की समीक्षा का औचित्य

आरक्षण नीति की समीक्षा अथवा आरक्षण समाप्त करने की पहल: आर०एस० एस० के संघ प्रमुख श्री मोहन भागवत ने देश में आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा करने के लिए गैर राजनैतिक समिति बनाने की पहल की है| सीधे तौर पर कहा जाये तो उन्होनें अस्पष्ट रूप में आरक्षण को समाप्त करने की तरफ इशारा किया है| भारतीय जनता पार्टी और कॉंग्रेस के कुछ नेताओं के द्वारा भी कहा गया है कि अब वक़्त आ गया है कि

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Government India Life Opinion Poem Poetry Politics Poverty Social Social Values and Norms Uncategorized

जाति के नाम पर

यहाँ सब कुछ होता है जाति के नाम पर यहाँ सब कुछ मिलता है जाति के नाम पर देश यहाँ चलता है जाति के नाम पर धर्म यहाँ पलता है जाति के नाम पर समाज भी चलता है जाति के नाम पर बच्चा पैदा होता है जाति के नाम पर वह बड़ा होता है जाति के नाम पर शिक्षा वह पाता है जाति के नाम पर कर्म भी पाता है जाति के नाम पर धर्म

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Hindi India Opinion Poem Poetry Politics Poverty

देश की तस्वीर

देश अनेकों जाकर तुमने, भारत की शान बढ़ाई मोदी-मोदी बोल रहे हैं, हर देश में एन०आर०आई लंका में जाकर के मोदी, तुमने पुरानी कथा सुनाई किया राम गुणगान वहाँ पर, रावण की याद दिलाई चन्द क्षणों में किया फ़ैसला, ऐसे तुम हो संज्ञानी नेपाल में तुरंत रसद पहुँचाई, मालदीव में पानी बुरे वक्त में साथ दिया और मदद करी मनमानी सेना को भी भेजा तुमने, ऐसे हो वीर बलदानी पर मेरे देश की प्यारी जनता, हाय

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Democracy Government Hindi India Opinion Religion Social Social Values and Norms

प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का बुद्ध प्रेम

श्री नरेंद्र मोदी जी ने अपनी विदेश यात्राओं जैसे भूटान. चीन, जापान आदि तथा बिहार में बुद्ध एवं बौद्ध धम्म के प्रति जो प्रेम प्रकट किया है उसके लिए वे धन्यवाद के पात्र हैं| “बौद्ध धम्म” के प्रचार और प्रसार के लिए मौर्य वंशी सम्राट अशोक के द्वारा किए गये कार्यों की भी उन्होंने प्रशंसा की| बिहार के बोध गया में 5, सितंबर,2015 को हुए अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन में बौद्ध बिहार के जीर्णोद्धार की भी

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Corruption Hindi Opinion Poem Poetry Poverty

अरमानों की चिता

चन्द लुटेरों ने मिलकर देश की सम्पदा चुराली पूंजीपतियों ने नेताओं से मिलकर जनता की कुर्की करवाली खुशियों की यहाँ मौत हुई है अरमानों की चिता जली है आने को आई आज़ादी पर भूख से जनता यहाँ मरी है गिद्ध खा रहे दूध मलाई हंस बसे हैं चिड़ियाघर मालिक बन पूंजीपति डोलें भृष्टाचारी बैठे सिंहासन पर मालिक तो शोषक ही हैं जनता तो बस दासी है ऐसा आया वक्त कि, जनता भृष्टों की चपरासी है

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Hindi Love Poem Poetry

दिल एक दर्पण

दिल एक दर्पण ही तो है प्यार से संभालना पड़ता है वरना तो यों ही टूट जाता है दिल एक दर्पण ही तो है कितने भी छींटे दामन पर हों इसके प्यार से साफ करो तो सब छूट जाता है नफ़रत का पड़े एक छींटा भी इस पर लाख पोंछो अपना निशाँ छोड़ जाता है दिल एक दर्पण ही तो है प्यार से संभालना पड़ता है वरना तो यों ही टूट जाता है दिल एक

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Hindi Life Opinion Philosophy Poem Poetry

मोह

नहीं जगत में कोई अपना काहे मनुवा सोच करे दुनियां सारी रंगमंच है, तू शैलूष का पाठ करे । यहाँ अनेकन बनते साथी भाई, बहिन और जीवन साथी रंगमंच से उतरे नीचे, कोई न तेरे साथ चले नहीं जगत में कोई अपना काहे मनुवा सोच करे दुनियां सारी रंगमंच है, तू शैलूष का पाठ करे । भाई, बहिन, पिता और माता सबसे है ये झूठा नाता कोई तेरे साथ न जाता, जात वही जो कर्म

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Hindi Love Opinion Poem Poetry Social Uncategorized

गुलिस्ताँ

बड़ी कोशिशों से हमने बनाया था ये गुलिस्ताँ प्यार के सपनों से हमने सजाया था ये गुलिस्ताँ अरमानों के आसमाँ पर रचाया था ये गुलिस्ताँ खुशियों की तरंगों पर लहराया था ये गुलिस्ताँ भीनी-भीनी खुशबू फूलों की फैला रहा था गुलिस्ताँ मंद-मंद मुस्कान लिए महका रहा था गुलिस्ताँ कैसा हसीन लगता था ये प्यारा सा गुलिस्ताँ मानो अपनी ही अदा में मुस्कराता गुलिस्ताँ पर न जाने क्यों अपनों को अखरा था गुलिस्ताँ जो इतनी बेदर्दी

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Happiness Hindi Life Love Opinion Poem Poetry Social

नैतिक बनाम अनैतिक

जो सोये हैं नींद में गहरी हम उठा सकते हैं उन्हें पर जो हैं जागकर सोए हम नहीं उठा सकते उन्हें उजाले में किया हर कार्य नैतिक नहीं होता अंधेरे में किया हर कार्य अनैतिक नहीं होता अंधकार और प्रकाश तो प्रकृति का नियम है जो दोनों में करे कार्य नैतिक वही बड़ा संयम है थक जाते हैं कार्य से दिन में तो रात विश्राम देती है जब मन हो जाता है कुंठित तो रात

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