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Understanding Hinduism Vs Hindutva

In recent times, the idea of Hindutva being tagged as ‘Hinduistic’ in behavior has surfaced. However, both are completely different concepts and cannot be put on the same pedestal. It’s crucial to understand the difference between the two. Hinduism is one of the oldest religions in the world. As noted leader and thinker, Shashi Tharoor says, “Hinduism is ‘Anant’. It has neither a beginning nor an end.” Swami Vivekanand’s speech at the ‘World Parliament of Religions’

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Without Bose Freedom would have eluded India maybe forever!

Netaji Subhash Chandra Bose can arguably be called the ‘Father of Indian Armed Forces’ for he laid the seeds of what would become the Indian army, navy & air force. Bose’s aim to free India from British Colonialism found resonance in Germany & Japan, Britain’s enemies. While in Germany & Japanese controlled Singapore, Bose was able to put together Indian residents in Germany & Singapore as well as Prisoners of War (PoW) to form the

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Is Delhi ready for BS-VI fuel?

For the past two winters, Delhi has witnessed high smog levels owing to vehicular pollution & crop-burning. To ensure that pollution is kept under control, the Delhi government decided to introduce BS-VI grade petrol & diesel in the capital two years ahead of schedule in April 2018. But the move by the government, though praiseworthy and much needed, presents crucial issues that need remedy; 1. Delhi has a vehicular population in excess of 1 Crore.

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प्रदुषण से चाहिए आज़ादी!

“जंगल-जंगल पता चला है, चड्डी पहेन के फूल खिला है”। मोगली और उसके जंगली दोस्तों के कारनामों से भरा यह गाना आज भी मन को उसी तरह भाता है जैसा यह आज से तकरीबन 20 साल भाता था। वाकई मे जंगल का दृश्य अध्बुध है। प्रकृति का यह अनमोल तोफा ना जाने मनुष्य को कितने सदियों से जीवित रख रहा है। लेकिन दुःख की बात है की लालच और क्रूरता मे लुप्त मानव ने वन-वातावरण

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प्रदुषण ले लड़ने के लिए कुछ आयुर्वेदिक रास्ते

कैसे दिन आ गए हैं? भगवान् का दिया हुआ एक अनमोल तोफा- हवा- को भी इंसान ने इतना दूषित कर दिया है कि जगह-जगह लोग प्रदूषण से बचने के लिए मुखौटे और प्यूरीफायर खरीद रहे हैं। घर से ऑफिस यातायात करना भी मेरे लिए खतरे से कम नहीं रहा। जलती आखें, डगमगाती सासें और सिरदर्द आम बात हो चुकी है। हालांकि मैं तकनीकी यन्त्र जैसे कि प्यूरीफायर इत्यादि के खिलाफ नहीं हूँ, प्रदूषण से लड़ने

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बिटकॉइन आखिर है क्या ?

आये दिन कई कंपनियां ‘बिटकॉइन’ के बारे मे बात कर रही हैं। आखिर यह नई मुद्रा प्रणाली है क्या? क्या यह सुरक्षित है? क्या इससे घोटाले मे कमी आएगी? ऐसे कुछ प्रश्न मेरे दिमाग मे आये थे। चूँकि आजकल स्मार्टफ़ोन का ज़माना है, ‘बिटकॉइन’ के लेन-देन के लिए कंपनियों ने कई एप्लीकेशन निकाले हैं। सीधी भाषा मे यदि बात की जाए तो ‘बिटकॉइन’ आभासी मुद्रा है। यानी आप कंप्यूटर के माध्यम से बिटकॉइन यानी ‘वर्चुअल

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मैं, आप और ए.आई.

‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ या ‘आर्टीफिशिअल इनटेल्लिजेंस’ (ए.आई.) आजकल चर्चा का विषय है। ‘सीरी’, ‘कौरटाना’, ‘बिक्स्बी’ नामक कई प्रभावशाली ए.आई.  हमारे मोबाइल, कंप्यूटर और टेबलेट के ज़रिये हमारे पसंद-नापसंद का विश्लेषण करते हैं और उसके अनुसार हमे सबसे उपयुक्त सुझाव देते हैं। हालांकि, ए.आई. के आ जाने से हमारा जीवन काफी सरल और तेज़ हो गया है, इसके दुष्प्रभाव से भी हमे वाकिफ होना चाहिए। ए.आई. के ऊपर ज़्यादातर ज्ञान मुझे फ़िल्मी दुनिया से मिला है। ‘टर्मिनेटर’,

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गरीबी हटायेंगे लेकिन कैसे?

आज ‘अंतर्राष्ट्रीय गरीबी हटाओ दिवस’ है। संयुक्त राष्ट्र ने आज से ठीक पच्चीस साल पहले आज के दिन को इस नेक कार्य के लिए चुना था। पिछली सदी शायद मानवता के लिए सबसे भीषण और दर्दनाक समय रहा है। दो विश्व युद्ध, परमाणु हमलों, ‘कोल्ड वौर’ जैसे संकटमय क्षणों के अलावा कई गुलाम देशों को आज़ादी मिली। अफ्रीका, एशिया और दक्षिण अम्रीका के कई देशों ने स्वतंत्रता की सांस ली। लेकिन इसी स्वतंत्रता के साथ

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खाना वाकई मे खज़ाना है!

बचपन मे जब मैं खाना नष्ट करता था, तो मेरे परिवार वाले मुझे डांटते और कहते कि,“अन्न नष्ट करने का मतलब है किसी दुसरे को खाने से वांछित करना”। चूँकि मैं छोटा था, मुझे इसका मतलब समझ नहीं आया। जब मैं थोड़ा बड़ा हुआ और दुनिया दारी की मुझे समझ होने लगी, तब मुझे इस कथन का तात्पर्य पूर्ण रूप से समझ मे आया। अब मेरी कोशिश हमेशा से यही रहती है की यदि मैंने

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Disasters don’t come knocking!

Disasters don’t wait to happen. They happen when one least expects them. Today is International Day for Disaster Reduction. In the past couple of months, the world has seen a series of catastrophes. From earthquakes and hurricanes ravaging the North American and Mexican coasts to coastal rains lashing Eastern India, Bangladesh and Nepal, loss of human and animal life has been tremendous and unforgiving. Due to increasing global warming and melting of polar ice caps,

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