sushil_nitish_lalu
India Opinion Politics Politics

Bunty & Babli, the story of Bihar

“Aisa koi saga nahi, jisko humne thaga nahi”. The Bunty & Babli mandate of Bihar politics is over. Like the movie, Bunty (Read: Laloo) conned Babli (Nitish) in creating a new alliance. It was dubbed as Mahagathbandhan against communal politics. What Bunty did not decipher is, this is 2017 and the government is hard selling women empowerment. So Babli did a double con and left Bunty out in the cold. “Sahi aur galat mein chun

Read more
Featured Humour Philosophy Social Issues

Sandesh Rishi-Episode 2 : “सत्य क्या है…परमात्मा या परम झूठ!” रवीश कुमार।

सत्य क्या है…परमात्मा या परम झूठ! सत्य की परिभाषा में नया ट्विस्ट लेकर आये हैं रवीश कुमार। संदेश ऋषि एपिसोड नंबर 2।  

Read more
Entertainment Feminism Generation Y Opinion Shopping

Guy Outside a Girl Trial Room: Experiences

  Light pink, dark pink, lavender pink, rose pink, salmon pink….blah pink. Never had an idea what the actual difference between them really is, till you actually ended up befriending a girl and started going out with her. Yeah right, once you started dating her and took her shopping, you realised the pinks are a lot of trouble. Here Anshuman Sharvesh talks about what that generally means and how even though you have no idea

Read more
Feminism Fiction Hindi Literature Short Story Story Women

शाहबलूत का पत्ता!!! – भाग – ४

शाहबलूत का पत्ता!! मीलों-मील सूखी घास सड़क के दोनों तरफ़ बड़ी मुस्तैदी से फैली हुई है| इसी के बीच वो दौड़ी चली जा रही है| मृगतृष्णा सी ये घास एक ही बूँद के पड़ने से हरिया जायेगी| मन के विस्तृत बीहड़ में और है ही क्या  सिवाय इस जली-सूखी घास और इस सड़क के| ये सड़क इंतहाई तौर पे सीधी है  और इसकी बुनियाद इतनी टेढ़ी है, इसमें इतनी कज़ी है कि ज़रा दूर ही

Read more
Feminism Fiction Hindi Literature Short Story Story Women

शाहबलूत का पत्ता!!! – भाग – ३

उदासियों के चेहरे कभी बूढ़े नहीं होते ! “लश्कर-बॉम्बे” यादों में झिलमिलाता ये नाम उसे अब भी रातों में जगा जाता था | वही उम्र थी उसकी सत्रह-अठारह साल, इंटर के इम्तिहान दिए थे| कैसी गरम आंधी भरी शाम की रात थी वो उसे आजतक याद है| उसके एक हाथ में सुनार का बटुआ था जिसमें सत्रह सौ रूपये, जीजी की एक चूड़ी और छोटी मामी की दो अंगूठियाँ थीं,और दूसरे हाथ में रतीश का

Read more
Feminism Fiction Hindi Life Literature Short Story Story Women

शाहबलूत का पत्ता!!! – भाग – २

चिठ्ठियाँ जिंदा लाश होती हैं! धूप का तीखापन, दोपहर की निसंगता और उजाड़ सा अपना अस्तित्व खोता ये छोटा स्टेशन| उसने दायें-बायें सर घुमा के देखा, एक चमकदार चौंध हर ओर पसरा पड़ा था|दूर-दूर तक सिवाय चिमनियों के कुछ और नज़र नहीं आता था| या तो उस चौहद्दी के बाहर हर चीज़ बहुत छोटी है या अब ये चिमनियाँ बहुत ऊंची उठ गयीं हैं| पिछली बार जब आई थी यहाँ तो सात साल पहले आई

Read more
Feminism Fiction Hindi Life Literature Short Story Story Women

शाहबलूत का पत्ता!!! – भाग – १

प्रेम, युद्ध से पलायित देवताओं का स्वांग भर है! चौमासों की रात, रात की उमस और आकाश में बादल| आकाश का हर हिस्सा आज बादलों से पटा पड़ा था | बूँदें लबालब भरी हुई थीं, इतनी कि कोई एक बूँद भी हिले तो बीच का तारतम्य ही टूट जाये | “आज पानी न पड़े” उसने सोचा | उधर छत पर कोई किसी को कहानी सुना रहा था जिसके टूटे-टूटे शब्द उसके कानों में पड़ रहे

Read more
Religion Terrorism

Think of Tarishi, one with the stars

This eid, spare a moment for Tarishi Jain. She, the one who of a religion that preaches and practices the ideology of live and let live, was killed by someone because she couldn’t recite a verse from the holy Quran.   I know personally speaking you don’t owe her an apology, but if it isn’t too much to ask for, please pray for her. Maybe ‪#‎terrorhasnoreligion‬ but when people like Tarishi world over are being killed in

Read more