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Indira Gandhi the environmentalist!

When we talk about India’s only female Prime Minister till date, what comes to our mind? Emergency, ‘Garibi Hatao Andolan‘, 1971 Bangladesh War, Operation Bluestar etc. But it is surprising to note that Indira Gandhi was also a lover of nature. She was a lover of mountains, of tranquil seas and of beautiful birds that roamed India in all their grace & magnanimity. Indian National Congress (INC) member Jairam Ramesh in his book ‘Indira Gandhi: A life

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Let Padmavati be released!

Padmavati is one of India’s most anticipated historical films that almost everyone is eagerly waiting to watch. But due to the historical context of the film that deals with the exploits of a Rajput princess against the tyranny of a Muslim conqueror, the film has garnered its fair share of controversy. Groups such as the Shree Rajput Karni Sena (SRKS) and the Rajasthan State Women’s Commission (RSWC) have mobilized in large numbers and have threatened

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Going the GI way!

Recently, West Bengal (WB) and Odisha had a fight over the ownership of the delicious sweet, Rasogolla. WB won the ownership owing to the fact that it was found to be Geographically Indicated (GI) in WB. Geographical Indicator (GI) ensures that an innovation or item that is produced within a country is protected in a manner such that its conception, creation and distribution is managed by the original innovator. GI is part of the original

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प्रदुषण से चाहिए आज़ादी!

“जंगल-जंगल पता चला है, चड्डी पहेन के फूल खिला है”। मोगली और उसके जंगली दोस्तों के कारनामों से भरा यह गाना आज भी मन को उसी तरह भाता है जैसा यह आज से तकरीबन 20 साल भाता था। वाकई मे जंगल का दृश्य अध्बुध है। प्रकृति का यह अनमोल तोफा ना जाने मनुष्य को कितने सदियों से जीवित रख रहा है। लेकिन दुःख की बात है की लालच और क्रूरता मे लुप्त मानव ने वन-वातावरण

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नोटबंदी किसी बेवकूफी से कम नहीं!

नोटबंदी को आज एक साल हो गया है। मानो कल ही की बात हो। पिताजी का स्कूटर थामे मै एक बैंक से दुसरे बैंक के चक्कर काट रहा था इसी उम्मीद मे की कुछ पैसे मिल जाएँ जिससे की दादी अपने दवाई खरीद सके, दूधवाले को पैसे मिल सके और कामवाली को समय पर तंखा मिल सके। मेरी हालत फिर भी देश के कई मज़दूर, फलवाले और किसानों से बेहतर है। प्रधान मंत्री मोदी के 8

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अब ‘हेड ट्रांसप्लांट’ दूर नहीं!

चिकित्सा की दुनिया मे दिन ब दिन इंसान नई ऊँचाइयों को छु रहा है। टी.बी., चिकन पौक्स, स्मौल पॉक्स जैसे खतरनाक बीमारियों का खात्मा भी इंसान ने अपनी लगन, कोशिश और दृढ संकल्प से पूर्ण किया। लेकिन फिर भी ऐसे कई रोग अब भी उपस्थित हैं जिस पर इंसान ने जीत हासिल नहीं की है। कैंसर, एड्स, लकवा जैसी बीमारियाँ अब भी मानवता के लिए ‘खतरा’ का प्रतीक है। ज़्यादातर मामलों मे शरीर की दुर्गम

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Captain Fantastic will leave you fantasising for more!

Whenever I used to read about Robinson Crusoe and his long and adventurous stay in an island for close to 28 years, it used to fill me with wonder. Imagine living away from civilization, technology and people for close to 3 decades! Well, on one side, it’s quite scary but on another side, if one has the guts and a strong attitude, then the experience is nothing less than phenomenal. While scavenging through some popular

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भारत पूर्ण रूप से पोलियो-मुक्त नहीं हुआ है !

आज अंतर्राष्ट्रीय पोलियो दिवस है। ‘पोलियोमायलाईटिस’ एक ऐसा रोग है जिसने सिर्फ 100 साल पहले तक दुनिया मे आतंक फैला रखा था। लेकिन निरंतर शोधकार्य और आधुनिक चिकित्सा माध्यमों के आ जाने से यह काफी हद तक दुनिया भर से ख़त्म हो गया है। पोलियोवायरस इंसान के मासपेशियों को कमज़ोर बना देता है। वायरस केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (central nervous system) मे स्थित मोटर न्यूरॉन पर हमला करती है जिससे की शरीर अलग-अलग जगहों से अकड़

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मैं, आप और ए.आई.

‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ या ‘आर्टीफिशिअल इनटेल्लिजेंस’ (ए.आई.) आजकल चर्चा का विषय है। ‘सीरी’, ‘कौरटाना’, ‘बिक्स्बी’ नामक कई प्रभावशाली ए.आई.  हमारे मोबाइल, कंप्यूटर और टेबलेट के ज़रिये हमारे पसंद-नापसंद का विश्लेषण करते हैं और उसके अनुसार हमे सबसे उपयुक्त सुझाव देते हैं। हालांकि, ए.आई. के आ जाने से हमारा जीवन काफी सरल और तेज़ हो गया है, इसके दुष्प्रभाव से भी हमे वाकिफ होना चाहिए। ए.आई. के ऊपर ज़्यादातर ज्ञान मुझे फ़िल्मी दुनिया से मिला है। ‘टर्मिनेटर’,

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गरीबी हटायेंगे लेकिन कैसे?

आज ‘अंतर्राष्ट्रीय गरीबी हटाओ दिवस’ है। संयुक्त राष्ट्र ने आज से ठीक पच्चीस साल पहले आज के दिन को इस नेक कार्य के लिए चुना था। पिछली सदी शायद मानवता के लिए सबसे भीषण और दर्दनाक समय रहा है। दो विश्व युद्ध, परमाणु हमलों, ‘कोल्ड वौर’ जैसे संकटमय क्षणों के अलावा कई गुलाम देशों को आज़ादी मिली। अफ्रीका, एशिया और दक्षिण अम्रीका के कई देशों ने स्वतंत्रता की सांस ली। लेकिन इसी स्वतंत्रता के साथ

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