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कहाँ जाइएगा आप

खुद से बिछड़ के दूर कहाँ जाइएगा आप, जलती है सुबहो शाम कहाँ जाइएगा आप I   शहरों से मोहोब्बत के निशां मिट रहें हैं रोज़, मंजिल ख़बर नहीं है कहाँ जाइएगा आप I   कांटे बिछे राह में सूरज चढ़ा हुआ, बिन साया नंगे पाँव कहाँ जाइएगा आप I   दुनिया ये नफरतों के शिकंजे में फंसी है, अपनी गली से दूर कहाँ जाइएगा आप I   इक आग सी लगी है मेरे दिल के आस पास, ये घर भी जल गया तो कहाँ जाइएगा आप I

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केहर के शोले

कैसे बढ़ते हैं हवाओं में केहर के शोले I किसने पाले हैं छिपाए हैं केहर के शोले I   गर्म बाहें वो पनाहें वो दोस्ती का चलन, बुझ गए सारे अलम रह गए फकत शोले I   हमने माना की शुभा है तुम्हे उनपे लेकिन, नफरतें कब से, जमा कब से दिलों में शोले I   उनसे कह दो जो भुला बैठे हैं इमां अपना, उनके दीवान जला देंगे उन्ही के शोले I

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जिस देश में खिलती है सुबहा

जिस देश में खिलती है सुबहा, जिस देश में रंगीं शाम ढले, जिस देश के बागों में कलियाँ , हंसतीं शबनम की बूँद तले, उस देश के हम वाशिंदे हैं I जिस देश की नदियाँ कहती हैं, इंसान की हिम्मत का किस्सा I जिस देश के मैदानों ने सुनी, इंसान की ताकत की गीता I हम रिंद हैं उस मैखाने के, जिसकी मदिरा ये जग पीता, देकर के अमन का पैमाना, इसके साकी ने जग जीता I है फक्र हमें इस गुलशन पर, इसके फूलों में प्यार बसे, जिस देश में खिलती हो सुबहा, जिस देश में रंगीं शाम ढले

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यदि तू विस्तार चाहता है

खुशबू बन उड़ जा यदि तू विस्तार चाहता है I मानव को कर प्यार यदि तू प्यार चाहता है I मोती बन मत बैठ कोष्ठ में, सीपी के जैविक प्रकोष्ठ में, सागर में मिल जा, यदि तू विस्तार चाहता है मानव को कर …… I क्या कहता है अंतर्मन में, शंखनाद बन विचार गगन में, चेतन को बिखरा, यदि तू विस्तार चाहता है मानव को कर …… I मनुज योनी का धर्म समझ ले, जीवन का यह मर्म समझ ले, शांतिदूत बन जा, यदि तू विस्तार चाहता है मानव को कर …… I क्यूँ सिमटा सकुचा बैठा है ? जीवन

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चलो इस बार

चलो इस बार कुछ ऐसा भी कर लें I सेहर के वास्ते सूरज को चुन लें I   बोहोत सोये हैं हम गफलत की नींदें, खुली आँखों से भी कुछ खाब बुन लें I   हमारे हाथ में ताकत है सारी, चलो तदबीर को तकदीर कर लें I   हमीं हैं मुल्को मिल्लत की उम्मीदें, एक कोशिश करें सूरत बदल लें I

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एक बार तो आ जाओ

तेरे दरस के प्यासे नैना, एक झलक दिखला जाओ. मन से तुम्हें पुकारें साईं, एक बार तो आ जाओ. तुम्हें भक्त प्यारे हैं अपने, रखते सबका सदा ख़याल. फिर मुझ पर क्यों कृपा नहीं की ? बस मेरा है यही सवाल. कमी रह गयी कहाँ भक्ति में, इतना तो बतला जाओ. मन से तुम्हें पुकारें साईं, एक बार तो आ जाओ. दीप जलाए जल से तुमने, सबने देखा तेरा कमाल. महामारी को दूर भगाया, आई थी जो बन कर काल. फंसी भंवर में जीवन नैया, आ कर पार लगा जाओ. मन से तुम्हें पुकारें साईं, एक बार तो आ जाओ.

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अबकी बार जनम पाया तो

अबकी बार जनम पाया तो, प्रभु से तुम्हे मांग आऊंगा. नैनों में तस्वीर तुम्हारी, पांओं में ज़जीर पड़ी है. हर ख़त का उत्तर कैसे दूँ ? पहरे पर तक़दीर खड़ी है. कल को राज -ताज बदलेगा. ये सामान -साज बदलेगा. तुम सुनना, संसार सुनेगा. गीत-अगीत सभी गाऊंगा. अबकी बार जनम पाया तो, प्रभु से तुम्हे मांग आऊंगा. तुम मेरी हर सच्चाई को, कवि का पागलपन कहती हो. पर मेरे गीतों से अपना आँचल भरने को कहती हो. ये कैसी है रीति तुम्हारी ? ये कैसी है प्रीति तुम्हारी ? ये अजीब आवरण हटेगा. भेद-अभेद जान जाऊंगा. अबकी बार जनम पाया

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The Writer

You know what’s the best thing about being a writer? We live different lives every single moment. We watch things much more keenly. What to the world is pointless and inciting, for its inviting. We don’t speak much, but let our pens do the talking. We don’t gossip much, but ensure our work gets people talking. We don’t hate people, cultures or caste. Instead, we embrace them, learn from them, and capture them in our words. Beauty for us isn’t skin deep, but deeper than even the soul. Love for us isn’t a four letter word, but a four verse

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जाति के नाम पर

यहाँ सब कुछ होता है जाति के नाम पर यहाँ सब कुछ मिलता है जाति के नाम पर देश यहाँ चलता है जाति के नाम पर धर्म यहाँ पलता है जाति के नाम पर समाज भी चलता है जाति के नाम पर बच्चा पैदा होता है जाति के नाम पर वह बड़ा होता है जाति के नाम पर शिक्षा वह पाता है जाति के नाम पर कर्म भी पाता है जाति के नाम पर धर्म भी पाता है जाति के नाम पर नोंकरी मिलती है जाति के नाम पर शादी भी होती है जाति के नाम पर भिखारी यहाँ होते

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देश की तस्वीर

देश अनेकों जाकर तुमने, भारत की शान बढ़ाई मोदी-मोदी बोल रहे हैं, हर देश में एन०आर०आई लंका में जाकर के मोदी, तुमने पुरानी कथा सुनाई किया राम गुणगान वहाँ पर, रावण की याद दिलाई चन्द क्षणों में किया फ़ैसला, ऐसे तुम हो संज्ञानी नेपाल में तुरंत रसद पहुँचाई, मालदीव में पानी बुरे वक्त में साथ दिया और मदद करी मनमानी सेना को भी भेजा तुमने, ऐसे हो वीर बलदानी पर मेरे देश की प्यारी जनता, हाय तुम्हारी यही कहानी तरसे बूँद-बूँद को विदर्भ वासी, नहीं मिला उन्हें था पानी भूख से व्याकुल जनता मर गई, नहीं पहुँचा कोई दानी ऐसे थे

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