Hindi India Poetry Social

इस चिंगारी को एक बार सुलग जाने दो . .

  By Atul Singh जो बंद रही, इतने दिनों तक, अंधकार की कोठरियों मे । उस तिल तिल जलती ज्योति को, इस बार उजियारी फैला जाने दो ॥ . जो रूह, उनकी हैवानीयत सह, आज तक कराहती रही । उस रूह को तन से जुदा कर के, हैवानो से भिड़ जाने दो ॥ . वो चिंगारी, जो नस नस में, गर्म लहू बन बहती रही, उस गर्म लहू को आज हिया से लावा बनके फूट

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Hindi Life Love Poetry

जलता जीवन, जलते तुम हम

 By Atul Singh  जलता ज़ीवन जलते तुम हम, ख़त्म हो गई राहें सब ।  आगे है घनघोर अँधेरा दुःख की बदली छाई है । साथ मिलाकर छोड़ गए सब, क्यूँ तू संग मेरे आई है ॥ क्यूँ करू तुझसे प्रणय निवेदन, क्या तू जीवन सार मिला । किया तिरस्कार तूने है अब तक, क्यूँ अब तेरा प्यार जगा ॥ तू ठहरी अलका का वैभव, पर अवनी का मैं भी पुजारी हूँ । प्रेम सिखा कर चली

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Hindi India Life Poetry Poverty Social Issues

सब खवाब हुए धूमिल…..

पैदा हुवा मै जिस दिन, माँ-बाप मुस्कुराये I थी तंग घर की हालत, लड्डू ना बाँट पाये I I बस आस उम्मीदों में, बचपन भी मेरा बीता I हर हसरत रही अधूरी, लगता रहा पलीता I I ना शिक्षा मिली ढंग की, ना काम ढंग का पाया I संघर्षों ने जर्जर, कर डाली मेरी काया I I शादी भी मैंने कर ली, पैदा किये दो बच्चे I हालात अपने फिर भी, हो पाए नहीं अच्छे I

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Crime Governance Hindi India Life Opinion Social Social Issues

गुड़िया देश शर्मिंदा है ……..

Satish Tehlan through this poem talks how he feels as a father of a young daughter hearing of the brutal crime against the 5-year-old in Delhi. We all are really ashamed by the societal behavior. गुड़िया देश शर्मिंदा है …….., तेरा गुनाहगार अभी जिन्दा है ! मत रो लाडो तेरा दोष नहीं,  रहा लोगों को अब होश नहीं ! तू क्यों निकली थी घर से कल,  यहाँ ताक में हैं वहशी हर-पल ! हर तरफ दरिन्दों घूम

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