Bollywood Hindi India Movie Review Movies Mumbai

John Abraham Redeems Himself in Shootout at Wadala

  Plot (3 stars) A bright student scores 78% in college. He holds certain ideals close to his heart. For instance, he never cheats in exams. He has good prospects and dreams of becoming a respectable serviceman. However, his life takes a tragic turn when he is framed for murder by a policeman. He and his step-brother get a life sentence. It is then that Manohar Arjun Surve, a simple boy from Mumbai, turns into

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Bollywood Entertainment Hindi Movies Romance

Celebrating Cinema & Wielding Magic: Bombay Talkies Way

  If it is going to take another hundred years, for candy floss directors like Karan Johar to make believable and cinema of impact, we should rather celebrate each decade. ‘Bombay Talkies’ conveys the universal language of humanity, it has his moments of edginess, but all in all it is very close to reality. So much like life! The four segments in the movie have been executed by different directors and each one has their

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Hindi India Poetry Social

इस चिंगारी को एक बार सुलग जाने दो . .

  By Atul Singh जो बंद रही, इतने दिनों तक, अंधकार की कोठरियों मे । उस तिल तिल जलती ज्योति को, इस बार उजियारी फैला जाने दो ॥ . जो रूह, उनकी हैवानीयत सह, आज तक कराहती रही । उस रूह को तन से जुदा कर के, हैवानो से भिड़ जाने दो ॥ . वो चिंगारी, जो नस नस में, गर्म लहू बन बहती रही, उस गर्म लहू को आज हिया से लावा बनके फूट

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Hindi Life Love Poetry

जलता जीवन, जलते तुम हम

 By Atul Singh  जलता ज़ीवन जलते तुम हम, ख़त्म हो गई राहें सब ।  आगे है घनघोर अँधेरा दुःख की बदली छाई है । साथ मिलाकर छोड़ गए सब, क्यूँ तू संग मेरे आई है ॥ क्यूँ करू तुझसे प्रणय निवेदन, क्या तू जीवन सार मिला । किया तिरस्कार तूने है अब तक, क्यूँ अब तेरा प्यार जगा ॥ तू ठहरी अलका का वैभव, पर अवनी का मैं भी पुजारी हूँ । प्रेम सिखा कर चली

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Hindi India Life Poetry Poverty Social Issues

सब खवाब हुए धूमिल…..

पैदा हुवा मै जिस दिन, माँ-बाप मुस्कुराये I थी तंग घर की हालत, लड्डू ना बाँट पाये I I बस आस उम्मीदों में, बचपन भी मेरा बीता I हर हसरत रही अधूरी, लगता रहा पलीता I I ना शिक्षा मिली ढंग की, ना काम ढंग का पाया I संघर्षों ने जर्जर, कर डाली मेरी काया I I शादी भी मैंने कर ली, पैदा किये दो बच्चे I हालात अपने फिर भी, हो पाए नहीं अच्छे I

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Crime Governance Hindi India Life Opinion Social Social Issues

गुड़िया देश शर्मिंदा है ……..

Satish Tehlan through this poem talks how he feels as a father of a young daughter hearing of the brutal crime against the 5-year-old in Delhi. We all are really ashamed by the societal behavior. गुड़िया देश शर्मिंदा है …….., तेरा गुनाहगार अभी जिन्दा है ! मत रो लाडो तेरा दोष नहीं,  रहा लोगों को अब होश नहीं ! तू क्यों निकली थी घर से कल,  यहाँ ताक में हैं वहशी हर-पल ! हर तरफ दरिन्दों घूम

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