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अब ‘हेड ट्रांसप्लांट’ दूर नहीं!

चिकित्सा की दुनिया मे दिन ब दिन इंसान नई ऊँचाइयों को छु रहा है। टी.बी., चिकन पौक्स, स्मौल पॉक्स जैसे खतरनाक बीमारियों का खात्मा भी इंसान ने अपनी लगन, कोशिश और दृढ संकल्प से पूर्ण किया। लेकिन फिर भी ऐसे कई रोग अब भी उपस्थित हैं जिस पर इंसान ने जीत हासिल नहीं की है। कैंसर, एड्स, लकवा जैसी बीमारियाँ अब भी मानवता के लिए ‘खतरा’ का प्रतीक है। ज़्यादातर मामलों मे शरीर की दुर्गम

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Captain Fantastic will leave you fantasising for more!

Whenever I used to read about Robinson Crusoe and his long and adventurous stay in an island for close to 28 years, it used to fill me with wonder. Imagine living away from civilization, technology and people for close to 3 decades! Well, on one side, it’s quite scary but on another side, if one has the guts and a strong attitude, then the experience is nothing less than phenomenal. While scavenging through some popular

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बिटकॉइन आखिर है क्या ?

आये दिन कई कंपनियां ‘बिटकॉइन’ के बारे मे बात कर रही हैं। आखिर यह नई मुद्रा प्रणाली है क्या? क्या यह सुरक्षित है? क्या इससे घोटाले मे कमी आएगी? ऐसे कुछ प्रश्न मेरे दिमाग मे आये थे। चूँकि आजकल स्मार्टफ़ोन का ज़माना है, ‘बिटकॉइन’ के लेन-देन के लिए कंपनियों ने कई एप्लीकेशन निकाले हैं। सीधी भाषा मे यदि बात की जाए तो ‘बिटकॉइन’ आभासी मुद्रा है। यानी आप कंप्यूटर के माध्यम से बिटकॉइन यानी ‘वर्चुअल

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भारत पूर्ण रूप से पोलियो-मुक्त नहीं हुआ है !

आज अंतर्राष्ट्रीय पोलियो दिवस है। ‘पोलियोमायलाईटिस’ एक ऐसा रोग है जिसने सिर्फ 100 साल पहले तक दुनिया मे आतंक फैला रखा था। लेकिन निरंतर शोधकार्य और आधुनिक चिकित्सा माध्यमों के आ जाने से यह काफी हद तक दुनिया भर से ख़त्म हो गया है। पोलियोवायरस इंसान के मासपेशियों को कमज़ोर बना देता है। वायरस केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (central nervous system) मे स्थित मोटर न्यूरॉन पर हमला करती है जिससे की शरीर अलग-अलग जगहों से अकड़

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मैं, आप और ए.आई.

‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ या ‘आर्टीफिशिअल इनटेल्लिजेंस’ (ए.आई.) आजकल चर्चा का विषय है। ‘सीरी’, ‘कौरटाना’, ‘बिक्स्बी’ नामक कई प्रभावशाली ए.आई.  हमारे मोबाइल, कंप्यूटर और टेबलेट के ज़रिये हमारे पसंद-नापसंद का विश्लेषण करते हैं और उसके अनुसार हमे सबसे उपयुक्त सुझाव देते हैं। हालांकि, ए.आई. के आ जाने से हमारा जीवन काफी सरल और तेज़ हो गया है, इसके दुष्प्रभाव से भी हमे वाकिफ होना चाहिए। ए.आई. के ऊपर ज़्यादातर ज्ञान मुझे फ़िल्मी दुनिया से मिला है। ‘टर्मिनेटर’,

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खाना वाकई मे खज़ाना है!

बचपन मे जब मैं खाना नष्ट करता था, तो मेरे परिवार वाले मुझे डांटते और कहते कि,“अन्न नष्ट करने का मतलब है किसी दुसरे को खाने से वांछित करना”। चूँकि मैं छोटा था, मुझे इसका मतलब समझ नहीं आया। जब मैं थोड़ा बड़ा हुआ और दुनिया दारी की मुझे समझ होने लगी, तब मुझे इस कथन का तात्पर्य पूर्ण रूप से समझ मे आया। अब मेरी कोशिश हमेशा से यही रहती है की यदि मैंने

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Disasters don’t come knocking!

Disasters don’t wait to happen. They happen when one least expects them. Today is International Day for Disaster Reduction. In the past couple of months, the world has seen a series of catastrophes. From earthquakes and hurricanes ravaging the North American and Mexican coasts to coastal rains lashing Eastern India, Bangladesh and Nepal, loss of human and animal life has been tremendous and unforgiving. Due to increasing global warming and melting of polar ice caps,

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‘लव-जिहाद’ पर एक सोच

आये दिन ‘लव जिहाद’ के ऊपर काफी चर्चा हो रही है। आखिरकार यह ‘लव जिहाद’ है क्या? हाल ही देश के उच्चतम न्यालय ने ‘लव जिहाद’ के एक केस की तहकीकात करने के लिए ‘राष्ट्रीय जांच एजेंसी’ (NIA) को नियुक्त किया है। क्या यह समस्या इतनी संगीन है की इसके पीछे NIA को नियुक्त किया जाना चाहिए? जहां कुरान मे जिहाद का मतलब ‘धरम युद्ध’ है, वहीँ कुछ सूफी सिलसिले के गुरु मानते हैं की

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Can India once again become the education hub of the world?

In ancient times, India boasted of having one of, if not the best university of the world Nalanda. In 1200 CE, along with Takshila and Vikramshila, India occupied the pinnacle of learning in the ancient world. Students from as far as Persia and Turkey in the Middle East and Japan and Korea in Central Asia were its students. It housed close to 10,000 students and about 2,000 teachers. Its staff included the likes of Aryabhatta,

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Eating Ecologically, Saving Sustainably

Lush green fields filled with crops swirling thanks to the gentle breeze. The happy farmer who’s confident that he’ll get good money for his crops. A population consuming organic food that isn’t chock full of dangerous poisons. Agriculture turning humane and eco-friendly. Sounds idyllic, isn’t it? But it’s not something un-achievable.   In fact, if one were to take India’s history into perspective, organic agriculture is something that was traditionally followed. But with a gargantuan

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