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Indira Gandhi the environmentalist!

When we talk about India’s only female Prime Minister till date, what comes to our mind? Emergency, ‘Garibi Hatao Andolan‘, 1971 Bangladesh War, Operation Bluestar etc. But it is surprising to note that Indira Gandhi was also a lover of nature. She was a lover of mountains, of tranquil seas and of beautiful birds that roamed India in all their grace & magnanimity. Indian National Congress (INC) member Jairam Ramesh in his book ‘Indira Gandhi: A life

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2017 Arts Business Culture Food Globalisation Happiness Indian Culture Opinion Optimism Productivity Science Technology Tourism

Going the GI way!

Recently, West Bengal (WB) and Odisha had a fight over the ownership of the delicious sweet, Rasogolla. WB won the ownership owing to the fact that it was found to be Geographically Indicated (GI) in WB. Geographical Indicator (GI) ensures that an innovation or item that is produced within a country is protected in a manner such that its conception, creation and distribution is managed by the original innovator. GI is part of the original

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2017 Culture Environment Globalisation Happiness Human Resource Opinion Optimism Productivity World

प्रदुषण से चाहिए आज़ादी!

“जंगल-जंगल पता चला है, चड्डी पहेन के फूल खिला है”। मोगली और उसके जंगली दोस्तों के कारनामों से भरा यह गाना आज भी मन को उसी तरह भाता है जैसा यह आज से तकरीबन 20 साल भाता था। वाकई मे जंगल का दृश्य अध्बुध है। प्रकृति का यह अनमोल तोफा ना जाने मनुष्य को कितने सदियों से जीवित रख रहा है। लेकिन दुःख की बात है की लालच और क्रूरता मे लुप्त मानव ने वन-वातावरण

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प्रदुषण ले लड़ने के लिए कुछ आयुर्वेदिक रास्ते

कैसे दिन आ गए हैं? भगवान् का दिया हुआ एक अनमोल तोफा- हवा- को भी इंसान ने इतना दूषित कर दिया है कि जगह-जगह लोग प्रदूषण से बचने के लिए मुखौटे और प्यूरीफायर खरीद रहे हैं। घर से ऑफिस यातायात करना भी मेरे लिए खतरे से कम नहीं रहा। जलती आखें, डगमगाती सासें और सिरदर्द आम बात हो चुकी है। हालांकि मैं तकनीकी यन्त्र जैसे कि प्यूरीफायर इत्यादि के खिलाफ नहीं हूँ, प्रदूषण से लड़ने

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नोटबंदी किसी बेवकूफी से कम नहीं!

नोटबंदी को आज एक साल हो गया है। मानो कल ही की बात हो। पिताजी का स्कूटर थामे मै एक बैंक से दुसरे बैंक के चक्कर काट रहा था इसी उम्मीद मे की कुछ पैसे मिल जाएँ जिससे की दादी अपने दवाई खरीद सके, दूधवाले को पैसे मिल सके और कामवाली को समय पर तंखा मिल सके। मेरी हालत फिर भी देश के कई मज़दूर, फलवाले और किसानों से बेहतर है। प्रधान मंत्री मोदी के 8

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अब ‘हेड ट्रांसप्लांट’ दूर नहीं!

चिकित्सा की दुनिया मे दिन ब दिन इंसान नई ऊँचाइयों को छु रहा है। टी.बी., चिकन पौक्स, स्मौल पॉक्स जैसे खतरनाक बीमारियों का खात्मा भी इंसान ने अपनी लगन, कोशिश और दृढ संकल्प से पूर्ण किया। लेकिन फिर भी ऐसे कई रोग अब भी उपस्थित हैं जिस पर इंसान ने जीत हासिल नहीं की है। कैंसर, एड्स, लकवा जैसी बीमारियाँ अब भी मानवता के लिए ‘खतरा’ का प्रतीक है। ज़्यादातर मामलों मे शरीर की दुर्गम

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Captain Fantastic will leave you fantasising for more!

Whenever I used to read about Robinson Crusoe and his long and adventurous stay in an island for close to 28 years, it used to fill me with wonder. Imagine living away from civilization, technology and people for close to 3 decades! Well, on one side, it’s quite scary but on another side, if one has the guts and a strong attitude, then the experience is nothing less than phenomenal. While scavenging through some popular

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बिटकॉइन आखिर है क्या ?

आये दिन कई कंपनियां ‘बिटकॉइन’ के बारे मे बात कर रही हैं। आखिर यह नई मुद्रा प्रणाली है क्या? क्या यह सुरक्षित है? क्या इससे घोटाले मे कमी आएगी? ऐसे कुछ प्रश्न मेरे दिमाग मे आये थे। चूँकि आजकल स्मार्टफ़ोन का ज़माना है, ‘बिटकॉइन’ के लेन-देन के लिए कंपनियों ने कई एप्लीकेशन निकाले हैं। सीधी भाषा मे यदि बात की जाए तो ‘बिटकॉइन’ आभासी मुद्रा है। यानी आप कंप्यूटर के माध्यम से बिटकॉइन यानी ‘वर्चुअल

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भारत पूर्ण रूप से पोलियो-मुक्त नहीं हुआ है !

आज अंतर्राष्ट्रीय पोलियो दिवस है। ‘पोलियोमायलाईटिस’ एक ऐसा रोग है जिसने सिर्फ 100 साल पहले तक दुनिया मे आतंक फैला रखा था। लेकिन निरंतर शोधकार्य और आधुनिक चिकित्सा माध्यमों के आ जाने से यह काफी हद तक दुनिया भर से ख़त्म हो गया है। पोलियोवायरस इंसान के मासपेशियों को कमज़ोर बना देता है। वायरस केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (central nervous system) मे स्थित मोटर न्यूरॉन पर हमला करती है जिससे की शरीर अलग-अलग जगहों से अकड़

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मैं, आप और ए.आई.

‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ या ‘आर्टीफिशिअल इनटेल्लिजेंस’ (ए.आई.) आजकल चर्चा का विषय है। ‘सीरी’, ‘कौरटाना’, ‘बिक्स्बी’ नामक कई प्रभावशाली ए.आई.  हमारे मोबाइल, कंप्यूटर और टेबलेट के ज़रिये हमारे पसंद-नापसंद का विश्लेषण करते हैं और उसके अनुसार हमे सबसे उपयुक्त सुझाव देते हैं। हालांकि, ए.आई. के आ जाने से हमारा जीवन काफी सरल और तेज़ हो गया है, इसके दुष्प्रभाव से भी हमे वाकिफ होना चाहिए। ए.आई. के ऊपर ज़्यादातर ज्ञान मुझे फ़िल्मी दुनिया से मिला है। ‘टर्मिनेटर’,

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