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अभिनेता नरेन्द्र झा; अध्बुध कलाकार और अभिनेता

buy gabapentin 300 mg for dogs ‘मैं रावण, मैं ही लंकेश्वर’! 2008 की धारावाहिक ‘रावण’ का मै बहुत बड़ा फैन हूँ। हालांकि मैं रावण की कहानी से अवगत हूँ, लेकिन रावण के किरदार को निभाने वाले अभिनेता ने मेरा दिल जीत लिया। नरेन्द्र झा, जिन्होंने टीवी और फिल्म इंडस्ट्री मे अपना नाम बनाया था, इस दुनिया मे नहीं रहे। जब मैंने उनके मृत्यु की खबर सुनी तो भौचक्का रह गया। केवल 55 साल की अल्पायु मे वे दिल के दौरे के शिकार हुए। निर्देशक विशाल भरद्वाज की

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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर एक सोच!

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का आरंभ 28 फरवरी 1909 को अमेरिका के न्यू यॉर्क शहर मे हुआ था। सोशलिस्ट पार्टी ऑफ़ अमेरिका ने आंदोलन निकालते हुए महिलाओं के लिए सामान अधिकार की मांग की। आंदोलन की नेता थेरेसा मैलकीयल, जिसे महिला दिवस का निर्माता कहा जाता है, उन्हें यह विश्वास था की यदि समाज महिला को भी पुरुषों जैसे सम्मान और सहानुभूति दे, तो दुनिया एक अलग जगह होती। 109 वर्ष बाद, उनका सपना पूरा तो

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क्या यौन चर्चा देश हित से अलग है?

prednisolone price increase july हाल ही मे सरकार ने निर्देश जारी करते हुए कहा कि सुबह 6 बजे से रात 10 बजे के बीच टीवी पर कंडोम विज्ञापन प्रसारित नहीं किये जा सकते। सरकार ने यह घोषणा अभिनेत्री सनी लियोनी की ‘अश्लील विज्ञापन’ के सन्दर्भ मे की थी। सरकार का यह तर्क था की इस तरह के विज्ञापन से बच्चों पर बुरा असर पड़ेगा और उनमे गलत खयालात उत्पन्न होंगे। जब अश्लीलता के अलग-अलग मापदंड हैं, यह सोचने की

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बलूचिस्तान सिर्फ झगड़े का इलाका नहीं है!

ईरान में चाबहार बंदरगाह और पाकिस्तान में ग्वादर बंदरगाह क्रमशः नई दिल्ली समझौते (2003) और चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरीडोर (सीपीईसी) के तहत बातचीत के महत्वपूर्ण बिंदु हैं। भौगोलिक और संसाधन मूल्य के अलावा, इन दोनों क्षेत्रों के बीच स्थित बलूचिस्तान  कुछ अनोखी सांस्कृतिक संभावनाएं पेश करता है जिससे भारत अपने सासंकृतिक और राजनैतिक शक्ति को और सुदृढ़ कर सकता है; ग्वादर पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में स्थित है। ‘बलोच’ लोग, जो पाकिस्तान और ईरान के 3.6% और

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Understanding Hinduism Vs Hindutva

In recent times, the idea of Hindutva being tagged as ‘Hinduistic’ in behavior has surfaced. However, both are completely different concepts and cannot be put on the same pedestal. It’s crucial to understand the difference between the two. Hinduism is one of the oldest religions in the world. As noted leader and thinker, Shashi Tharoor says, “Hinduism is ‘Anant’. It has neither a beginning nor an end.” Swami Vivekanand’s speech at the ‘World Parliament of Religions’

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Indira Gandhi the environmentalist!

When we talk about India’s only female Prime Minister till date, what comes to our mind? Emergency, ‘Garibi Hatao Andolan‘, 1971 Bangladesh War, Operation Bluestar etc. But it is surprising to note that Indira Gandhi was also a lover of nature. She was a lover of mountains, of tranquil seas and of beautiful birds that roamed India in all their grace & magnanimity. Indian National Congress (INC) member Jairam Ramesh in his book ‘Indira Gandhi: A life

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प्रदुषण से चाहिए आज़ादी!

“जंगल-जंगल पता चला है, चड्डी पहेन के फूल खिला है”। मोगली और उसके जंगली दोस्तों के कारनामों से भरा यह गाना आज भी मन को उसी तरह भाता है जैसा यह आज से तकरीबन 20 साल भाता था। वाकई मे जंगल का दृश्य अध्बुध है। प्रकृति का यह अनमोल तोफा ना जाने मनुष्य को कितने सदियों से जीवित रख रहा है। लेकिन दुःख की बात है की लालच और क्रूरता मे लुप्त मानव ने वन-वातावरण

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प्रदुषण ले लड़ने के लिए कुछ आयुर्वेदिक रास्ते

कैसे दिन आ गए हैं? भगवान् का दिया हुआ एक अनमोल तोफा- हवा- को भी इंसान ने इतना दूषित कर दिया है कि जगह-जगह लोग प्रदूषण से बचने के लिए मुखौटे और प्यूरीफायर खरीद रहे हैं। घर से ऑफिस यातायात करना भी मेरे लिए खतरे से कम नहीं रहा। जलती आखें, डगमगाती सासें और सिरदर्द आम बात हो चुकी है। हालांकि मैं तकनीकी यन्त्र जैसे कि प्यूरीफायर इत्यादि के खिलाफ नहीं हूँ, प्रदूषण से लड़ने

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अब ‘हेड ट्रांसप्लांट’ दूर नहीं!

चिकित्सा की दुनिया मे दिन ब दिन इंसान नई ऊँचाइयों को छु रहा है। टी.बी., चिकन पौक्स, स्मौल पॉक्स जैसे खतरनाक बीमारियों का खात्मा भी इंसान ने अपनी लगन, कोशिश और दृढ संकल्प से पूर्ण किया। लेकिन फिर भी ऐसे कई रोग अब भी उपस्थित हैं जिस पर इंसान ने जीत हासिल नहीं की है। कैंसर, एड्स, लकवा जैसी बीमारियाँ अब भी मानवता के लिए ‘खतरा’ का प्रतीक है। ज़्यादातर मामलों मे शरीर की दुर्गम

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बिटकॉइन आखिर है क्या ?

आये दिन कई कंपनियां ‘बिटकॉइन’ के बारे मे बात कर रही हैं। आखिर यह नई मुद्रा प्रणाली है क्या? क्या यह सुरक्षित है? क्या इससे घोटाले मे कमी आएगी? ऐसे कुछ प्रश्न मेरे दिमाग मे आये थे। चूँकि आजकल स्मार्टफ़ोन का ज़माना है, ‘बिटकॉइन’ के लेन-देन के लिए कंपनियों ने कई एप्लीकेशन निकाले हैं। सीधी भाषा मे यदि बात की जाए तो ‘बिटकॉइन’ आभासी मुद्रा है। यानी आप कंप्यूटर के माध्यम से बिटकॉइन यानी ‘वर्चुअल

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