Sharat is an educationist, a Principle by profession has a keen interest in History, the subject he is teaching to his students for more than a decade. Sharat occasionally writes poetry & theatre. Sharat is also an associate editor of a weekly newspaper in Gujarat.

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तेरे आने के बाद

जवाजे हिज्र को जाना तेरे आने के बाद I इतना रंगी हुआ है अब्र ज़माने के बाद I वस्ल से पहले बेकरारियां बेमानी न थीं, दिल ने जाना है इसे जाँ तेरे आने के बाद I बिजलियाँ दौड़ उठीं हैं मेरी रगो-पै में, बरसते आँख से बादल तेरे आने के बाद I देखके तुझको तेरे सारे सितम भूल गया, ग़मों का काम ही क्या है तेरे आने के बाद I

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कोई हवा आई

समन्दरों के उधर से कोई हवा आई I दिलों के बंद दरीचे खुले हवा आई I नए मुहाज़ पे निकले हैं फिर से सौदागर, नए सफ़र की कशिश फिर नयी सुबह लाई I कोई तो शख्स है जिसने चमन से खार चुने, कोई वजह है गुलिस्तां में ये अदा आई I वोही है मर्ज़ इलाजे मरीज़ भी वो ही, ये कैसे मोड़ पे मुझको मेरी वफ़ा लाई I

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संग दिल

संग दिल पर भी पड़ जायेंगे कुछ निशां I अश्क मेरे जो गिरते रहेंगे यहाँ I   वो पिघल जायेंगे और ज़ुरूर आयेंगे, हम जो जलते रहेंगे अगन में यहाँ I   वो गए जबसे ख्वाबों में हम खो गए, बंद आँखों से अब जायेंगे वो कहाँ I   वो मयस्सर नहीं उनका ग़म ही सही, इस बहाने से काटेंगे राहे जहाँ I   संग दिल पे ……

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किसी की आमद आमद है

खिले हैं फूल ये दिल के किसी की आमद आमद है I नज़र की शम्मा रौशन है किसी की आमद आमद है I   नज़ारे आज खुश रंगों में डूबे हैं ज़रा देखो, लबों पे मुस्कराहट है किसी की आमद आमद है I   बिछाए दिल को बैठे हैं तसव्वुर है कोई आया, जवां चाहत जवां दिल है किसी की आमद आमद है I   निगाहें बारहा उठ जाती हैं हर उस तरफ यूँ ही,

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जाने कैसा मेरा आइना हो गया

जाने कैसा मेरा आइना हो गया I मैं यहीं था अभी अब कहाँ खो गया I जिनसे देखा था मैंने ये रंगीं जहाँ, अब उन आखों का पानी कहाँ हो गया I वो शरीफों की इज्ज़त कहाँ खो गयी, ये शराफत के मानी को क्या हो गया I वो जो दुनिया हंसी थी कहाँ हो गयी, ये जो मैं नौजवां था कहाँ हो गया I देखता हूँ जिसे बोलता है मगर, गुफ्तगू का करीना कहाँ

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ढूंढता हूँ मैं

सोयी हुई यादों में तुम्हें ढूंढता हु मैं I दरिया के बीच जा के ज़मीं ढूंढता हूँ मैं I   मालूम नहीं हो गयी मुझसे कहाँ ख़ता, खुद अपने लिए आज सज़ा ढूंढता हूँ मैं I   ऐ चाँद आसमाँ के तू मुझको दे रौशनी, गुम हो गया है चाँद मेरा ढूंढता हूँ मैं I   यूँ खो गया राह में मुझसे मेरा नसीब, मिलते नहीं क़दमों के निशां ढूंढता हूँ मैं I

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वो आयें

वो आयें मेरे दर पे शरमाते हुए आयें I इन सर्द हवाओं को गरमाते हुए आयें I   गुलशन की महक मुझको महसूस नहीं होती I एक गुल सा मेरा अरमा महकाते आयें, वो आयें मेरे दर पे शरमाते हुए आयें   सदियों की ज़िन्दगी में इक पल भी नहीं अपना I कुछ पल ही सही लेकिन मेरे ही लिए आयें, वो आयें मेरे दर पे शरमाते हुए आयें   इस बद नसीब दिल को

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हाले दिल मेरा

कोई मेरे दिल से पूछे ज़रा हाले दिल मेरा I आखों से ले बयाने जिगर थामे दिल मेरा I सपनों की डोरियों से बुना आशियाँ मेरा I फूलों की खुशबुओं से सजा गुलसितां मेरा I तारों की रौशनी से धुला पासबां मेरा I मेरे करीब ही है हंसी आसमाँ मेरा I मिला राहबर कोई तो बना हमनवां मेरा I जो समझे मोहब्बत को वोही हमज़बां मेरा I

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कहाँ जाइएगा आप

खुद से बिछड़ के दूर कहाँ जाइएगा आप, जलती है सुबहो शाम कहाँ जाइएगा आप I   शहरों से मोहोब्बत के निशां मिट रहें हैं रोज़, मंजिल ख़बर नहीं है कहाँ जाइएगा आप I   कांटे बिछे राह में सूरज चढ़ा हुआ, बिन साया नंगे पाँव कहाँ जाइएगा आप I   दुनिया ये नफरतों के शिकंजे में फंसी है, अपनी गली से दूर कहाँ जाइएगा आप I   इक आग सी लगी है मेरे दिल

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केहर के शोले

कैसे बढ़ते हैं हवाओं में केहर के शोले I किसने पाले हैं छिपाए हैं केहर के शोले I   गर्म बाहें वो पनाहें वो दोस्ती का चलन, बुझ गए सारे अलम रह गए फकत शोले I   हमने माना की शुभा है तुम्हे उनपे लेकिन, नफरतें कब से, जमा कब से दिलों में शोले I   उनसे कह दो जो भुला बैठे हैं इमां अपना, उनके दीवान जला देंगे उन्ही के शोले I

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