Rakesh Kayasth is considered a well know satirist in the Hindi literary circle. For the last 18 years he has been regularly writing satire pieces and short stories for many prestigious publications. At present he runs a column called Batras’ for socio political magazine Yathavt and a very popular blog`Mirchi lagi kaya’ on Navbharat Times website.</p>
<p>By profession Rakesh is a journalist turned concept designer and TV show producer. He served TV news Industry for 15 years in various senior positions including creative head at News 24 and head of special programming of India’s no-1 news channel Aaj Tak. He has the sole credit of shaping Aaj Tak as tongue in cheek scripting flavored channel. During his 2 term decade long association with Aaj Tak, Rakesh designed, wrote and directed a very good number of political satire shows and won prestigious NT award for 3 consecutive years. Creative writing is his 1st love and shows like Shekhar Suman’s Movers and Shekhar’s and Burna na mano election hai are also in his credit. More over he has now got contracts for 2 film stories from a big production house. At present Rakesh is associated with Star sports as Executive producer and heading it’s non Live cricket programming team.

Corruption Democracy

आ गले लग जा

मफलर, अरविंद केजरीवाल के गले में जाने कब से पड़ा था। अब एक और चीज उनके गले पड़ गई है- नाम है, लालू प्रसाद यादव। मफलर को केजरीवाल ने खुद गले लगाया था, लेकिन लालूजी का केस कुछ अलग है। केजरीवाल चीख-चीखकर कह रहे हैं.. मैंने लालूजी को गले नहीं लगाया, बल्कि उन्होंने जबरन गलबहियां डाल दीं। लेकिन पब्लिक मानने को तैयार नहीं है। गलबहियों का यह उत्सव पटना में नीतीश कुमार के शपथ ग्रहण

Read more
Democracy

जन-गण-मन… दे दनादन

असली बात शुरू करने से पहले मैं आपको अपने बचपन की एक छोटी सी कहानी सुनाता हूं। हमारे स्कूल में हिंदी के एक मास्टर साहब हुआ करते थे। आदमी बुरे नहीं थे। लेकिन कायदे-कानून और अनुशासन को लेकर लगभग जुनूनी थे। क्लास में कभी-कभी अचानक बच्चो के मोजे तक चेक कर लिया करते थे। नेवी ब्लू की जगह अगर किसी ने काली जुराबे पहनी हो तो उसे क्लास से निकाल देते थे। मास्टर साहब की

Read more
Featured Festivals of India Hindi Indian Culture Life Top

मेरे अंदर का रावण

फेसबुक मैसेज बॉक्स और मेल बॉक्स में विजयदशमी के बहुत से संदेश पड़े हुए हैं, जिनमे शुभकामनाओं के साथ एक हिदायत भी दी गई है—अपने अंदर के रावण को मारें। मैसेज पढ़कर शोले फिल्म का डायलॉग याद आ जाता है—ठाकुर साहब आप क्या गब्बर सिंह को बकरी का बच्चा समझते हैं, जिसे कोई भी पकड़ ले। रावण ना हुआ भारतीय क्रिकेट टीम का पेस बॉलर हो गया, जिसे कोई भी ऐरा-गैरा आकर मार जाये। ये

Read more
Hindi

धुंध, धुआं और हिंदी का हुंआ-हुंआ

चारो तरफ धूल, धुंध और धुआं है। आंखें फाड़कर देखो, तब भी कुछ समझ में नहीं आता कि हो क्या रहा है। हिंदी के जंगल में आजकल सिर्फ हुआं-हुआं है। कितना भी सुनने की कोशिश करो कुछ भी सुनाई नहीं दे रहा है। भाषा, संस्कृति और कला के पहेदारों में आधे गांधी जी के बंदर बन गये हैं। करीब एक चौथाई पाला बदलकर सरकार की गोद में बैठ गये हैं या बैठने की कोशिश कर

Read more
Featured Hindi India Opinion Religion Top

हाय! कंबख्त को किस वक्त ख़ुदा याद आया

मेरे जीवन में सौ प्रतिशत सर्वधर्म समभाव है। मैं सभी धर्मों से समान रूप से पीड़ित हूं, इसलिए सबके प्रति एक जैसा भाव रखना मजबूरी है। अगर आप कभी कांवड़ियों के हाथों पिटे हों या पिटते-पिटते बचे हों, शब-ए-बारात की जुलूस से किसी तरह जान बचाकर निकले हों, गुरुपर्व पर रास्ता रोककर श्रद्धालुओं ने आपको कभी ज़बरदस्ती शर्बत पिलाया हो और ना पीने पर मां-बहन की गालियां दी हों, तो फिर यकीनन आप भी `सर्वधर्म

Read more
vyapam-scam
Corruption Crime Featured India Opinion Politics Top

व्यापम बेताल कथा

विक्रम-बेताल से कहीं ज्यादा लोमहर्षक है, व्यापम बेताल कथा। वह कहानी राजा विक्रमादित्य के ज़माने की थी, यह कहानी राजा शिवराज सिंह के जमाने की है। उस कहानी में बेताल को राजा जबरन अपने वश में करता और अपने कंधे पर लादकर आगे बढ़ता था। इस कहानी में राजा पिंड छुड़ाने को जी-तोड़ कोशिश कर रहा है। लेकिन बेताल है कि पीछा छोड़ने को तैयार ही नहीं है। मंत्र अनुष्ठान, पूजा हवन सब बेकार साबित

Read more
irani-tomar
Democracy Featured Governance Government Opinion Politics Top

माननीय मैट्रिक फेल

चाहे डिग्री देने वाली यूनिवर्सिटी हो येल या फिर माननीय हो मधेपुरा उच्च माध्यमिक विद्यालय से मैट्रिक फेल, फर्क कुछ भी नहीं पड़ता है। माननीय तो हमेशा माननीय ही रहेंगे। पढ़ाई-लिखाई, डिग्री-सार्टिफिकेट वगैरह से उपर। इस देश में ना जाने कितने अंगूठा टेक एमएलए और एमपी हुए। अपना दस्तख़त तक ना कर पाने वाले कई लोग मंत्री तक बने और पूरे ठाठ से राज चलाया। काला अक्षर भैस बराबर और लोकतंत्र में भी सब धन

Read more
gajendra-singh-ftii
Featured Films Hindi Opinion Politics Top

गजेंद्र चौहान कौन हैं?

25 साल से कम उम्र वाली पीढ़ी उन्हे नहीं जानती। जानती उन्हे पुरानी पीढ़ी भी नहीं है। सिर्फ दो दावे उनके बारे में। समर्थकों का कहना है कि महाभारत सीरियल में युधिष्ठर की जो कालजयी भूमिका निभाई थी, उसे कोई नहीं भूल सकता। गजेंद्र युधिष्ठर बने थे, अच्छी बात है। लेकिन केंद्र सरकार को गांधरी बनने की क्या ज़रूरत थी? बीजेपी के सदस्य होने के इनाम के तौर पर युधिष्ठर को लॉ कमीशन का चेयरमैन

Read more
sunny-leone-sexy
Celebrity comedy Entertainment Featured Opinion Top

भइया ये सन्नी लियोन कौन हैं?

सामान्य ज्ञान के कुछ प्रश्न ऐसे होते हैं, जिनका उत्तर जानने वाले ज्यादातर लोग जानकर भी अनजान बने रहते हैं। ऐसा ही एक प्रश्न है– सन्नी लियोन कौन हैं? जवाब आधे से ज्यादा भारतवर्ष को पता है। फिर भी अगर यह सवाल सार्वजनिक तौर पर पूछा गया तो हर कोई बगले झांकता नज़र आएगा। अगर यह सवाल कौन बनेगा करोड़पति जैसे कार्यक्रम तक में पूछा गया तब भी प्रतिभागी जवाब देने से पहले दाये-बायें देखेगा

Read more
gadkari-peeing-on-plant
comedy Democracy Environment Featured Governance Government Humour Opinion Politics Top

मंत्रालय और मूत्रालय और जहाँ सोच वहीँ शौच

समान ध्वनि वाले दो शब्द आमतौर पर समानार्थी नहीं होते। लेकिन अगर आप थोड़ी कोशिश करें तो आप उन्हे एक जैसे अर्थ वाला बना सकते हैं। मोदी सरकार के वरिष्ठ मंत्री नितिन गडकरी ने यही किया। नतीजा ये हुआ है कि देश की जनता मंत्रालय और मूत्रालय को लगभग एक मानने लगी है। दोनो कुछ मामले में एक जैसे हैं, भी। मंत्रालय हो या मूत्रालय तलबगार को जल्दी से जल्दी अंदर दाखिल होने की बेचैनी

Read more