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Beneath the Sky

Born beneath the sky Where the birds fly Ground populated People frustrated Less gaiety More jealousy. Love seems to be hidden War and hatred killed many men Trying to control nature We are not that mature. We come here to gain In process we bear some pain, Try to accept the reality, Enjoy God’s creativity. Finally, when our goal is achieved We get buried On earth – beneath the sky Where the birds fly.

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आए मनुष्य अपने बनाये किलो का गुरुर ना कर

आए मनुष्य अपने बनाये किलो का गुरुर ना कर, सब घुल मिल जायंगे भूकम्प से धराशाई होकर , जब धरती माँ के सारे गोष निकलेगी , जब तुम्हे अपने जान की चिंता सताएगी , पडोसी परिवार को जब रोते देखोगे , अपनी सुरक्षा के बारे में सोचोगे , कुदरत से कभी जीता नहीं जाता , खुद को कभी ना समझो दाता , प्रकृति का आदर करो और उसे समझो , चाहे कुछ भी हो तुम हमेशा ख़ुशी से जियो।

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I-Am-A-Poet
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कवित्री हूँ मैं

लोग कहते है मुझेलिखती हूँ मैं अनूठाकवित्री बनना चाहिए मुझेये है तुम्हारी विशेषतामन ही मन में अपने से कहती हूँमैंने लिखा जो मुझे लगाजीवन की हर लहर मुड़ती है क्योंयही सवाल ने मुझे सोच में डालादेना चाहती हूँ में उन सबका जवाबजिससे लोग ढूंढ़ते रह जाते हैपर लग जाता है उस प्रश्न में नकाबऔर फिर वो रहस्य ही रह जाता है \यही सवाल का उत्तर मैं देती हूँबस फर्क यही हैइससे मैं कविता मैं बयां करती हूँ। 

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When Darkness Prevails

When darkness prevails, Even our own shadow betrays. World avails the opportunity, Criticizing you and questioning your capability. Unexpected people change their minds, On asking help, they behave like blinds. They don’t look into the real matter, Only spread rumors and chatter. Breaking and discouraging us, By this you get into more fuss. What you need to do, Is stay clam and be true. Let the world think and say about you, In the back of mind you know who are YOU…

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तुम आगे बढ़ना।

ले के ख्वाबों का साथ ,छोड़ कर झूट का साथ ,तुम आगे बढ़ो।निकल चलो तुम ज़िन्दगी के सुनहरे पथ पर ,अपने सारे कमियों को छोड़ कर,बुराई और कठिनाई दोनों ही आयंगे ,साथ मिलकर तुम्हे सतयंगे,हार कर तुम बैठ न जाना ,अपने ख्वाबो को तुम भूल न जाना ,चलोगे जब तुम अपना हौसला ले कर ,ख़ुशी और दुःख दोनों के साथ सामान चल कर ,पाओगे मंजिल तुम बड़ो का आशीर्वाद ले कर ,पर अपने रास्ते को तुम यूँ अधूरा छोड़ न देना ,अपने रास्ते को तुम आगे खुद बनाना,एक बार फिर से अपने नए ख्वाब का साथ ले कर ,झूट का

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कुछ यूँ ही मैं अपने भविष्य की कामना करती हूँ।

काले घने बादलों से ढका हुआ, असुविधा, अव्यवस्थित से भरा हुआ, हमें आगे का भविष्य धुंधला नज़र आता है, हर पल हमारा कल हमें सताता है। अब पीछे मुड़कर जब हम देखते है, अतीत के पन्नो को पलटते है, हमारे परिवार का रिश्ता हमें दूर दिखाई देता है, हर पल हमारा कल हमें सताता है। इस मुश्किल से मैं जीत प्राप्त करना चाहती हूँ, खून नही परन्तु पसीना बहा कर, अपने भविष्य की कामना करती हूँ, कुछ यूँ ही मैं अपने भविष्य के लिए खुद को तयार करना चाहती हूँ। एक छोटी सी रौशनी की किरण को भी इस्तेमाल करना चाहती

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आज का सामाज

आज का सामाज है , जहां भ्रष्टाचार में लिपटे लोंगों की ठाट है। जहा उदेशय केवल काम बिगाड़ना रह गया है , खुद न डूबे परन्तु दूसरों को डूबना ही सबका लक्षय बन गया है ।   समांप्त हो रही है रिश्ते नाते की अहमियत, अब तो रह गयी है बस पैसों की कीमत। त्यौहार में तो बस अब दिखावा रह गया है , एक दूसरे को निचा दिखाना ही सबका लक्ष्य बन गया है।   ये आज का सामाज है , जहाँ अपनी बात सिद्ध करना , तो रैली – मारपीठ और बाहुबल की ताकत पर उतरना। वह शान्त

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प्रकृति हूँ मैं।

सारे विश्व को सुन्दर बनती, हमेशा प्राणियों को अपना तत्त्व देती, प्रकृति हूँ मैं। तेरे सारे दोष और चिंता को, ख़तम कर तेरी झोली खुशियों से भारती, प्रकृति हूँ मैं। परन्तु तुम लोगो के दुराचार से, तेरे कठोर कर्म से, झूझती हुई प्रकृति हूँ मैं। मेरे तत्वों का आदर करो, इनके साथ सक्क्ति से न पेश आओ, क्युकी जन जीवन को सवारती, प्रकृति हूँ मैं।  

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A Note To My Wife

Today all I need is you, In times of prosperity and adversity too. Life here seems to be an ocean Without you there is no warmth of the sun. I went around the world many times To search for you and our good times, But now I am old This search still is unfold Where to go, what to hear Where to shed my tears No enemies, no friends, My life now ends But still, Today all I need is you In times of prosperity and adversity too. – From a husband missing his dead wife.

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An Ode To The Setting Sun

समुन्दर के किनारे टहल्ते हुए , उगते हुए सूरज को डूबते हुए , देखना बड़ी बात नहीं। पर उस डूबते हुए सूरज के अन्दर झांकना और सुनना की ‘ मैं आज तो डूब रहा हूँ पर कल फिर निकलूंगा और फिर प्रकाश स्थापित करूँगा ‘ सुनना बड़ी बात है।

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