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सिर्फ तुम…

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तुम जीने की वजह तो नहीं

लेकिन उससे कम भी नहीं

 

मेरे नैनों में सावन ही सही

तुम्हारे नैनों में नमी तो नहीं?

 

बिताए पलों को मैंने सहेजा है सही

तुम्हें लम्हों के छूटने का भय तो नहीं?

 

साथ चले दो चार कदम ही सही

रास्ते में छोड़ने का तुम्हें दुख तो नहीं?

 

वफा की मुझमें थोड़ी उम्मीद ही सही

तुम्हें बेवफा होने का गम तो नहीं ?

 

चली गई तुम बेवजह ही सही

एक बार फिर किसी मोड़ पर मिलोगी कि नहीं ?

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