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श्रीदेवी वाकई मे फिल्मों की देवी थीं!

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आज मेरी दिन की शुरुआत एक दुखद समाचार से हुई। मशहूर अभिनेत्री श्रीदेवी का आज स्वर्गवास हुया। कुछ पल के लिए मानो समय थम गया हो। आजकल ‘फेक न्यूज़’ के चलते मैंने शुरू मे इस खबर को भी नज़रअंदाज़ करने की सोची लेकिन जब कई प्रमुख अखबार और न्यूज़ चैनलों ने ‘ब्रेकिंग न्यूज़’ पर इस विषय का सीधा प्रसारण किया तो मैं भौचक्का रह गया। कहना तो नहीं चाहिए लेकिन इस खबर को सुन मैंने मन ही मन सोचा कि भगवान ने कुछ बेवकूफ और पाखण्डी कलाकारों को ना बुलाकर श्रीदेवी को अपने पास क्यों बुला लिया? खैर, ऊपर वाले के आगे किसकी चलती है?

उनका पूरा नाम श्री अम्मा यंगर अय्यापन था चार दशक से भी ज़्यादा फ़िल्म जगत पर राज करने वाली इस अभिनेत्री का जन्म 13 अगस्त, 1963 को हुया था। उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 1969 की तमिल धार्मिक फिल्म ‘थुनईवन’ से की थी। भगवान मुरुगन के किरदार के लिए उन्हें कई पुरस्कारों से नवाज़ा भी गया। 1970 और 1980 के कई तमिल, मलयालम और तेलगु फिल्मों में श्रीदेवी ने एक के बाद एक उन्दा प्रदर्शन दिए। उनकी पहली हिंदी फ़िल्म 1979 की ‘सोलवा सावन’ थी लेकिन 1983 की फ़िल्म ‘हिम्मतवाले’ ने श्रीदेवी को एक नई पहचान दी। अनिल कपूर, गोविंदा, जीतेन्द्र, शाहरुख खान और अमिताभ बच्चन जैसे दिग्गजों के साथ श्रीदेवी ने कई सुपरहिट फिल्में दीं।

1991 की फ़िल्म ‘लम्हे’, 1994 की फ़िल्म ‘लाडला’, 1987 की फ़िल्म ‘मिस्टर इंडिया’, 1997 की फ़िल्म ‘जुदाई’ जैसी फिल्मों से श्रीदेवी ने लोगों का दिल और पैसा दोनों जीत लिया। 80 और 90 की दशक मे श्रीदेवी भारत की सबसे लोकप्रिय कलाकारों मे से एक थीं। अपनी फ़िल्म ‘जुदाई’ के बाद उन्होंने फिल्म जगत से तकरीबन 15 साल का अवकाश लिया। 2012 मे गौरी शिंदे निर्देशित फिल्म ‘इंग्लिश विंग्लिश’ से श्रीदेवी ने फिर से फिल्मों की दुनिया मे कदम रखा। उनकी फिल्म बहुत मशहूर हुई। आमतौर पर मेरी चाची, जो फिल्मों की शौकीन नहीं हैं, उन्होंने भी इस फ़िल्म को देख इसकी वाह-वाही की।

2017 की फ़िल्म ‘मौम’ श्रीदेवी की 300वीं और आखिरी फ़िल्म थी। सहनशील और निडर मा ‘देवकी’ के चरित्र को बखूभी निभाने के लिए श्रीदेवी की काफी प्रशंसा हुई। सिर्फ फिल्में ही नहीं, उनके फिल्मों के गाने भी काफी मशहूर थे। ‘हवा हवाई’, ‘प्यार प्यार करते करते’, ‘नवराई माझी’ जैसे गाने शादियों, पार्टियों और त्योहारों पर मशहूर थे। श्रीदेवी के लिए जितना कहा जाए उतना काम है। जाते-जाते ‘चांदनी’ ने बड़ा ‘सदमा’ दिया लेकिन वो फ़िल्मी ‘लम्हे’ हम कभी नहीं भूलेंगे।

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