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Delhi/NCR Hindi Travel

ये हमारे लिए आस्था नहीं, तर्क-वितर्क-बहस-विवाद की चौखट है


इस दरवाजे से हम सिर्फ गुजरते भर नहीं है, अपने भीतर मीडिया, संस्कृति और सामयिक संदर्भों को लेकर जो थोडी-बहुत समझ बनी है, इसी दरवाजे से होकर भीतर आयी है. सैंकड़ों बार इस दरवाजे से गुजरना हुआ है लेकिन किसी मस्जिद या मजार की चौखट की तरह नहीं, एक ऐसी जगह की तरह जहां से हम हर बार थोड़ा और तार्किक, ज्ञान के प्रति और ललक, नए विषयों के प्रति और जिज्ञासु होकर लौटते हैं.

इसकी निपटता देखकर कभी आपको हैरानी होगी, कभी फैंटेसी की दुनिया लगेगी..कभी लगेगा कि बड़े-छोटे का कोई लिहाज नहीं है..लेकिन हमने एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना, अकादमिक दुनिया के कायदे-कानून भी यहीं सीखे और किस्तों में ही सही, बेहतर होने की कोशिश भी यहीं से लौटकर की.

सीएसडीएस का ये दरवाजा-ये चौखट, हमारे भीतर की तमाम तरह की उदासी, बैचेनी को सोखकर चीजों को जानने के प्रति बेचैन करता है, किताबें, फिल्में, लेख, रिसर्च पेपर न मिलने पर उदासी से मुक्त करता है. यहां जो भी आते हैं, उस यकीन की तरफ वापस लौटते हैं कि पढ़ने-लिखने से दुनिया बेहतर होती है..यकीन को बचाए रखने की चौखट

संगीताजी, आपका और आपके कैमरे का बहुत-बहुत शुक्रिया..मोज्जिला टीम के साथ इस तस्वीर में शामिल करने के लिए..‪#‎दरबदरदिल्ली‬

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