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यादें…

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बदल गई वो फिजा
जिसमें था तुम्हारी सांसों का अहसास

बदल गया वो मौसम
जो तुम्हारे मन का था

वो बादल भी नहीं रहा
जो तुम्हारे आंगन में बरसता था

अब वो हवा भी नहीं बहती
जो छेड़ती थी तुम्हारे दिल के तार

हां, नहीं बदली वो आवाज
जिसके गवाह हैं मेरे कान

नहीं बदला वो दफ्तर
जहां हम किया करते थे काम

नहीं बदली वो चाय की दुकान
जहां हम घंटों बैठा करते थे

ये सड़क भी नहीं बदली
जिसपर चलते थे हम साथ-साथ

ये मन भी नहीं बदला
जो था कभी तुम्हारा…आज भी है.

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