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मोह

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नहीं जगत में कोई अपना काहे मनुवा सोच करे

दुनियां सारी रंगमंच है, तू शैलूष का पाठ करे ।

यहाँ अनेकन बनते साथी

भाई, बहिन और जीवन साथी

रंगमंच से उतरे नीचे, कोई न तेरे साथ चले

नहीं जगत में कोई अपना काहे मनुवा सोच करे

दुनियां सारी रंगमंच है, तू शैलूष का पाठ करे ।

भाई, बहिन, पिता और माता

सबसे है ये झूठा नाता

कोई तेरे साथ न जाता, जात वही जो कर्म करे

नहीं जगत में कोई अपना काहे मनुवा सोच करे

दुनियां सारी रंगमंच है, तू शैलूष का पाठ करे ।

कैसा है नारी का रिश्ता

जीवन भर तू रहता घिसता

फिर भी इसका मोह न जाये

बेटा-बेटी तेरे मन भाये

अन्त समय तक आकर मनुवा, क्यों तू जीवन व्यर्थ करे

नहीं जगत में कोई अपना काहे मनुवा सोच करे

दुनियां सारी रंगमंच है, तू शैलूष का पाठ करे ।

रह जाते ये महल दुमहले

रत्न जड़ाऊ और रुपहले

धन दौलत से प्यारा नाता

फिर भी छोड़ यहाँ तू जाता

फिर मानव तू अपने मन में, काहे ऐसा भरम करे

नहीं जगत में कोई अपना काहे मनुवा सोच करे

दुनियां सारी रंगमंच है, तू शैलूष का पाठ करे ।

सारा जहाँ है परिवार तुम्हारा

सबसे रख तू यहाँ भाईचारा

प्रेम से सबको गले लगा कर

समता का तू अलख जगा कर

सारे जहाँ में फिर तू मनुवा मानवता के काम करे

नहीं जगत में कोई अपना काहे मनुवा सोच करे

दुनियाँ सारी रंगमंच है तू शैलूष का पाठ करे |

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