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मानवता का स्वागत करो


प्रिय मानव !

अल्लाह और ईश्वर,

गॉड और जिंदगी

के रहस्यों को तुम

धर्म और अंधविश्वास

भाग्य और भगवान की

बंद चार दीवारी के बीच

नहीं समझ सकते

धर्म की तेज हवा

अंध-विश्वास की आँधियाँ

भाग्य और भगवान का डर

स्वर्ग और नर्क की कंपाने वाली

ठंडक की भयानक झाँकियां

तुम्हारे मस्तिष्क के

सभी रन्ध्रो को

कभी खुलने न देंगी

ये चर्च की चमक

मंदिरों की घनघनाहट

मस्जिदों का सूनापन

तुमने तब देख अपने भोलेपन से

अपने आँख और कान

स्वयं ही बंद कर लिए,

तुम न जीवन को समझ सके

न उसके रहस्यों को जान सके

और न मन की पुकार सुन सके

और न ही खुशियों का संसार चुन सके

तुम्हारे अरमानों की जिन्दगी

यों ही कठिनाइयों के बीच जाती है

दुख और दर्द रूपी चक्की के

दो पाटों के बीच पीसी जाती है

तुम हंसने की कोशिश करते हो

मगर तुम्हारी साँसें ही चलती हैं

तुम मुस्कराते हो ऐसे

कि  तुम्हारे बस दाँत ही दिखते हैं

हे प्रिय मानव !

खोल दो बंद खिड़कियों को

तोड़ दो सभी बंद दरवाज़ों को

ताकि इस भयानक तूफ़ानों के बीच

तुम अपनी प्यार भरी जिन्दगी

अपने तरीके से जी सको

रहने दो दरवाजे के बाहर तुम

अल्लाह और ईश्वर को

गॉड और अंधविश्वास को

इन्हें कभी अपने मस्तिष्क

और मन में न घुसने दो

पवित्र रखो अपने मन को

कभी मैला न इसे तुम होने दो

खोल दो खिड़की, दरवाजे अपने

और आने दो प्यार की हवा

मिटा दो मन से अंधविश्वास को

और कर दो उसकी दवा

स्वागत करो, स्वागत करो

पवित्र भाईचारे का

और अनुपम प्यार का

स्वागत करो तुम मानवता का

और कल्याण करो संसार का

सभी के ‘किन्थ’ बनो तुम

और स्वागत करो मानवता का

बस मानवता का

स्वागत करो

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