kahan-gum-ho-gaya-bachpan
Lifestyle Workforce आधुनिकता की दौर

बचपन को जीने दो!

FacebookTwitterGoogleLinkedIn


“ये दौलत भी ले लो ये शौहरत भी ले लो, भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी

मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन, वो कागज़ की कश्ती वो बारिश का पानी।”

जगजीत सिंह जी के इस गीत के पीछे बहुत गहरे भाव हैं। आज हकीक़त में बचपन खो गया है। कुछ दिखावे की चादर में छुप गया, कुछ अमीरी की बोझ से दब गया और जो थोड़ी बहुत पदचिन्ह बची है, उसे हम अपने हाथों से मिटाते जा रहे हैं।

पहले हम सभी अपना बचपन माँ की गोद से शुरू हो मिटटी की गोद में बिताते थे, हवाओं के साथ झूमते थे, ठोकर खाते थे, बारिश में आम चुनने के लिए बगीचों में भागते थे, लड़ते थे, झगड़ते थे; हर दुसरे दिन अपने साथ माँ के पास हजारो शिकायते लाते थे। हर एक लापरवाही या  बेपरवाही, उसमे एक जिंदादिली थी, एक ऐसी बेफिक्री जो वक़्त के साथ पकती थी।

पर आज हमने बचपन धीरे-धीरे छिन रही है। बच्चों को पता ही नही है कि बचपन क्या है! आज बचपन की शुरुआत माँ की गोद से होती ज़रूर है, पर वो बड़ा अनुशासन, शासन, आधुनिकता और फैशन की छाओ में होती है। मेरी एक 8 साल की भांजी है, उसे बड़े होते देखा है मैंने, पर मुझे आज तक समझ नही आया वो बच्ची कब थी। जो वक़्त बचपन को जीने का होता है, हमने उन्हें नियमों की ज़ंजीर में बाँध दिया है; उठते कैसे हैं, बैठेते कैसे हैं, खाते कैसे हैं, किसी के घर पर किस तरह का स्वभाव होना चाहिए इत्यादि। अत्यधिक अनुशासन बचपन मे विपरीत नतीजे दे सकता है।

मुझे याद है नवम्बर में जब मैं घर जा रही थी, तो प्लेटफार्म पे एक बच्ची को देखी। उसे किसी की फिकर नहीं थी बस खुद में खोई थी। बार-बार खुद को आईने में देख-देख कर श्रृंगार किये जा रही थी, उसके आव-भाव से लग ही नही रहा था की वो मात्र 7 या 8 की होगी। शायद वो जानती ही नही थी कि बचपना क्या होता है!

हम अपनी आधुनिकता के दौर में बच्चों को शामिल करते वक़्त ये भूल जाते हैं कि, “उनके बचपने को जिंदा रखना है”। शायद ये भी एक करण है की आज ज़्यादातर बच्चे जब पढाई या किसी और वजह से माँ-बाप से दूर होते हैं, तो रास्ता भटक जाते हैं, मुश्किलों से हार कर आत्महत्या कर लेते हैं।

क्यूँ ? क्योंकि उन्हें गिर के संभलना नही आता, मुश्किलों से लड़ना नही आता। बचपन जिंदगी का वो आइना है, जिसमे जब भी हम खुद को देखते हैं, एक मुस्कान उभर आती है। पर आज बच्चों से बचपना खो गया है।

 

Leave a Reply


Your email address will not be published. Required fields are marked *