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प्री पेड प्रायाश्चित, पोस्ड पेड पश्चाताप

तहलका वाले चिर तरुण परम तेजस्वी तेजपाल जी प्रायाश्चित करना चाहते थे। कसूर कोई खास नहीं, बस एक जरा सा एटेंप्ट टू रेप हो गया था। सफाई में तेजपाल जी बोले– मैं तो मजाक कर रहा था। बात ठीक भी है। इस देश में रेप मजाक ही तो है। प्रति मिनट भारत में एक रेप होता है, पुलिस रेप को मजाक समझती, रेपिस्ट मजाक समझता है। तेजपाल जी ने भी वही समझा। लेकिन नैतिकता देखिये, जब उन्हे लगा कि उनके इस मजाक से लड़की आहत है और पूरा देश गुस्से में है, तो फौरन कह दिया, मैं प्रायाश्चित करने को तैयार हूं। मेरी कंपनी का एचआर डिपार्टमेंट मामले की जांच करे और अगले छह महीने तक मैं ऑफिस नहीं आउंगा। छह महीना किसी भी मामले को सेटेल करने के लिए काफी है। लेकिन ज़रा सोचिये छह महीने के प्रायाश्चित हॉलीडे में तेजपाल जी क्या करते, टाइम कैसे पास होता। दिल बहलाने के लिए फिर कहीं कोई नया `मजाक’ करना ही पड़ता।

खैर जो भी हो, लेकिन अपने सत्कर्म को मजाक बताकर और बदले में प्रायाश्चित की बात करके तेजपाल जी ने देश भर की अलग-अलग जेलो में बंद सदाचारी दुराचारियों को ग़जब का आइडिया दे दिया। आसाराम बापू ने कहा—मैं भी बहुत बड़ा मजाकिया हूं। प्रवचन के बाद मुझे जो भी समय मिलता था, मैं उसमें मजाक ही करता था। बहुत से मजाक किये, किसी ने कभी कुछ नहीं। लेकिन अचानक मेरे मजाक से एक लड़की की भावना आहत हो गई। घोर कलियुग आ गया है, सहिष्णुता लुप्त होती जा रही है। अब लोग मजाक तक का बुरा मान जाते हैं। ख़ैर जब भावना आहत हो ही गई तो मैं भी प्रायाश्चित कर लेता। ये कोर्ट, कचहरी पुलिस और जेल का चक्कर क्यों? आत्मशुद्धि हो जाती,सब ठीक हो जाता। आसाराम खुद को धिक्कार रहे हैं, अगर तरुण तेजपाल को भी। तेजपाल अगर अपना `मजाक’ जरा पहले कर लेते और पश्चाताप का आइडिया पहले देते तो क्या बिगड़ जाता। बापू भी प्रायाश्चित में मौन व्रत धारण कर लेते, पुलिस और जज के सामने कुछ बोलते ही नहीं। लेकिन ये कमबख्त प्रायाश्चित का आइडिया ही देर से आया।आसाराम तो चूक गये, लेकिन उनके `मजाकिया’ छोरे नारायण साई को प्रायाश्चित का आइडिया सही समय पर मिला गया। कई तरह के मजाक का आरोपी नारायण साई प्रायाश्चित हॉलीडे के लिए किसी नामालूम जगह पर गया है। ना तो पुलिस के हाथ आ रहा है और ना मीडिया वालो के। जिस दिन पकड़ा जाएगा, उस दिन का कह देगा, मैं तो प्रायाश्चित कर रहा था, आत्मशुद्धि के लिए घनघोर तपस्या कर रहा था। लेकिन पुलिस संतजनो को कोई काम ठीक से नहीं करने देती है। इसी वजह से हमारे महान आयावर्त से धर्म का नाश हो रहा है।

तरुण तेजपाल के प्रायाश्चित फंडे पर कई लोग चकरा रहे हैं। लेकिन सच ये है कि इस देश में पुलिस तंत्र की निगरानी में एक पूरा का पूरा प्रायाश्चित तंत्र बरसो बरस से चल रहा है। सेठजी के गोदाम से करोड़ो का मिलावटी माल पड़ा है। पुलिस का छापा पड़ता है। रोते-बिलबिलाते सेठजी थानेदार साहब से फरियाद करते हैं– हुजूर माई-बाप ये एक लाख रुपये का तुच्छ भेंट स्वीकार करें और गरीब को प्रायाश्चित करने का एक मौका दे दें। थानेदार साहब नोटो की गड्डी संभालते हैं और हंसकर शुभ वचन बोलते हैं— जा ऐश कर। छुटभैया नेताजी के उदयीमान स्ट्यूडेंट लीडर बेटे ने कॉलेज में किसी को सरेआम चाकू घोंप दिया। नेताजी डीएसपी साहब के सामने गिड़गिड़ाते हैं—पुलिस केस हो गया तो जिंदगी ख़राब हो जाएगी, सुधरने का एक मौका दे दीजिये। नेताजी डीएसपी साहब के प्रायाश्चित फंड में पैसा जमा कराते हैं और पुलिस चाकूबाजी के मामले में किसी अज्ञात व्यक्ति के नाम एफआईआर दर्ज कर लेती है, जिसका कभी पता नहीं चलता। शहर के जाने-माने उद्योगपति लड़की छेड़ते हुए पकड़े जाते हैं। मामला पुलिस तक पहुंचता है। उद्योगपति महोदय कहते हैं, मैं पश्चाताप की अग्नि में जल रहा हूं। लेकिन यकीन मानिये कसूर मेरा नहीं, शराब का है। पुलिस और अदालत तक मामला पहुंचा तो बहुत बेइज्ज़ती होगी। कुछ कीजिये, बदले में हम बहुत कुछ करेंगे। पुलिस पूरे मामले पर विचार करने के बाद इस निष्कर्ष तक पहुंचती है कि उद्योगपति महोदय की इज्ज़त पूरे शहर की इज्ज़त है और फिर मामले में भी कोई दम नहीं है। इसलिए एफआईआर दर्ज नहीं होगी।

प्रायाश्चित तंत्र पुराना है। लेकिन तरुण तेजपाल के प्रकरण के बाद कस्बा सज्जनपुर के दुर्जन दारोगा के दिमाग़ में एक नायाब आइडिया आया। पापी प्रायाश्चित करते हैं और पुलिस आउट ऑफ कोर्ट प्रायाश्चित करवाती है। फिर क्यों ना मोबाइल कंपनियों की तरह प्रायाश्चित की अलग-अलग स्कीम निकाल दी जाये। छुट्टन जेबकतरा महीने में एक बार ज़रूर पकड़ा जाता है और जब भी पकड़ा जाता है, सुधरने का एक और मौका मांगता है। फिर काफी ड्रामेबाजी के साथ टेंट ढीली करता है और कहता है, आजकल धंधा कुछ खास नहीं चल रहा है। दुर्जन दारोगा सोच रहे हैं, क्यों ना छुट्टन जैसे लोगो के लिए प्रायाश्चित की प्री पेड स्कीम शुरू कर दी जाये। महीने के शुरू में ही एक बार पैसे भर और उसके बाद जी भरकर पाप और प्रायाश्चित कर। क्रेडिट लिमिट खत्म तो नया कार्ड लेना होगा, नया कार्ड नहीं लिया तो सीधा अंदर। लेकिन जो लोग लेन-देन के मामले में विश्वसनीय है, उनके लिए पोस्ट पेड ऑफर होगा। पाप कीजिये थाने में आइये, बिल चुकाइये और गंगा नहाइये। दारोगाजी प्री पेड और पोस्ट पेड स्कीम विधिवित लांच करने की तैयारी में ही थे कि अचानक दिल्ली से ख़बर आ गई। पब्लिक प्रेशर और मीडिया के दबाव की वजह से तेजपाल जी को अंदर जाना ही पड़ेगा। कमबख्त ये मीडिया वाले भी किसी के सगे नहीं होते। तहलका मचाने वाले तेजपाल जी अब खामोशी से काल कोठरी में चक्की पीसेंगे। दुर्जन दारोगा के लिए इस कथा की शिक्षा ये है कि प्री पेड और पोस्ट पेड प्रायाश्चित स्कीम हाई प्रोफाइल मामलो में नहीं चल सकती।

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