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प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का बुद्ध प्रेम

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श्री नरेंद्र मोदी जी ने अपनी विदेश यात्राओं जैसे भूटान. चीन, जापान आदि तथा बिहार में बुद्ध एवं बौद्ध धम्म के प्रति जो प्रेम प्रकट किया है उसके लिए वे धन्यवाद के पात्र हैं| “बौद्ध धम्म” के प्रचार और प्रसार के लिए मौर्य वंशी सम्राट अशोक के द्वारा किए गये कार्यों की भी उन्होंने प्रशंसा की| बिहार के बोध गया में 5, सितंबर,2015 को हुए अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन में बौद्ध बिहार के जीर्णोद्धार की भी घोषणा की है| गुजरात के देव नी मोरी में विश्व की सबसे ऊँची दूसरी बुद्ध प्रतिमा लगाने की भी सरकार की योजना है| इन सबके लिए भी मैं श्री नरेंद्र मोदी जी का हार्दिक स्वागत करता हूँ|

श्री नरेंद्र मोदी जी के इस बुद्ध एवं बौद्ध धम्म के प्रति प्रेम को देखकर मेरे मन के विचार तरंगों में अनेक प्रश्न उठ खड़े हुए हैं जिनका उत्तर मैं नहीं खोज पाता हूँ| अतः मैं चाहता हूँ कि आदरणीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी जो जनता के साथ अपने मन की बात करके उनके प्रश्नों का उत्तर देते हैं उसी प्रकार मेरे मन में उपजे प्रश्नों के भी समुचित उत्तर देकर मेरे मन को भी संतुष्ट करने की कृपा करंगे|

प्रश्न नं०- १—-क्या श्री नरेंद्र मोदी जी बुद्ध एवं उनके धम्म (बौद्ध धम्म ) में सच्ची आस्था एवं विश्वास रखते हैं?

प्रश्न नं०-२—-क्या श्री मोदी जी महान मौर्य वंशी सम्राट अशोक के द्वारा बौद्ध धम्म के प्रचार एवं प्रसार हेतु किए गये कार्यों का आदर एवं सम्मान करते हैं?

प्रश्न नं०-३——क्या श्री मोदीजी हिंदुत्व वादी विचारधारा जो पूर्व में हिंदू वादी तथा उससे भी पूर्व में ब्राह्मण वादी विचारधारा थी , में विश्वास रखते हैं?

प्रश्न नं०-४—–क्या श्री मोदी जी वेद, ब्राह्मण, उपनिषद्, मीमांसा, वेदांत तथा स्मृतियों (मनु स्मृति ) और गीता आदि में विश्वास एवं आस्था रखते हैं?

प्रश्न नं०-५—–क्या श्री मोदी जी रामायण के प्रमुख पात्रों राम और लक्ष्मण की विचारधारा में पूर्ण आस्था एवं विश्वास रखते हैं?

प्रश्न नं०-६—–क्या श्री मोदी जी भारत की प्राचीन वैदिक संस्कृति को वर्तमान में भी सुसंस्कृति मानते हैं और उसका प्रसार चाहते हैं?

प्रश्न नं-७——क्या श्री मोदी जी गाँधीजी के हिंदू धर्म के विषय में व्यक्त किए गये विचारों में विश्वास रखते हैं?

प्रश्न नं०-८—-क्या हिंदूवादी संगठन आर० एस० एस०, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल एवं अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा आदि का सामूहिक, संगठित प्रयास एवं लक्ष्य आरक्षण की समाप्ति, भारतीय संविधान को नष्ट करना, बौद्ध धम्म,ईसाई धर्म एवं मुस्लिम धर्म के बढ़ते प्रभाव को रोकना और दलित आंदोलन तथा पिछड़े वर्ग में फूट डालकर उन्हें कमजोर करना है? यदि नहीं| तो इस तरह के कार्यों में वृद्धि क्यों दिखाई दे रही है?

प्रश्न नं०-९—-क्या श्री मोदीजी भारत को एक हिंदू राष्ट्र मानते हैं अथवा बनाना चाहते हैं?

प्रश्न नं०-१०—-क्या श्री मोदी जी के हृदय में भारत को बुद्ध के सपनों का भारत बनाने का कोई विचार आया है?

प्रश्न नं०-११— यदि प्रश्न नं०-१ का उत्तर हाँ में है तो क्या श्री नरेंद्र मोदी जी बौद्ध धम्म के उन सिद्धांतों में विश्वास रखते हैं जिनके आधार पर बुद्ध ने ब्राह्माणवादी धर्म, उसकी विचारधारा एवं कुत्सित रीति-रिवाजों आदि को समाप्त करने का प्रयास किया था?|

प्रश्न नं०-१२—- यदि प्रश्न नं०-२ का उत्तर हाँ में है तो मैं जानना चाहूँगा कि जिस मौर्य वंशी सम्राट अशोक ने बौद्ध धम्म को विश्व का धम्म बनाने का प्रयास किया था, उसी मौर्य वंश तथा बौद्ध धम्म को ब्राह्माणवादी राजा पुश्यमित्र शुंग ने क्यों समाप्त किया था | पुश्यमित्र शुंग ने एक बौद्ध भिक्षु का कटा सिर लाने वाले को १०० दीनार इनाम में देने की घोषणा की थी| इसको श्री नरेंद्र .मोदीजी कैसे देखते हैं और इस सम्बंध में उनके क्या विचार हैं? (बौद्ध ग्रंथ–दिव्यावदान )

प्रश्न नं०-१३—-यदि प्रश्न नं०-३ व ४ का उत्तर हाँ में है तो क्या श्री मोदीजी ब्राह्माणवादी धर्म, उसकी विचारधारा, वर्णाश्रम धर्म तथा जाति के आधार पर स्थित समाज व्यवस्था और उसमें निहित शोषण व्यवस्था को बनाए रखने के पक्षधर हैं? यदि नहीं| तो वे इसको समाप्त करने के लिए क्या करना चाहेंगे?

प्रश्न नं०-१४—–यदि प्रश्न नं०-५ का उतार हाँ है तो राम के द्वारा किए गये शूद्र बध के बारे में, अपनी पत्नी सीता जो समस्त नारी जाति की प्रतीक मानी जाती हैं,को अग्नि परीक्षा देने के लिए मजबूर करने एवं देश से बहिर्गमन का आदेश देने के रूप में किए गये अत्याचार और लक्ष्मण के द्वारा बौद्ध लोगों के प्रति कहे गये अपमान जनक शब्दों (वाल्मीकि रामायण ) के बारे में श्री नरेंद्र मोदीजी के क्या विचार हैं? इसको कैसे देखते हैं?

प्रश्न नं०-१५—-यदि प्रश्न नं०-६ का उत्तर हाँ में है तो क्या श्री नरेंद्र मोदीजी व्यर्थ के आडंबरों व रीति-रिवाजों में विश्वास रखते हैं? क्या एक गुरू के द्वारा गुरू-दक्षिणा के रूप में एक शिष्य का अंगूठा कटवा देना उचित है जबकि वह सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर हो? क्या एक स्त्री को किसी वस्तु की तरह अनेक लोगों की पत्नी के रूप में सौंप देना उचित है? क्या स्त्री तथा पुरुषों को वस्तु की तरह जुए में दाँव पर लगा देना उचित है? इनके विषय में श्री मोदीजी के क्या विचार हैं?

प्रश्न नं०-१६—–यदि प्रश्न नं०-७ का उत्तर हाँ है तो क्या श्री नरेंद्र मोदीजी गाँधी के इस विचार से सहमत हैं जो उन्होंने अपनी पुस्तक वर्णव्यवस्था” की प्रस्तावना में (पृष्ठ-१४ ) पर लिखा है? उन्होंने कहा था “हिंदू धर्म का सच्चा नाम ‘वर्णाश्रम धर्म’ है|हिंदू नाम परदेशी मुसाफिरों का रखा हुआ जान पड़ता है और उसका सम्बंध भूगोल के साथ है| हमने जो धर्म पाला है उसे यदि कोई मतलव भरा नाम दिया जा सकता है तो वह नाम वर्णाश्रम धर्म है|” यह विचार पूर्णतः वर्णाश्रम व्यवस्था लागू करने का पक्षधर है| क्या मोदीजी इससे सहमत हैं?

प्रश्न नं०-१७—- यदि प्रश्न नं०-८ का उत्तर हाँ है तो भारत में रहने वाले उन लोगों के चाहे वे किसी भी धर्म जैसे बौद्ध, जैन, सिख,ईसाई व मुसलमान आदि तथा वे लोग भी जो किसी भी धर्म में विश्वास नहीं रखते हैं, के विषय में श्री नरेंद्र मोदीजी क्या सोचते हैं? क्या भारत में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को वे हिंदू बनाने के पक्षधर हैं? यदि सभी को हिंदू होना चाहिए तो हिंदू धर्म में प्रत्येक व्यक्ति की सामाजिक स्थिति क्या होगी? उनके राजनैतिक व आर्थिक अधिकार क्या होंगे| इसका खुलासा करने का कोई विचार बनाया है क्या?

प्रश्न नं०-१८—–श्री नरेंद्र मोदीजी के बुद्ध एवं उनके धम्म “बौद्ध धम्म” के प्रति प्रेम को देखकर ऐसा लगता है मानो उन्होंने भारत को बुद्ध का भारत बनाने का विचार बना लिया है| यदि ऐसा है तो उनकी हिंदू विचारधारा का क्या होगा? बुद्ध की विचारधारा व हिंदूवादी विचारधारा दोनों अलग धाराएं हैं| इसी कारण डॉ० भीमराव अंबेडकर जी ने सन् १९५६ में अपने लाखों अनुयाइयों के साथ हिंदू धर्म को त्याग कर बौद्ध धम्म अपनाया था| क्या श्री नरेंद्र मोदीजी इससे सहमत हैं?

मैं आशा करता हूँ और मुझे विश्वास है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदीजी से मेरे इन प्रश्नों का समुचित व स्पष्ट उत्तर अवश्य मिलेगा ओर मुझे संतोष मिलेगा|

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