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प्रदुषण ले लड़ने के लिए कुछ आयुर्वेदिक रास्ते

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कैसे दिन आ गए हैं? भगवान् का दिया हुआ एक अनमोल तोफा- हवा- को भी इंसान ने इतना दूषित कर दिया है कि जगह-जगह लोग प्रदूषण से बचने के लिए मुखौटे और प्यूरीफायर खरीद रहे हैं। घर से ऑफिस यातायात करना भी मेरे लिए खतरे से कम नहीं रहा। जलती आखें, डगमगाती सासें और सिरदर्द आम बात हो चुकी है। हालांकि मैं तकनीकी यन्त्र जैसे कि प्यूरीफायर इत्यादि के खिलाफ नहीं हूँ, प्रदूषण से लड़ने के लिए प्राकृतिक तरीके मुझे ज़्यादा प्रभावशाली लगते हैं। कुछ आयुर्वेदिक तत्व और घरेलु नुस्के काफी लाभदायक हैं। आशा करता हूँ की जिस प्रकार मुझे इनसे लाभ मिला है, आपको भी मिले:

  1. सुबह और शाम नाक के दोनों नथनों मे घी के दो बूँद डालने से श्वासन तंत्र प्रदुषण तत्वों से मुक्त होती है। नाक और गले मे हानिकारक रसायनिक तत्व जैसे की लेड एवं पारद की बदबू और स्वाद को भी घी पूरी तरह से ख़त्म करता है।
  2. तुलसी का पौधा हवा मे फैले हुए प्रदूषित तत्वों को ख़त्म करने मे काफी असरदार हैं। तुलसी के सेवन से भी श्वासन तंत्र स्वस्थ और साफ़ रहता है।
  3. नीम के पत्तों से स्नान करने पर शरीर से चिपके हुए प्रदूषित कण साफ़ हो जाते हैं। गरम पानी मे नीमपत्ता डालकर स्नान करने से इसका प्रभाव और भी ज़्यादा होगा। तुलसी की तरह नीम का भी सेवन करना काफी लाभदायक है।
  4. शहद को गरम पानी मे डालकर पीने से काफी लाभ होगा। श्वासन तंत्र को साफ़ करने के साथ यह आंत्र प्रणाली को भी शुद्ध करता है। इस बात पर ध्यान दें की मधु शुद्ध और देसी हो। अगर मधु की एक बूँद आपकी ऊँगली से चिपकी रहे या फिर पानी से भरी गिलास मे घुलने पर सतह पर जम जाए, तो मधु शुद्ध है।
  5. पुदीना या युकलिप्टुस तेल से भाप लेने पर भी श्वासन तंत्र काफी हद तक साफ़ होता है। साथ ही चेहरे से प्रदूषित तत्व भी ख़त्म होते हैं।

प्रदुषण को ख़त्म करने की प्रक्रिया लम्बी और जटिल है लेकिन नमुमकिन नहीं।

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