PK-Finding_Rahul
comedy Democracy Featured Governance Opinion Politics Top

पूछे पीके– किस `गोला’ पर हैं, राहुल भईया?

FacebookTwitterGoogleLinkedIn


वो पीके से प्रेरित था या पीके फिल्म उसकी कहानी से प्रेरित होकर बनाई गई, ये जांच का विषय है। लेकिन दोनो कहानियां एकदम एक जैसी हैं। राजकुमार हिरानी के पीके की तरह वो भी किसी को ढूंढने आया था। भगवान को नहीं लेकिन भगवान सरीखे किसी और को। जब वो दिल्ली पहुंचा तो उसका असली नाम कोई नहीं जानता था। पीके के आमिर खान की तरह उसके सिर पर भी एक पीला हैलमेट था और हाथ में पर्चियां थीं, जिनपर लिखा था—राहुल भईया लापता। मिलने पर 24 अकबर रोड पहुंचा दें। पहुंचाने वाले को राह खर्च के अलावा उचित इनाम दिया जाएगा। जब तक पुलिस उसे पकड़कर संसद मार्ग थाने ले जाती, वो सैकड़ो पर्चियां बांट चुका था और राहुल भईया के लापता होने की ख़बर पूरी तरह फैल चुकी थी। पकड़े जाने के बाद उससे कड़ी पूछताछ शुरू हुई और कहानी का फ्लैश बैक कुछ यूं शुरू हुआ–

वो फिल्मी पीके की तरह पीके नहीं बल्कि सचमुच का पीके था। उसका पूरा नाम पप्पू कुमार था। वो अमेठी के किसी गांव का रहने वाला था। उसके बाप-दादा-परदादा सब कांग्रेसी थे, इसलिए वो भी जन्मजात कांग्रेसी था। उसके दादाजी ने इंदिरा जी को वोट दिया था, पिताजी ने राजीव जी के हाथ मजबूत किये थे, इसलिए जवान होते ही वो भी सीधे राहुल भईया के चरणो में लोट गया था। राहुल भईया ने उसे उठाकर गले लगाया था और ये कहा था कि उसके साथ उनके परिवार का रिश्ता कोई एक दिन का नहीं बल्कि जनम-जनम का है। राहुल भईया तब प्रचार के लिए अमेठी आये थे। अगले दिन अख़बारो में राहुल भईया के साथ पीके की बड़ी-बड़ी तस्वीरे छपी थीं। नया-नया वोटर बना पीके कभी अमेठी से बाहर नहीं गया था। वो यही मानता था कि अमेठी का चुनाव जीतकर राहुल भईया प्रधानमंत्री बन जाएंगे। भईया के प्रधानमंत्री बनते ही उसके परिवार के सारे दुख दूर हो जाएंगे। गांव में बिजली आने लगेगी और उसे जल्दी कोई नौकरी मिल जाएगी। यानी सब मंगल ही मंगल होगा। चुनाव हुए नतीजे आये राहुल भईया जीत भी गये। पप्पू को लगा कि वो अव्वल नंबर से पास हो गया है, मारे खुशी के नाचने लगा।

लेकिन खुशी ज्यादा देर नहीं टिकी। किसी ने उसे बताया कि चुनाव अमेठी में ही नहीं बल्कि पूरे देश में हुए थे। राहुल भईया अमेठी में तो जीत गये लेकिन पूरे देश में उनकी पार्टी बुरी तरह हार गई। इसीलिए भईया प्रधानमंत्री नहीं बन सकते हैं। पप्पू उर्फ पीके बहुत उदास हो गया। उसने अपने बुजुर्गो से पूछा कि क्या ऐसा नहीं हो सकता कि राहुल भईया भारत के बदले अमेठी के प्रधानमंत्री बन जायें। बुजुर्गों ने सिर हिलाया, ऐसा बिल्कुल नहीं हो सकता। अगर राहुल भईया को प्रधानमंत्री बनना है तो उनकी पार्टी को पूरे भारत के चुनाव में जीतना होगा और भईया की पार्टी दोबारा कभी पूरे देश में चुनाव जीतने लायक बन पाएगी ऐसा फिलहाल संभव नहीं लगता। पीके ने पूछा— तो फिर राहुल भईया ऐसी पार्टी में हैं ही क्यों। वो किसी ऐसी पार्टी में क्यो नही चले जाते जो चुनाव जीत सकती हो? बुजुर्ग चकरा गये। उन्होने कहा कि इसका जवाब तो राहुल भईया ही दे सकते हैं। लेकिन वो चुनाव के बाद से कहीं अंतर्ध्यान हो गये हैं।

उस दिन के बाद से पीके राहुल भईया को ढूंढने निकल पड़ा। अमेठी से दिल्ली पहुंचा, कई लोगो से पूछा लेकिन राहुल भईया का पता नहीं चला। पहले वो दस जनपथ गया। लेकिन वहां तैनात सिक्यूरिटी वाले लाठी भांजने लगे। पीके ने बहुत समझाया कि गांधी परिवार से उसकी रिश्तेदारी एक दिन की नहीं बल्कि जनम-जनम की है, लेकिन कम्बख्त सिक्यूरिटी वालो ने उसे धक्के मारकर निकाल दिया। उसके बाद पीके कांग्रेस पार्टी के हेडक्वार्टर 24 अकबर रोड गया और वहां के लोगो से राहुल भईया का पता पूछा। कार्यकर्ताओं ने कहा कि बड़े नेताओं को पता होगा। बड़े नेता पीके से मिलने को तैयार नहीं हुए. जो मिले उन्होने कहा—हम भी ढूंढ रहे हैं, तुम्हे कहीं मिले तो बताना। पीके इस निष्कर्ष पर पहुंच गया कि ज़रूर राहुल भईया कहीं गुम हो गये हैं।

पुलिस के पास गया, तो पुलिस वालो ने पागलखाने में भर्ती होने की सलाह दी। निराश होकर पीके ने राहुल भईया के के नाम का गुमशुदी वाला पर्चा छपवा लिया और इधर-उधर बांटने लगा। जब वो पुलिस के हत्थे चढ़ा तब उसके पास से कई पर्चे बरामद हुए। हैलमेट उसने इसलिए पहन रखा था कि दोबारा अगर दस जनपथ पर सिक्यूरिटी वाले लाठी भांजे तो उसका सिर ना फूटे। छानबीन के बाद पुलिस का कहना है कि पीके मानता है कि पूरी दुनिया में एक राहुल भईया ही हैं, जो उसकी परेशानियां दूर सकते हैं। लेकिन राहुल भईया ना जाने कौन सी दूसरी दुनिया में शिफ्ट हो गये हैं कि अब न्यूज़ चैनल वाले भी उन तक नहीं पहुंच पाते। उनकी पार्टी तक को पता नहीं है कि राहुल भईया का नया `गोला’ कौन सा है। लेकिन पीके जानता है कि उसकी रिश्तेदारी जनम-जनम की है, इसलिए वो एक ना एक दिन राहुल भईया को ज़रूर ढूंढ निकालेगा।

Leave a Reply


Your email address will not be published. Required fields are marked *