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परमाणु बम से आज़ादी!

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हाल ही मे नोबेल प्राइज़ समिति ने अन्तराष्ट्रीय परमाणु हथियार समाप्ति संगठन (ICAN) को शांति पुरस्कार से नवाज़ा। समिति ने कहा की, “ग्लोबल वार्मिंग, प्रदुषण और आतंकवाद से भी ज्यादा भयानक है परमाणु हथ्यार।इसके उत्पादन को रोकना और परमाणु शक्ति को ऊर्जा के लिए उपयोग करना आवश्यक है।”

जब अमेरिकी सेना ने अगस्त 1945 को जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए थे, तो इसका प्रभाव पूरी दुनिया ने देखा था। शायद इंसान ने उस दिन बर्बरता और हैवानियत की नई मिसाल कायम की थी। कल जब मै परमाणु बम के इतिहास पर युटूब पर एक वृत्त चित्र देख रहा था तो फिल्म के दौरान, कथावाचक ने जापानी हादसे के बारे मे भी उल्लेख किया था। एनीमेशन और स्पेशल इफेक्ट्स की मदद से फिल्म के निर्माताओं ने उस हादसे को पुनः दिखाया. जब अमेरिकी बॉम्बर ‘एनोला गे’ ने हिरोशिमा पर ‘लिटिल बॉय’ नामक परमाणु बम गिराया था। विस्फोट से उठने वाली रौशनी ने कुछ क्षण के लिए मेरी आँखे बंद कर दीं। आप ऐसा मानिए की एक साथ दस सूरज की तेज़ किरने आपकी आँखों मे प्रवेश कर रही हों।

जो लोग विस्फोट के केंद्र मे थे, बम का धमाका होते ही वे भाप बन गए। जी हाँ, भाप! कोई हड्डी या खून के अवशेष नहीं! मैंने कुछ क्षण के लिए फिल्म को पौज़ किया। ऐसी विनाश लीला मैंने पहले कभी नहीं देखी थी और कभी देखना भी नहीं चाहता। औरत, बच्चे, कुत्ते, घोड़े, कीड़े चंद सेकंड्स मे भांप बन गए! विशेषज्ञों ने बाद मे बताया की बम के गिरने के बाद सतह का तापमान 6000OC था! इसके अलावा विकिरण से मरने वालों की संख्या भी काफी ज़्यादा थी।

अमेरिकी प्रयोग के तत्पश्चात, राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने हेतु, रूस, इंग्लैंड, फ्रांस, चीन, पाकिस्तान और भारत ने भी परमाणु हथ्यार बनाए। लेकिन सभी देशों ने इस बात को ध्यान मे रखा की ‘परमाणु शस्त्रागार को सिर्फ ‘राष्ट्रीय सुरक्षा के हेतु अंतिम उपाय के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा’। अमेरिकी राष्ट्रपति आईजेंहावर ने ‘शान्ति के लिए परमाणु’ का नारा लगाया। भारत के पूर्व प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपायी ने भी ‘नो फर्स्ट यूज़’ की नीति अपनाई। चीन और पकिस्तान के बढ़ते परमाणु शस्त्रागार को मद्दे नज़र रखते भारत ने मई 1974 और मई 1998 को राजस्थान के पोख्रान मे ‘परमाणु बम’ का प्रयोग प्रदर्शन भी किया था।

वर्तमान स्थिति मे उत्तर कोरिया (उ.को.) अपने पागल और खतरनाक नेता किम जोंग- उन के नेत्रत्व मे 6 परमाणु हथ्यार प्रयोगात्मक विस्फोट कर चूका है। हाल ही मे उ.को. ने जापान के ऊपर भी परमाणु मिसाइल दागा था। हालांकि यह मिसाइल सिर्फ जापान और दुनिया को डराने हेतु लांच किया गया था, कई देशों ने उ.को. के  इस व्यवहार की कड़ी निंदा की। ICAN ने भी इस हादसे  के प्रति अपनी आपत्ति व्यक्त की। ICAN ने इसके साथ दुनिया मे बढ़ती परमाणु शस्त्रागार के प्रति भी अपनी चिंता व्यक्त की है। पिछले 10 सालों से ICAN परमाणु हथ्यार को ख़त्म करने मे जुटा है। इसी को मद्दे नज़र रखते नोबेल समिति ने ICAN को पुरस्कार दिया। दुनिया के पास अभी 15000 परमाणु हथ्यार हैं जो की पूरी पृथ्वी को ख़त्म कर वास्तविकता मे प्रलय को जन्म दे सकती है। ICAN इसी कोशिश मे दिन रात एक कर रही है की वो दिन कभी ना आये जब विश्व परमाणु युद्ध की तरफ अग्रसर हो।

हम भी यदि अपने क्षमतानुसार अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और शुभ-चिंतकों को परमाणु शक्ति के सदुपयोग के बारे मे बताये, तो वह भी ICAN की क्रान्ति मे एक एहम योगदान होगा। आखिर हमे एक ही पृथ्वी मिली है! इसे हरा-भरा और खुशहाल रखना हम मनुष्यों का परम-धर्म होना चाहिए।

 

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