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नैतिक बनाम अनैतिक

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जो सोये हैं नींद में गहरी हम उठा सकते हैं उन्हें
पर जो हैं जागकर सोए हम नहीं उठा सकते उन्हें
उजाले में किया हर कार्य नैतिक नहीं होता
अंधेरे में किया हर कार्य अनैतिक नहीं होता
अंधकार और प्रकाश तो प्रकृति का नियम है
जो दोनों में करे कार्य नैतिक वही बड़ा संयम है
थक जाते हैं कार्य से दिन में तो रात विश्राम देती है
जब मन हो जाता है कुंठित तो रात शांति देती है
दिशा अनंत है जैसे, अच्छे बुरे की सीमा नहीं होती
जो भर दे नैतिकता समाज में उसकी तुलना नहीं होती
भगवान अनेक हो सकते हैं यहाँ हर धर्म के नाम से
बाँट सकते हैं दुनियाँ को वे बस अपने ही नाम से
महापुरुष बिरले ही होते हैं जो मानवता का तप करें
प्रेम और भाईचारा प्रसार कर समाज में नैतिकता भरें
मनुष्य जब करेंगे कार्य मिलकर नैतिकता के सभी
सुख, चैन और अमन की, बहेंगी यहाँ नदियाँ तभी
जागो, उठो नींद से अब सब, अज्ञानता को दूर करो
दुखी न हो अब कोई जगत में, ऐसे नैतिक कार्य करो
बस केवल नैतिक कार्य करो, अब केवल नैतिक कार्य करो
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