potato-poha-alu-poha-recipe-gujarati-poha
Cooking Food Hindi Indian Food Top

निरुपम ब्रांड पोहे विद स्लिम टी: ‪#‎बैचलर्सकिचन‬ की खास पेशकश

FacebookTwitterGoogleLinkedIn


हॉस्टल में चेकिंग की खबर फैलते ही लोगबाग अपने इलिगल गेस्ट( अतिथि के लिए इससे अपमानजनक शब्द शायद ही धरती पर हो), गर्लफ्रेंड, असली( अश्लील) साहित्य, इधर-उधर फैली चड्डी समेटने, छुपाने, भगाने में लग जाते और इधर हम अपना कूकर-कडाही और चूल्हा.

हमें एक-एक आलमारी मिली हुई थी. ज्यादातर की आलमारी में मंहगे कपड़े,परफ्यूम, सर्टिफिकेट होते और सबसे निचले हिस्से में खास फ्रैंड की दी हुई चीजें..कई महीने के सूखे गुलाब, टेडीवियर, कॉफी मग, आर्ट पेपर लिखी कविता आदि-आदि..

मेरी आलमारी में भी यही सारी चीजें होंती बस नीचे का हिस्सा बाकियों से बिल्कुल जुदा होता. नीचे होती हल्दी-नमक,धनिया पाउडर, जीरा आदि की छोटी-छोटी शीशियां और एक नॉन स्टिक पैन, छोटा सा भगोना, एक छोटी सी कडाही और थोड़ी सी क्रॉकरी. ये आलमारी का वो हिस्सा होता जिसे हम लोगों की नजर से बचाकर रखते.

तमाम कोशिशों के बावजूद मेरी विंग के लोगों को पता चल गया था कि मैं कमरे में कुछ-कुछ खाने की चीजें बनाता हूं. कभी किसी ने शिकायत नहीं की लेकिन अपनी हिस्सेदारी जब-तब जाहिर कर देते. तब मैं सुबह के साढ़े चार-पांच बजे सोता तो रात के दो बजे भूख लग जाती. हम बुध बाजार जाकर सब्जी लाया करते और इस वक्त उबली हुई सब्जी, मैगी,पोहा, पास्ता जैसी चीजें बनाकर खाते. पोहा बनाते वक्त निरुपम पर्यायवाची शब्द के तौर पर याद आता. आज भी आया.

साउथ कैंपस से पढ़ाई कर रहे निरुपम को जब भी नार्थ कैंपस आना होता, ऑटोकट की तरह फिक्स रहता कि आज मुझे पोहा बनाना है. चीजें अमूमन पहले से होती लेकिन धनिया पत्ती और मटर का इंतजाम कर लेता. साहित्य, कैंपस के चोचलेबाजी और महंतों के बीच पोहा स्नेहक का काम करता. कई बार तो सिर्फ पोहा के लिए मिलना होता. ये सारा काम दरवाजा बंद करके, रूम पार्टनर को विश्वास में लेकर होता..तब हमें अंकलSumant Pandya) की प्राइवेट कॉफी ज्ञान बिल्कुल न था लेकिन विधान बिल्कुल वैसा ही था. बनाते वक्त सरसों तेल की खुशबू फैलती तो एकाध लोग और लटपटाने लग जाते तो शेयर पर भी करना पड़ जाता. कई बार दूसरे राउंड की नौबत आ जाती.

इसे बनाने की एक वजह मेरे हाथ का पोहा का पसंद आना तो होता ही, दूसरी बड़ा वजह गप्प के लिए समय बचाना भी होता. समय बचानेवाला तर्क तो अब भी है. दस मिनट के भीतर इससे बेहतर ब्रेकफास्ट या शाम का नाश्ता नहीं हो सकता..बाकी चाय आज आर्ट्स फैक वाले अंदाज में..

Leave a Reply


Your email address will not be published. Required fields are marked *