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देवी-देउता के ऐसे खिल्ली नहीं उड़ाते हैं मेरा बच्चा

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मां: हैप्पी दशहरा विनीत. माता रानी,शेरोवाली बुतरू के खूब अकिल-बुद्दि दे.

विनीत: हैप्पी दशहरा मां..


मां: की हाल है हमर बच्चा, मना लिया दुर्गापूजा ?

विनीत: मनाना क्या, खाए दबाकर दोपहर में ठेठाके सोए, अभी जाकर जलेबी खरीदेंगे. 
तुम्हारे और घर के बाकी बच्चा लोगों के भीतर भी थोड़ा-थोड़ा रावण जिंदा रहे मां, बाकी तो पब्लिक जलाकर राख कर ही रही है.

मां: सालभर के परब में कुछ औ नहीं तो रावण के जिंदा रहे के कामना करता है रे पगला.. जे सीता मईया के गृहस्थी उजाड़ दिया.

विनीत: तुम तो मेरे ही साथ रामायण देखकर बूढ़ी हुई है मां और मैं जवान. याद करो जब रावण मर रहा था तो तुम्हारे ही राम ने क्या कहा था लक्ष्मण से? जाओ लक्ष्मण, आशीर्वाद ले लो..राम को पता था न मां कि ये धरती का कितना बड़ा ज्ञानी है..रावण का ज्ञान हम सबके भीतर बचा रह जाए तो क्या गलत है?

मां: उ बात तो चलो मान लिए लेकिन सीता मईया का जिनगी तो खोबारी( खराब) कर दिया न?


विनीत: एतना दिन सीताजी रहे रावण के अशोक वाटिका में, बार-बार कन्विंस करने का कोशिश किए लेकिन नहीं मानी तो भी टच तो नहीं किए न, जोर-जबरदस्ती नहीं..प्लेटोनिक ही रहा न मां ..कितना संयम बरता रावण ने, आज का आदमी ऐसा संयमी हो जाए तो देश में कितना सुधार हो जाए..हियां तो उसका भक्त लोग में एक पैसा विरोधी को बर्दाश्त करने का शउर नहीं है.

मां: तबिओ, सीता मईया के तो धरती में समाए जाए पड़ा न..?


विनीत: सीता की जिंदगी में कोयला घोरे( खराब करने) का काम किए तुमरे रामजी..बताओ कोई कहे कि तुम्हारी पत्नी ने ये किया-वो किया तो उस पर भरोसा करके छोड़ देगा आदमी ? और फिर अग्निपरीक्षा सिर्फ सीता का क्यों, राम का कुछ लिया गया हिसाब-किताब ? इ तो घोर चुतियापा हुआ.

मां: जाए दो, इ सब अपन-अपन सरद्धा( श्रद्धा) के बात है. तुमलोग बिसय लेके पढ़ा है न इ सब तब जादे पता होगा, हमलोग को तो रामानंदजी जेतना दिखाए,ओही सब से पता चला..मम्मा( मां की दादी) सुंदरकांड के पाठ में ले जाती थी ठाकुरबाड़ी तो थोड़ा-बहुत उससे.


विनीत: वो बात ठीक है लेकिन वही रामानंदजी ने तो दिखाया न रावण से लक्ष्मण को आशीर्वाद लेते हुए, कम से कम लोगों को वही याद रह जाए ?

मां: सालभर के परब में देवी-देउता के ऐसे खुलेआम खिल्ली नय उड़ाते हैं मेरा बच्चा, जलेबी लेवे जा रहा था तुम, लाके खा लो…बाकी इ जलेबिए पर रात में जए-खए मत कर देना..कुछ बना के खा लेना. घर का सारा लड़का-बुतरू अभी मानगो के दुर्गाजी देखे गया है..एक ही चीजवा को दस अदमी के साथ दस बार देखता है..सिरिया जाता है एकदमै से


विनीत: ये सब तो बच्चा लोग का ही चीज है न मां..

मां: हां मेरा बच्चा, बड़ा होवेगा त सब तुम्हारे जैसा ज्ञानी होके देवी-देउता के छेछार( नकार देना) देगा हमर बुतरु..देसवा के दूरी.

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