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दिल मछली कांसे की – भाग – ४

दरवाज़े के ठीक सामने वर्जिन मेरी की एक बहुत बड़ी तस्वीर टंग रही थी, जिसका ऑइल पेंट अब इतना धुंधला, इतना हल्का पड़ गया था कि अब उसपे बने चेहरे के भाव देख पाना,पढ़ पाना बहुत ही मुश्किल था| ये आगरा में रुथ का आख़िरी सन्डे था| इसके बाद कौन जाने दुबारा इस चर्च को अब देखना भी हो या नहीं| समय कितना बदल गया है उसने सोचा| इन्हीं वर्जिन मेरी की तस्वीर के साथ सेंट अंथोनी की एक छोटी तस्वीर हुआ करती थी, जो रूथ को आज नहीं दिखी| सेंट अंथोनी, पैट्रन ऑफ़ मिरेकिल्स, चमत्कारों के संत, खोयी हुई चीज़ों को वापस करने वाले संत, ख़ुशी के देवता| रूथ की भी तो खोई हुई चीज़ लौटाई थी इनने| उसने दुकान से सेंट अंथोनी की एक तस्वीर ख़रीदी और रिक्शे में बैठ गयी| किले की लम्बी दीवार के साये-साये चलता रिक्शा जब बिजली घर के लिए मुड़ा तो मानो जैसे उसके पुराने दिन लौट आये|

“ सुनो,बिजली घर पे अभी भी रामबाबू की दुकान है ??” उसने रिक्शे वाले से पूछा|

“है, बहुत भीड़ रहती है पर|”

“दो मिनट रोक लोगे वहाँ? एक प्लेट पूड़ी ले आना मेरे लिए|’उसने सोच में डूबे-डूबे ही कहा|

रिक्शेवाले ने उसे ऐसे देखा जैसे किसी आसमान से उतरी हो वो|

“हाऊ फ़ास्ट यू ईट विक्रम?” सोफ़ी ने विक्रम से पूछा|

“हम एयरफ़ोर्स वाले हैं एयरोप्लेन सी स्पीड है हमारी|” वो बोला|

ये उन दिनों की बात थी जब वो दोनों दोस्ती में विक्रम के नज़दीक और डियाज़ से दूर जा रहीं थी | ऐसे ही किसी एक दिन रूथ ने सोफ़ी से पूछा|

“ क्लार्क्स चलोगी सोफ़ी डियाज़ की परफॉरमेंस है ट्रम्पेट की|”

“नो, वो बोर करता है मुझे|”

“हाँ,ये तो है| विक्रम के साथ मज़ा आता है पर|” रूथ के मुँह से अचानक जैसे दिल की बात निकल गयी |

उस रात रूथ ने सेंट अंथोनी से जाने किस चमत्कार की प्रार्थना की| बचपन से उसका मन सेंट अन्थोनी के अनगिनत चमत्कारों की कहानियों से भरा पड़ा था| पर उसका सबसे पसंदीदा वो किस्सा था जिसमें एक अकेली लड़की को कैसे उसका केम्पेनियन मिला देते हैं सेंट अंथोनी| फिर एक दिन उसकी बात भी सुन ही ली उनने|

केंट की ख़ाली सुनसान सड़कों पे स्कूटर सीखते हुए एक दिन उसने विक्रम से अपने मन की बात कह दी|

“तुम आउट ऑफ़ कास्ट मैरिज करोगी?” सोफ़ी ने उससे पूछा|

“क्यों?क्या प्रॉब्लम है?आई लाइक हिम, ही लाइक्स मी|”

“रियली|”

रिक्शे के रुकने से उसका ध्यान टूटा तो उसने देखा कि सर्दी की शाम का सूरज बुझते- बुझते एक ज़रा से गोले में बदल गया था| कितनी जल्दी दिन डूब जाते हैं| जाने से पहले उसे अंकल विली से मिलना है| घर का एंटीक फर्नीचर बेचना है| विक्रम के कुछ पुराने दोस्तों के घर जा कर मिलना है| ऑल्विन के लिए क्रिसमस गिफ्ट्स लेने हैं| ऑल्विन और मॉंल्विन उसके और सोफ़ी दोनों के बच्चों के नाम मॉम ने ही रखे थे| कितनी मुश्किल से मॉम सोफ़ी को शादी के लिए तैयार कर पायी थीं| डियाज़ के चर्च में,होटल में ट्रम्पेट बजाने के जॉब से,उसकी सैलरी से सोफ़ी बिलकुल खुश नहीं थी| ये मॉम ने ही उसे बताया था|

“शी इस नॉट वैरी हैप्पी|”

“व्हाई?”

“हिज जॉब,हिज स्टेटस एंड हिज मनी इज़ नॉट अपीलिंग तो हर| शी वांटेड अ बॉय लाइक विक्रम|”

“चाहने से कुछ नहीं होता मॉम| अब उसे हाँ बोलना चाहिये मैरिज को ”

“यू डोंट नो रुथ शी लाइक्स विक्रम|”

रूथ का चेहरा एक सेकंड को बिलकुल कोरा हो गया और फिर उदास| ये पहली बार था जब धागे में बल पड़ा था| इतने दिन से जिस चीज़ को वो समझना चाह रही थी वो आज सामने थी| सोफ़ी का विक्रम के आस-पास रहना और विक्रम का उस पर अटेंशन|

“मुझे लगता है विक्रम के मन में सोफ़ी के लिए सॉफ्ट कार्नर बन रहा है | कैन दे चीट मी ऑन?” उसने मिसेज़ गोम्ज़ से पूछा|

“डोंट बी सिली हनी, वो तुम्हारा हसबेंड है,और सोफ़ी सिस्टर|”

पर रूथ जानती थी कि ये बादल ख़ाली नहीं लौटेंगे| वो अक्टूबर की सुहानी शाम थी| उसे याद है उसदिन एयरफोर्स डे था| उसने घर पर विक्रम और दोस्तों के लिए शाम को छोटी सी पार्टी रखी थी| मेहमानों से भरे घर में बस सोफ़ी और विक्रम ही गायब थे|

“इसे पकड़ो थोड़ी देर मैं ज़रा विक्रम को देखूं सब गेस्ट पूछ रहे हैं उसे|” रुथ ने ऑल्विन को गोद से उतार कर मिसेज़ गोम्ज़ को पकड़ाते कहा|

वो गई और कुछ ही सेकंड्स में वापस लौट आई |पूरी पार्टी में मिसेज़ गोम्ज़ ने उसे खामोश और परेशान देखा|अगली सुबह उसने उनसे कहा|

“मॉम आप सोफ़ी को वापस ले जाओ|”

न मिसेज़ गोम्ज़ ने उससे पूछा न ही उसने बताया कि क्या हुआ| कैसे बताती कि जब उसने दरवाज़ा खोला तो सोफ़ी के हाथ विक्रम के हाथ में और विक्रम के होंठ उसके माथे पर थे| पर मिसेज़ गोम्ज़ बिना कुछ कहे ही सब समझ गयीं| उसके बाद ये बाईस साल रुथ ने सोफ़ी से बिना मिले काटे और विक्रम ने गिल्ट और शर्म में| वो प्रेयर खत्म कर के सोने जा ही रही थी कि उसका फ़ोन बज गया|

“हेलो|”

“हेलो हनी|”

“हाउ आर यू मॉम?”

“ओके, बट लिटिल हेक्टिक हियर|”

“डियाज़ की तबियत कैसी है अब?”

“पहले से बेटर है| तुम अपना बताओ? वापस आने का दिन आ रहा है तुम्हारा|”

“हाँ परसों|”

“आओगी इधर?”

“मालूम नहीं|”

“रुथ एक बात कहूँ ?”

“हम्म्म्म”

“इतना स्टरबन होने से काम नहीं चलता| तुमने इतने साल यूँ भी चीज़ों के एक्ज़ेज़रेट कर के देखा है| कम बैक टू अस, कम बैक टू फॅमिली हनी| एक बात पूछू?”

“क्या?”

“व्हाई डिड यू फॉलो डबल स्टैंडर्ड्स ऑल लाइफ?”

“व्हाट स्टैंडर्ड्स मॉम?”

“जिस बात के लिए तुमने लाइफ लॉन्ग सोफ़ी को पनिश किया उस बात का आधा रेस्पोंसिबल तो विक्रम भी है| वो तुम्हारा हसबैंड है,तुम्हारे बेटे का फ़ादर है इस लिए उसे बेनिफिट ऑफ़ डाउट है रुथ| ये फ्लेक्सिबल एप्रोच सोफ़ी के वास्ते क्यूँ नहीं| तुमने कभी कंफ्र्न्ट किया विक्रम को| समझो हनी इतने साल तो लाइफ नहीं चलती जितने साल तुमने साइलेंस चलाया अपना| ट्राय टू कलेक्ट फॅमिली|

“गुड नाईट मॉम”,वो कुछ देर चुप रह कर बोली|

अगली सुबह रुथ ने घर में बिखरा हुआ सामान समेटना शुरू कर दिया था| वापसी के दिन पास आ रहे थे | डैडी का ये घर अब बिक गया है,अब इस शहर में लौट कर आना शायद ही कभी होगा| उसने सोचा और उसकी आँखें भर आयीं| उसने कॉफ़ी बनाने रखी और मिसेज़ गोम्ज़ को फ़ोन मिला दिया|

“मॉम सुनो मैंने चेक जमा कर दिया है कुछ दिन में मिल जायेगी मनी आपको|”

“तुमने अपने लिए कुछ नहीं रखा रुथ?”

“नहीं मुझे कोई नीड नहीं है| आपको अभी ज़रूरत पड़ेगी डियाज़ के लिये|पता नहीं सोफ़ी के पास इतनी सेविंग हो भी या नहीं |मैंने बस ब्रास का एक एंटीक वाज़ रख लिया है अपने लिये”

“कौन सा?”

“एक फिश शेप का है, डैडी त्रिची से लाये थे एक बार, याद है|”

“डोंट कीप दैट|”

“क्यों?”

“ब्रास इज़ नॉट अ गुड मेटल फॉर अवर फैमिली| उसी साल तुम्हारे डैडी की डेथ हुई थी रुथ| ब्रास की फिश पर सबसे पहले बिजली गिरती है स्काई से|”

“मेरे दिल की मछली पे तो कब की बिजली गिर पड़ी मॉम|”

“डोंट से लाइक दिस|”

“अच्छा!! छोड़ो ये सब| अब ये बताओ मॉल्विन की शर्ट का साइज़ क्या होगा? बस उसी का गिफ्ट समझ नहीं आ रहा मुझे| डियाज़ और सोफ़ी के लिए तो वॉच ले लूंगी |”

“आर यू कमिंग हनी ?

“यस,आई एम् कमिंग| अच्छा अब मैं फ़ोन रख रही हूँ मेरी कॉफ़ी भी बन गयी है| और पैसा मिल जाये तो बता देना मुझे |” कह कर उसने फ़ोन काट दिया|

“ओह! गॉड ,हार्ट इज़ अ ब्रास फिश|”

वो उठी, कमरे में एक कोने में खड़ी अटैची के पास ले जा कर उस कांसे की मछली को रख दिया| और अब कमरा कॉफ़ी की तेज ख़ुशबू से महक रहा था|

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