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दिल मछली कांसे की – भाग – ३

कोहरे में डूबी सुबह का सूरज अभी निकला भी नहीं था कि फ़ोन की घंटी बज पड़ी | उसने करवट ले घडी देखी सुबह के छ: बज रहे थे| इतनी सुबह किसका फ़ोन होगा| उसने अलसाई आवाज़ में कहा|

“हेलो”

“हेलो हनी|”

“कैसी हो मॉम? बहुत लो साउंड कर रही हो ”

“ हाँ, हॉस्पिटल से फ़ोन कर रही हूँ| बंगलुरु से|”

“बंगलुरु से,हॉस्पिटल से??”

“हाँ डियाज़ एडमिट है| साल भर से किडनी प्रॉब्लम देने लगी थी उसकी| अब तक तो मेरे ही हॉस्पिटल में था पर अब यहाँ रेफ़र कर दिया है| इतना अल्कोहल शुरू कर दिया था कि क्या बताऊँ रूथ| सोफ़ी का टेंशन से बहुत बुरा हाल है| उस पर मॉल्विन भी अभी तक नहीं आया हॉस्टल से| तुम सुन रही हो?”

“हाँ,बोलती रहो सुन रहीं हूँ|”

“तुम आओगी डियाज़ को देखने?”

“मुश्किल है, शायद आना नहीं हो पाये|”

“रुथ हम तुम्हारे शहर में हैं|”

“ठीक है मॉम लीव इट|”

“विक्रम कब आ रहा है?”

“क्रिसमस से पहले आने की कह रहा था|”

“और बच्चे?”

“वो भी तभी तक आयेंगे|”

“घर का कुछ फाइनल हुआ?”

“जल्दी हो जायेगा, ब्रोकर आया था देखने|”

“चलो बाय|” कह कर उसने फ़ोन काट दिया|

तो मॉम ये घर डियाज़ के इलाज के लिए बेच रहीं हैं| क्या सोफ़ी के पास उसके इलाज लायक पैसा भी नहीं है| गॉड ओनली नोज़ | उसने सोचा और रजाई दुबारा सर तक खींच ली| सोने की नाकाम कोशिश में वापस पुराने दिनों की तरफ़ लौट गयी|

सोफ़ी-रूथ आज घर को साफ़ रखना| चर्च चली जाना और लौट कर डिनर तैयार रखना| शाम को मैंने गेस्ट इन्वाइट  किये हैं| मिसेज़ गोम्ज़ ने घर से बाहर निकलते हुए कहा|

मॉम रुको-रुको-रुको सोफ़ी ने दौड़ते हुए जा कर उन्हें पकड़ लिया|

“डिनर वी कांट कुक, हमें कुछ बनाना ही नहीं आता|”

“शटअप सोफ़ी, तुम लोग कॉलेज में हो और तुम्हें अंडा तक बनाना मुश्किल लगता है| ओह गॉड! अब मैं ड्यूटी पर जाऊं या खाना देखूं| रूथ से कहना केक तैयार रखे और तुम स्टयू एंड सूप तैयार रखना|और कहीं घूमने मत निकल जाना| रूथ से कहना वाइट फ्रॉक पहने|”

सोफ़ी जब वापस लौटी तो रूथ सोफे पे लेटे-लेटे संतरा छील रही थी|

“व्हाट हैपन?”

“नथिंग, तुम को केक तैयार रखना है, मुझे स्टयू और सूप|”

“कौन आ रहा है?”

“डोंट नो| रूथ चल डियाज़ के घर चलते हैं| उसने नया स्कूटर लिया है|चला के आयेंगे!!”

“छोड़ न, सोते हैं , बहुत दिन बाद तो मॉम की आफ्टरनून शिफ्ट लगी है|”

उस शाम गार्डन में लगे लिली कुछ ज्यादा ही खिल थे| सफ़ेद क्रोशिया की फ्रॉक में रूथ कुछ ज्यादा ही सुंदर लग रही थी|

“ रूथ मेरा ब्लू फ्रॉक क्लीन नहीं है| मैं भी वाइट वाला ही पहन लूँ?”

“पहन लो, वैसे अलग-अलग पहने को क्यों बोल के गयी हैं?”

“हमें पहचानने में आसानी होगी उन्हें|” कह कर सोफ़ी हंस पड़ी|

“मॉम कौन आ रहा है डिनर पर?” रूथ ने पूछा|

“ मेरी फ्रेंड मिसेज़ सेठी और उनका बेटा|”

“ ओह, क्यों?”

“उनके बेटा का एयर फ़ोर्स में सलेक्शन हुआ है | डेट्स व्हाई|

डैडी की डेथ के बाद ये पहला गेस्ट है जो इस घर में आया है| सोफ़ी ने फुसफुसा के रूथ के कान में कहा| रूथ ने जाने सोफ़ी की बात सुनी भी या नहीं| सोफ़ी ने देखा रूथ कनखियों से विक्रम को देख रही थी| सोफ़ी ने पहले मेहमान को देखा और फिर पलट के रूथ के चेहरे की तरफ़ देखा,रूथ की आँखें सामने बैठे विक्रम से हठ ही नहीं रही थीं|

“ डोंट स्टेयर हिम,बेचारा डर जायेगा| चल किचन में चल|” सोफ़ी ने उसे कोहनी मारते हुए कहा|

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