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दिल मछली कांसे की – भाग – १

वो नवम्बर का आखिरी इतवार था, ठंड में लिपटा दिसम्बर की ओर बढ़ता हुआ| इवनिंग मास को खत्म हुए अभी पांच मिनट से कम ही वक़्त हुआ था पर भीड़ मानो एकदम ही कहीं गायब हो गयी थी| रूथ ने कंधे पे पड़ा शॉल खोल के ओढा और रोज़री पर्स के अंदर रख दी| वो चर्च का लॉन पार कर के बाहर निकल ही रही थी कि किसी ने कंधे पर हाथ रख दिया| उसने पलट कर देखा उसी की उम्र की एक औरत सामने खड़ी थी,पर वो पहचान नहीं पायी|

“सोफ़ी गोम्ज़ ?? मिसेज़ गोम्ज़ की बेटी|”

“यस, आई एम डॉटर ऑफ़ मिसेज़ गोमेज़ बट नॉट सोफ़ी| आई एम रूथ, सॉरी पर मैंने पहचाना नहीं आपको|

“मैं एलीना,डफ़र कहीं की|”

“ओह माय गॉश!” कह के रूथ उसके गले से झूल गयी|

“सॉरी मैं सोफ़ी समझी थी| स्टिल यू बोथ लुक सेम|

रूथ ने कुछ नहीं कहा वो चुप रही|

“तुम आगरा कब आयीं?”

“वीक हुआ, मॉम का घर सेल करने के लिए आई हूँ|”

“चलो बढ़िया है, कॉफ़ी पीने चलें?”

“इस टाइम एलीना? फिर किसी दिन चल लें, अभी तो हूँ दस-बारह दिन और मैं|”

“पर मैं कल गोवा वापस जा रही हूँ|”

“ठीक है,पर कहाँ?”

“वहीं राजामंडी,अपना पुराना अड्डा, विली कॉफ़ी हाउस|”

“वो है अबतक ??”

“हाँ भई|”

“चल फिर, वो मानो एक बार फिर वही पुरानी रूथ बन गयी थी|”

बाज़ार के एक कोने में विली कॉफ़ी हाउस अब भी वैसे ही खड़ा हुआ था जैसे चौबीस साल पहले, बस ज़रा सा छोटा हो गया था| वो दोनों अंदर घुस के दायें कोने में लगी कुर्सियां पर जा कर बैठ गयीं|

“देखा रूथ आज भी हमें हमारा फेवरेट कार्नर मिल गया|”

“हाँ, लकी हैं हम, इंटीरियर बदल गया है न यहाँ का|” रूथ ने पर्स टांगते हुए कहा|

“काफी कुछ, मैं जब पिछली बार आई थी तो यहाँ काम चल रहा था|”

“मैं पूरे चौबीस साल बाद आई हूँ आज यहाँ|”

“स्ट्रेंज|”

अचानक से रूथ उठी और पास से गुज़रते एक आदमी की बाँह पकड़ ली|

“अंकल विली पहचाना मुझे?”

“ओह माय! माय चाइल्ड सोफ़ी,इतना साल बाद|”

एलीना ने देखा रूथ का गोरा उजला चेहरा एक सेकंड को काला पड़ गया|

“अंकल विली मैं रूथ हूँ, सोफ़ी की बहन|”

“ओह! सॉरी माय चाइल्ड ,बूढा हो गया है तुम्हारा अंकल ,पहचान ही नहीं पाया| रुको तुमको कॉफ़ी हाउस की लेटेस्ट कॉफ़ी पिलाता हूँ ,मोका कॉफ़ी|

विली के जाने के बाद एलीना ने उससे कहा|

“पिछले तीन साल से सबको यही पिला रहे हैं और अब तक लेटेस्ट-लेटेस्ट कहते रहते हैं|”

“मेरे लिए तो सब नया ही है अब यहाँ| कितना डेवलपमेंट मिस किया मैंने इस शहर का| कितना फैल गया है अब ये शहर|”

“सच !याद है रूथ कैसे हम, मैं,तुम,एला,सोफ़ी और डियाज़ केंट में हर शाम साइकिल ले कर निकला करते थे| तब सब कितना खाली-खाली लगता था और अब देखो|”

“अब शहर भर जाते हैं और लाइफ ख़ाली हो जाती है|” रूथ ने कॉफ़ी पीते हुए कहा|

हमारे पूरे ग्रुप में डियाज़ ही एक लड़का था| अच्छा याद है कैसे उसकी मॉम बात-बात पर खुडाया –खुडाया कहती रहती थीं| कोई न्यूज़ उनकी?”

इतनी देर में जा कर अब रूथ के चेहरे पर मुस्कान आयी|

“ हाँ! ही इज़ माय ब्रदर इन लॉ नाउ |”

“सच!! सोफ़ी गोट मैरिड टू डियाज़|”

“हूँ !!”

“रूथ क्या बात है? सोफ़ी के नाम से तुम बड़ा आक्वर्ड हो जा रही हो?”

“नहीं ऐसा तो कुछ नहीं है|”

“कुछ हुआ है क्या तुम्हारे बीच?”

“मैं तो कई सालों से मिली ही नहीं उससे| ऑल मोस्ट ट्वेंटी टू इयर्स|”

“व्हाट sssssssssss? यू आर ट्विन्स एंड आइड़ेंटिकल ट्विन्स| यू वर सो क्लोज्ड रूथ,फिर क्या हुआ? आई स्टिल रिमेम्बर जब एक्साम्स होते थे तो आधा सिलेबस तुम याद करती थीं आधा सोफ़ी| लोग तुम को सोफ़ी और सोफ़ी को तुम समझ कंफ्यूज़ रहते थे, मैं ख़ुद आज तुम्हें सोफ़ी नहीं समझ बैठी थी|”

“तुम क्या सभी यही समझते हैं| मेरी पूरी आइडेंटिटी ही खत्म कर दी इस चीज़ ने एलीना|”

अब चलें एलीना दस बजने आया, उसने कुर्सी से उठते हुए कहा|

“अच्छा अंकल विली बाय,नेक्स्ट वीक आऊंगी|”

“तुम कब जा रही हो?”

“दिसम्बर सेवेनटीन |”

“क्या क्रिसमस से पहले ही चली जाओगी?”

“यस अंकल|”

“मिसेज़ गोम्ज़ को मेरा हेलो और सोफ़ी को मेरा लव बोलना|”

“श्योर|”

वो एलीना को कैफ़े में ही छोड़ बाहर आ गयी|

“ऑटो,केंट चलोगे ?”, उसने बाहर खड़े ऑटो से पूछा|

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