Hindi Love Poem Poetry

दिल एक दर्पण

दिल एक दर्पण ही तो है

प्यार से संभालना पड़ता है

वरना तो यों ही टूट जाता है

दिल एक दर्पण ही तो है

कितने भी छींटे दामन पर हों इसके

प्यार से साफ करो तो सब छूट जाता है

नफ़रत का पड़े एक छींटा भी इस पर

लाख पोंछो अपना निशाँ छोड़ जाता है

दिल एक दर्पण ही तो है

प्यार से संभालना पड़ता है

वरना तो यों ही टूट जाता है

दिल एक दर्पण ही तो है

जितनों ने अब तक संभाला इसे

प्यार से ही अपने, संभाला इसे

जब भी किसी ने इसमें झाँक कर है देखा

जैसा वो था, खुद को बिल्कुल वैसा ही देखा

जब तक दर्पण है सलामत

एक ही तस्वीर को दिखाता है

अगर टूट गया ये दर्पण

तो अनेकों तस्वीरें दिखाता है

दिल एक दर्पण ही तो है

प्यार से संभालना पड़ता है

वरना तो यों ही टूट जाता है

दिल एक दर्पण ही तो है

सलामत रखो प्यार से दिलों को तुम

तो यह जहाँ प्यार का चमन बन जायेगा

अगर फेंका एक टुकड़ा भी नफ़रत का

तो ये जहाँ भी टुकड़ों में बिखर जायेगा

क्योंकि यह दिल एक दर्पण ही तो है

प्यार से संभालना पड़ता है

वरना तो यह टुकड़ों में बिखर जायेगा

टुकड़ों में बिखर जायेगा ————–

————–

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