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दिल्ली की राजनीति

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source link चुनाव और चुनाव चिन्ह 

order accutane over the counter जब जब किसी लोकतांत्रिक देश में चुनाव कराए जाते है तब तब चुनाव चिन्हों की उपयोगिता बढ़ जाती है आज 12 . 01 . 2015 को भारतीय चुनाव आयोेग ने दिल्ली विधानसभा चुनाव 2015 की घोषणा कर दी जिसके साथ ही दिल्ली में दो राष्ट्रीय और एक क्षेत्रीय राजनैतिक पार्टी और उनके चुनाव चिन्हों की उपयोगिता भी बढ गई है 

http://oceanadesigns.net/gallery/ आओ जाने चुनाव चिन्हों की उपयोगिता 

 जो शरीर का एक महत्त्वपूर्ण अंग है जो सभी प्रकार के काम करने  के लिए जाना जाता है 

 जो  सफाई  का एक जाना माना नाम है और अक्सर सफाई के ही काम आता है

जो एक  प्राकृतिक फूल है और अक्सर पूजा के काम आता है

 

जब जब दिल्ली में रहा दिल्ली के लोगों के लिए काम करता रहा साथ साथ बहुत कुछ लोगों  को देता और लेता भी रहा फिर भी लोगों ने उसे पिछले चुनावों में नकार दिया

 नया होते हुए भी पहली बार दिल्ली की सत्ता में आया और भ्रष्टाचार की सफाई में जुट गया पर उसे समय बहुत कम मिला सफाई के साथ काम करने मे अक्सर समय अधिक ही लगता है उसका एक तिनका बिखरा जिसने उसके साथ सफाई करने से मना कर दिया पर तभी अचानक दो अन्य तिनके  और 8 लोगो के   बिना किसी शर्त के उसके समर्थन के लिए साथ हो गए परन्तु उन्हों ने भी केवल   को तिनका – तिनका करना चाहा जो वो न कर सके   की गांठ उस समय बहुत मजबूत थी परन्तु फिर भी   को केवल 49 दिनों का ही समय मिला और वो खुद ब खुद अपने भ्रष्टाचार के सफाई अभियान को छोड़ दिल्ली की सत्ता से बाहर हो गया ओर इसे अपनी गलती भी माना

 कहता रहा की वो दिल्ली में खिलना चाहता है परन्तु वो किसी के  में  आना नहीं चाहता था न ही वो किसी   के तिनके को अपने साथ जोड़ना चाहता था पता था कि बहुत बदनामी होगी लेकिन अब जब दुबारा इन चुनाव चिन्हों की जरुरत सामने आई है और इनकी उपयोगिता फिर बढ़ गई है ऐसे में  के  कई तिनके बिखर रहे है कोई  का साथ दे रहा है  तो  कोई  की आराधना कर रहा है ,  कोई  का साथ छोड़  में   तो   कोई  पकड़ रहा है ,  और कोई  की आराधना छोड़ किसी  के साथ  हो गया या किसी   का तिनका बन गया  है

ऐसे में  अपने किए कामो की दुहाई देता नजर आ रहा है पिछले 15 वर्षो के दिनों की याद दिला रहा है और इस बात से भी गुरेज नहीं की जरुरत पड़ी तो  नहीं   तो   में  ले ही लेगा  को गुमान है की  ने तो हार  मान ली है और  भी डरा हुआ है

 अपने सबसे महत्वपूर्ण अभियान “भ्रष्टाचार की सफाई ” का प्रमुखता से प्रचार करता नज़र आ रहा है और दिल्ली वालो को महँगाई की मार से बचाने के लिये भरपुर सरकारी सहायता देने का वादा कर रहा है साथ ही दिल्ली वालो के लिए  हर बड़ी राजनैतिक ताकत से लड़ने को तैयार है  की तो उसने चिन्ता छोड़ दी अब  को दिल्ली के लिए खतरा बता रहा है

इस बीच  ने अपने खिलने का पक्का इरादा कर रखा है जो अभी सम्पूर्ण देश की सत्ता के साथ साथ दिल्ली की भी आंशिक सत्ता सम्भाले हुए है कच्चे को पक्के करने का वादा , गली मोहल्ले तक भ्रष्टाचार दूर करना , बची खुची किसानों की ज़मीन पर स्मार्ट सिटी ,और न जाने क्या क्या वादे करता जा रहा है ,कौन क्या कर सकता है और किसको किस में  महारत हासिल है यह भी जनता को बताना नहीं भुलता, विरोधियो को आराजक बताने में भी उसे कोई गुरेज नहीं हैं 

ऐसे  में आप स्वयं सोचें की आप के लिए कौन सा चुनाव चिन्ह उपयोगी है केवल निर्दलीय हो कर सोचें ओर फिर चुने

इस बीच इस सार्वजनिक सच को भी जाने की हमारे देश के प्रधानमंत्री किस चिन्ह को अधिक उपयोगी मानते है   जरा ध्यान से देखिए

इरादा  का  और अपने  से इन्होने भी  को ही पकड़ा हुआ है

दिल्ली की वास्तविक स्थिती  भी ऐसी है आप का इरादा बेशक  का हो  से काम तो करना ही पड़ेगा और हर प्रकार की सफाई के लिये  की उपयोगिता को भी कम नही आंका जा सकता

                                   

                                                                                             निर्दलीय रवि

नोट :- यह ब्लॉगर के केवल अपने विचार है किसी राजनैतिक पार्टी या व्यक्ति से इसका कोई संबंध नहीं है न ही इसे किसी अन्य अर्थ में पढ़ा जाए

 

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