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Hindi Love Poem Poetry

तुझे मेरी कसम है

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दिल मेरा सागर चांद तेरा मन है

दिल मेरा सोचे कैसे होगा मिलन है

तू ही बता दे तुझे मेरी कसम है ।

 

लिखता हूँ खत तुझे लिख नहीं पाऊँ

फूटे हैं नैन मेरे आँसू बहाऊं

गिर गया कागज छूटी कलम है

तू ही बता दे मुझे कैसी यह लिखन है ।

दिल मेरा सागर चांद तेरा मन है

दिल मेरा सोचे कैसे होगा मिलन है

तू ही बता दे तुझे मेरी कसम है ।

 

कैसे मैं भेजू अपने दिल का संदेशवा

आरी पवन आजा बनजा मेरा मितवा

तू ही बता दे कैसे करे ना कोई शिकवा

यही मन में कसक और दिल में चुभन है ।

दिल मेरा सागर चांद तेरा मन है

दिल मेरा सोचे कैसे होगा मिलन है

तू ही बता दे तुझे मेरी कसम है ।

 

दिल मेरा रोये, फूटी अश्रुधारा

भीगा है खत तेरा गल गया सारा

पवन सुखा दे तू ही दे दे सहारा

तन मेरा कांपे कैसी ये कंपन है ।

दिल मेरा सागर चांद तेरा मन है

दिल मेरा सोचे कैसे होगा मिलन है

तू ही बता दे तुझे मेरी कसम है ।

 

खिलता न फूल कोई ऐसा ये चमन है

कांटे ही कांटे इसमें ना कोई सुमन है

खुशियां न पाती कोई कैसा ये अमन है

जिन्दा न अरमां कोई कैसा ये जीवन है ।

दिल मेरा सागर चांद तेरा मन है

दिल मेरा सोचे कैसे होगा मिलन है

तू ही बता दे तुझे मेरी कसम है ।

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