2017 Culture Education Globalisation Health Legends Life Medicine Optimism Productivity Story Technology World

डॉ. हर गोविन्द खोराना का अध्बुध जीवन!

FacebookTwitterGoogleLinkedIn


डॉ. हरगोबिंद खोराना जैव प्रौद्योगिकी और आनुवांशिक इंजीनियरिंग की दुनिया में मशहूर नाम हैं। उनके काम से आज हम यह समझ पाएं हैं की जीव-जंतु को आकार और अस्तित्व देने वाले डीएनए काम कैसे करते हैं। कंप्यूटर कोड की तरह डीएनए भी करोड़ों कोड से बना हुआ है। डॉ. हरगोबिंद खोराना का जन्म रायपुर गाँव, पंजाब, ब्रिटिश इंडिया (अब पाकिस्तान) मे 9 जनवरी 1922 को हुआ था। बचपन से ही वे विज्ञान की दुनिया से प्रभावित थे। उन्होंने अपने प्राथमिक शिक्षा डी.ए.वी, मुल्तान से पूरी की और पंजाब विश्वविद्यालय से विज्ञान मे स्नातक और स्नातकोत्तर हासिल की।

सरकार की तरफ से मिली छात्रवृत्ति से उन्होंने लिवरपूल विश्वविद्यालय से अपने डॉक्टरेट की पढाई की। ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय और विस्कॉन्सिन विश्वविद्यालय जैसे विश्व-प्रसिद्ध स्थानों मे उन्होंने शोध कार्य किया और कुछ समय तक छात्रों को पढाया। आखिरकार उन्होंने मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) मे प्राध्यापक का पद संभाला। अब उनके काम पर थोड़ा प्रकाश डालते हैं;

  • जबकि वैज्ञानिक जेम्स वाटसन और फ्रांसिस क्रिक को डीएनए की डबल हेलिक्स संरचना की खोज का श्रेय दिया जाता है, डॉ. खोराना ने पता लगाया कि डीएनए में मौजूद आनुवंशिक कोड प्रोटीन को कैसे बढ़ा देता है। यह प्रोटीन शरीर बनाने वाली कोशिकाओं का निर्माण करता है। 1968 मे उन्हें इस खोज के लिए नोबेल पुरस्कार से भी नवाज़ा गया था।
  • डॉ. खोराना ने अपनी प्रयोगशाला में डीएनए के विभिन्न टुकड़ों को काटने और चिपकाने की प्रक्रिया की खोज करने के साथ कृत्रिम    अथवा सिंथेटिक जीन बनाने में भी कामयाबी हासिल की थी। इस तकनीक ने बाद में पोलीमरेज़ चेन रिएक्शन (पीसीआर) को जन्म दिया जिसका इस्तेमाल आज दुनिया भर के लैब और संस्थान मे शोध करने वाले विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, पुलिस कर्मी और छात्र इस्तेमाल कर रहे हैं।
  • डॉ. खोराना की खोज से आज हम प्राणियों के अंतर्गत फैली हुई बीमारियों को पूर्ण रूप से ख़तम करने के काफी नज़दीक हैं। कंप्यूटर कोड की तरह जननिक कोड को भी आज प्रयोगशालाओं मे बनाया जा रहा है। पौधों, फलों और सब्जियों के डीएनए परिवर्तन से अपेक्षित नतीजे मिले हैं। कुछ सालों मे यदि आप चाहें तो अपने या अपने बच्चे के अन्दर मनपसंद कोड डलवा सकते हैं जो की आपके डीएनए के ढाँचे को बदलकर आपको जायदा स्फूर्ति, ताकत, जोश या बुध्हिमत्ता जैसी खूबियाँ प्रदान कर सकता है। 
  • डॉ. खोराना के काम ने आधुनिक डीएनए फिंगरप्रिंटिंग प्रक्रिया को भी जन्म दिया है। यह प्रक्रिया, जो आज सबसे सटीक आपराधिक पहचान परीक्षणों में से एक है, इसका इस्तेमाल दुनिया भर के कानून प्रवर्तन एजेंसियों में किया जाता है।

डॉ. खोराना अपनी कड़ी मेहनत और लगन के लिए प्रसिद्ध थे। अपनी तकरीबन 50 साल की सेवा मे उन्होंने बहुत ही कम बार छुट्टी ली , ऐसा उनके सहपाठियों का मानना है। ऐसे महान शख्स की कहानी और उपलब्धि हर भारतीय के लिए गर्व की बात है। आशा करते हैं की इस लेख के माध्यम से कई और डॉ. खोराना भारत का नाम ऊँचा करें। 

Leave a Reply


Your email address will not be published. Required fields are marked *