भारतीय डाक सेवा

डाकिया डाक लाया !

FacebookTwitterGoogleLinkedIn


डाकिया डाक लाया! डाकिया डाक लाया! राजेश खन्ना की मशहूर फिल्म ‘पलकों की छाओं मे’ से यह गाना आज भी मन को उसी तरह लुभाता है जैसे की यह चालीस साल पहले करता था। ‘बॉर्डर’ फिल्म मे मशहूर गाना ‘संदेसे आते हैं’ मे भी डाकिये को एक एहम भूमिका दी गई थी। मोबाइल फ़ोन, इ-मेल और इंटरनेट को दुनिया मे आये हुए केवल 30 से 40 साल हुए हैं। लेकिन डाक का इतिहास 100 साल से भी ज्यादा पुराना है। आज भी हाथ से लिखी गई चिट्ठी या ख़त का अंदाज़ कुछ और ही है। आज भी जब मेरे कुछ जिगरी यार मुझे चिठ्ठी लिखते हैं, तो उस चिट्ठी को पढ़ते वक़्त मानो वो मेरे सामने खुद अपनी जुबां से अपने मन की बात बयां कर रहे हों। वाकई, डाक सेवा खासकर भारतीय डाक सेवा ने ना सिर्फ भारत को जोड़ा है, इसके साथ इसने लोगों के दिलों को भी जोड़ा है। विश्व डाक दिवस के अवसर पर भारतीय डाक से जुड़ी कुछ एहम बातें से सभी को वाकिफ होना चाहिए। गौरतलब है, कि इसी दिन पर 143 साले पहले सार्वभौमिक डाक यूनियन (UPU) का निर्माण हुआ था।

भारत पोस्ट ब्रिटिश साम्राज्य की ओर से भारत को एक भेंट थी। हालांकि ब्रिटिश अधिकारियों ने डाक-सेवा का आविष्कार अपने प्रशासनिक और सरकारी काम काज के लिए किया था, इस सुविधा का इस्तेमाल धीरे-धीरे पूरे देश मे होने लगा। कश्मीर से कन्याकुमारी और असम से गुजरात तक कई लोग चिट्ठी के द्वारा बातें किया करते थे और आज भी करते हैं। ट्रेन सेवा, टेलीग्राम और टेलीफोन के साथ डाक सेवा भी भारत के इतिहास का एक अटूट आविष्कार बन गया था। 1 अप्रैल 1854 को ‘भारतीय डाक सेवा’ का निर्माण हुआ और दस साल के अन्दर 900 डाक घरों का भी निर्माण किया गया जो सालाना 45 करोड़ चिट्ठियों और 40 लाख पत्रिकायों का लेन-देन किया करते थे। बाद मे ब्रिटिश साम्राज्य UPU का सदस्य भी बना। UPU के आ जाने से भारतीय डाक सेवा को नई दिशा और राहत मिली। भारतीय डाक सेवा के साथ UPU पर भी हमे गौर फरमाना चाहिए।

UPU के निर्माण से पहले यदि किसी एक देश को किसी दुसरे देश मे चिट्ठी भेजनी होती थी, तो दोनों देश के बीच मे लम्बी-चौड़ी समझौता होती थी। डाक दर का मूल्य और कुशल एवं शीघ्र वितरण के तौर तरीकों को लेकर कई बार दो देश आपसी मुठभेड़ मे शरीक हो जाते थे। इसी को मद्दे नज़र रखते अमेरिकी प्रशासन और जर्मन डाक मंत्री हाइनरिक वौन स्टेफान ने 9 अक्टूबर 1874 को UPU का निर्माण किया। UPU ने एक ज़रुरी सत्र मे सदस्य देशों के सामने यह ऐलान किया कि,” चिट्ठी पर लगने वाले दर पूरी दुनिया मे एक सामान होने चाहिए, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय चिट्ठियों के प्रति एक जैसा सलूक किया जाना चाहिए और अंतर्राष्टीय डाक के लिए दर स्पष्ट और किफायती होने चाहिए।” UPU के इन कानूनों से भारतीय डाक सेवा को भी काफी मदद मिली। 1945 मे जब संयुक्त राष्ट्र  (UN) का निर्माण हुआ तब UPU उसका एक विशेष अंग बना।

2017 मे UPU के सदस्य सूचि मे दुनिया के सभी देश शामिल हैं। यह एक विस्तृत और प्रभावशाली संस्थान बन चुकी है जिसने डाक सेवा के पेशे को पूरी तरह बदल डाला है। आधुनिकता के इस युग मे भारतीय डाक भी पीछे नहीं है। आज भारतीय डाक देश मे 1.5 लाख से भी ज्यादा डाक घर चलाता है। शायद ही ऐसा कोई गाँव, क़स्बा या शहर आपको मिले जिसका अपना डाक घर ना हो। 2 अरब डॉलर से भी ज्यादा की कमाई करने वाला संस्थान आज इन्टरनेट और मानव शक्तियों के बल पर कईओं की ज़िन्दगी को एक नई दिशा दे रहा। हाँ, सफलता के मार्ग मे दिक्कतें बहुत हैं लेकिन हम यह विश्वास के साथ कह सकते हैं कि भारतीय डाक प्रगतिशील भारत के सपने को पूरा करने मे तत्पर है।

 

 

Leave a Reply


Your email address will not be published. Required fields are marked *