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जिस देश में खिलती है सुबहा

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जिस देश में खिलती है सुबहा,

जिस देश में रंगीं शाम ढले,

जिस देश के बागों में कलियाँ ,

हंसतीं शबनम की बूँद तले,

उस देश के हम वाशिंदे हैं I

जिस देश की नदियाँ कहती हैं,

इंसान की हिम्मत का किस्सा I

जिस देश के मैदानों ने सुनी,

इंसान की ताकत की गीता I

हम रिंद हैं उस मैखाने के,

जिसकी मदिरा ये जग पीता,

देकर के अमन का पैमाना,

इसके साकी ने जग जीता I

है फक्र हमें इस गुलशन पर,

इसके फूलों में प्यार बसे,

जिस देश में खिलती हो सुबहा,

जिस देश में रंगीं शाम ढले I

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