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जाने कैसा मेरा आइना हो गया

जाने कैसा मेरा आइना हो गया I

मैं यहीं था अभी अब कहाँ खो गया I

जिनसे देखा था मैंने ये रंगीं जहाँ,

अब उन आखों का पानी कहाँ हो गया I

वो शरीफों की इज्ज़त कहाँ खो गयी,

ये शराफत के मानी को क्या हो गया I

वो जो दुनिया हंसी थी कहाँ हो गयी,

ये जो मैं नौजवां था कहाँ हो गया I

देखता हूँ जिसे बोलता है मगर,

गुफ्तगू का करीना कहाँ हो गया I

जाने कैसा मेरा ………

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