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चुश्की एक शराब की

देखते ही देखते क्या बात बनी कमाल की

ला गयी मस्ती मुझे चुश्की एक शराब की

गीत मैं गाने लगा

मदहोश मुझे छाने लगा

छा गयीं रंग रलियाँ, मेरे रग – रग में

कि रुक नहीं पाते पग, मेरे एक पग में

करूँ क्या तारीफ उसके अजीबो जवाब की

देखते ही देखते क्या बात बनी कमाल की

ला गयी मस्ती मुझे चुश्की एक शराब की

देखा न था तेरा, जब तक मैनें सपना

लगता न था जग में कोई अपना

यह क्या मुझे सैदा हुआ

क्या ‘किन्थ’ तुझे पैदा हुआ

नहीं दोस्त, यह बात नहीं भुलाव की

देखते ही देखते क्या बात बनी कमाल की

ला गयी मस्ती मुझे चुश्की एक शराब की

छायी हैं मेरे तन में तनहाईयां

आयी हैं जब जब तेरी परछाईयाँ

देखने लगा हूँ मैं स्वप्न सुनहरे

छोड़ दे दुनिया मुझे पर तुम तो हो मेरे

कल्पना करता हूँ मैं ऐसे ख्वाब की

देखते ही देखते क्या बात बनी कमाल की

ला गयी मस्ती मुझे चुश्की एक शराब की

पर यह क्या अचानक मुझको हुआ

मैं पीता था शराब को फिर शराब मुझे पीने लगी

आज आकर मैं बैठ गया मरने की कगार पर

मैने ही अपने बीबी, बच्चों की जिंदगी खराब की

कोई भी फिर ऐसा न करना जो मैने किया

शराब लेकर हाथ में,न बुझाना घर का दिया

देखते ही देखते क्या बात बन गयी सवाल की

कर गयी जिंदगी बर्बाद मेरी, चुश्की एक शराब की |

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