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खाना वाकई मे खज़ाना है!

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बचपन मे जब मैं खाना नष्ट करता था, तो मेरे परिवार वाले मुझे डांटते और कहते कि,“अन्न नष्ट करने का मतलब है किसी दुसरे को खाने से वांछित करना”। चूँकि मैं छोटा था, मुझे इसका मतलब समझ नहीं आया। जब मैं थोड़ा बड़ा हुआ और दुनिया दारी की मुझे समझ होने लगी, तब मुझे इस कथन का तात्पर्य पूर्ण रूप से समझ मे आया। अब मेरी कोशिश हमेशा से यही रहती है की यदि मैंने अपनी प्लेट या थाली मे खाना लिया है तो उसे पूरा ख़तम करूं।

आज ‘अन्तराष्ट्रीय अन्न दिवस’ है। हालांकि, खाना नष्ट ना करने की आदत हमारे रोज़मर्रा के आचरण मे झलकनी चाहिए, फिर भी एक दिन जहां पर हम वास्तविकता से रोबरू हों ज़रुरी है। आज भी तकरीबन 800 करोड़ लोग दुनियाभर मे भूखे सोते हैं। संयुक्त राष्ट्र के ‘विश्व अन्न योजना’ (WFP) के आंकड़ों के मुताबिक़ 9 व्यक्तियों मे से 1 व्यक्ति किसी भी वक़्त भूखा रहता है। हैरानी की बात यह है कि यह समस्या खाने की कमी से ज्यादा खाने के नष्ट होने के कारण हो रही है। हाल ही मे प्रकाशित ‘ग्लोबल हंगर इंडेक्स’ के मुताबिक भारत 120 देशों की सूची मे 100 वे स्थान पर है। खाना नष्ट करने से ना सिर्फ एक इंसान भूखा सोता है, इससे खाने के उत्पादन के समय इस्तेमाल होने वाली पानी, मेहनत और इंधन भी नष्ट होता है जिससे हर साल केंद्रीय सरकार को 60 हज़ार करोड़ से भी ज्यादा का नुक्सान होता है। इस समस्या को मद्दे नज़र रखते यदि हम निम्नलिखित सुझाव पर अमल करें तो काफी हद तक अपने खाने को नष्ट होने से रोक सकते हैं;

  1. किसी भी आयोजन जैसे कि शादी, सालगिराह, जम्नदिन या पार्टी के वक़्त, यदि आप देख रहे हैं कि ज़रुरत से ज्यादा खाना बच गया है, तो खाने को फ्रिज मे रखें या फिर किसी सरकारी या सामाजिक संस्थान को दान करें। भाग्यवश, कई नेक और जागरूक लोगों ने ऐसे संस्थायों का निर्माण किया है जो कि बचे ही खाने को भूखे या ज़रुरत मंद लोगों तक पहुंचाते हैं। दिल्ली स्थित ‘फीडिंग इंडिया’ एवं ‘रोबिन हुड आर्मी’, मुंबई स्थित दब्बवालाओं द्वारा आयोजित ‘रोटी बैंक’’, गुढ़गाँव स्थित ‘मेरा परिवार’, जयपुर स्थित ‘अन्नक्षेत्र’, त्रिवेंद्रम स्थित ‘सांथीमन्दिरम’ और बेंगलुरु स्थित ‘आर. बी शिवकुमार’ इस कार्य मे जुटे हुए हैं। किसी भूखे को खिलाने को अवसर को ना छोडें। विश्वास करें, अच्छा लगता है।
  2. घर का सामान खरीदते वक़्त ऐसे चीज़ें लें जो की घर के सभी सदस्य खाएं। एक विस्तृत खाद्य सूची इस समस्या का समाधान है। जितना आप या अपने परिवार वाले खाते हैं, उतना ही सामान खरीदें। यदि आप सिर्फ 5 गाजर खरीदना चाहते हैं तो उतना ही लें। यदि आपदा स्थिति या कोई अन्य कारण से आपको ज्यादा खाद्य सामग्री खरीदना पड़े, तो कोशिश करें की खाने की जीवनकाल ज्यादा हो। इससे आप बेवजह के खर्चे से बचेंगे और खाना भी ना के बराबर नष्ट होगा।
  3. घर पर खाने को अलग करते वक़्त खाने के जीवनकाल पर ध्यान दें। किसी भी पैक्ड खाने के पीछे ‘समाप्ति तिथि’ (एक्सपायरी डेट) लिखी होती है। कोशिश करें की इस तिथि के अन्दर ही उस खाने का सेवन हो जिससे की खाना कूड़ेदान मे ना जाए।
  4. खाना बनाते वक़्त कोशिश करें कि फल या सब्जी के सभी भागों का इस्तेमाल हो। आलू, केला, प्यान्ज़ और मटर के अवशेषों को कई तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है। उदहारणतः केले के छिलके को आप अपने काले जूतों को चमकाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं! आलू के छिलकों को भुन के उनके चिप्स बना सकते हैं! फूलगोभी के पत्तों को भी आप भुन कर सलाद मे इस्तेमाल कर सकते हैं!
  5. फल एवं सब्जियों के अवशेषों का अचार भी बना सकते हैं। लगभग हर बची-कुची फल और सब्ज़ी का अचार बनाया जा सकता है।
  6. यदि इन सभी के बावजूद आप देख रहे हैं की खाना नष्ट हो रहा है, तो खाने को कूड़े मे ना फ़ेंककर उसका इस्तेमाल खाद बनाने मे करें। कम्पोस्टिंग करने की प्रक्रिया लम्बी और मेहनती ज़रूर है, लेकिन अंत मे इससे अपने स्वास्थय और वातावरण का भला ही करेंगे।

हम अपने निजी स्तर पर ऊपर दिए गए सुझावों पर अमल करें तो काफी हद तक खाने को नष्ट होने से बचा सकते हैं। बस हम सभी को जागरूक और सचेत होने की आवश्यकता है।

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