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क्या राष्ट्रभक्ति आप शिफ्ट वाइज निभा सकेंगे?

राष्ट्रीय शोक जब उत्सवधर्मिता की हद तक चला जाए तो ये बहुत संभव है कि थोड़े वक्त के लिए वो शख्स जो हमारे बीच से चला गया, लौट आए. तस्वीरें वैसे भी कभी मरती नहीं तो उन्हें जुटा-जुटाकर उनके होने का एहसास कराया जाए लेकिन ये सब करते हुए हम जिंदा लोगों के बीच भी तो काफी कुछ मर रहा होता है.

ऐसे में ये भी संभव है कि हम-आप मीडिया और राज्य की मशीनरी की तरह इस उत्सवधर्मी शोक में शामिल न हो पाएं तो देशद्रोही करार दे दिए जाएं..लेकिन न्यूज चैनलों पर जब बार-बार एक दूसरी मौत( जो कि न्याय की शक्ल में दिखाई गई ) को लेकर आतंक का अंत फ्लैश होने लगे तो हम ये कैसे यकीन कर लें कि एक की मौत को उत्सव की शक्ल देने पर वो हमारे बीच बना रहेगा और दूसरे के लिए लाउडस्पीकरी भाषा में शब्द-प्रयोग करते रहने से उस स्याह पक्ष का अंत हो जाएगा जिसका वो एक छोटा सा हिस्साभर था.

वो जो एक के लटकाए जाने पर खुश हो रहे हैं, चैनल जिनके एक्सप्रेशन को जुबान दे रहा है, उनके भीतर घुल आए आतंकी मिजाज का क्या करेंगे जबकि इसकी सजा फांसी से कम नहीं.

क्या आप दो मौत की खबरों को इस तरह टू इन वन विन्चीटर की तरह पहनकर अपनी राष्ट्रभक्ति साबित कर सकते हैं जैसा कि ये चैनल कर रहे हैं.

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