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कोई हवा आई

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समन्दरों के उधर से कोई हवा आई I

दिलों के बंद दरीचे खुले हवा आई I

नए मुहाज़ पे निकले हैं फिर से सौदागर,

नए सफ़र की कशिश फिर नयी सुबह लाई I

कोई तो शख्स है जिसने चमन से खार चुने,

कोई वजह है गुलिस्तां में ये अदा आई I

वोही है मर्ज़ इलाजे मरीज़ भी वो ही,

ये कैसे मोड़ पे मुझको मेरी वफ़ा लाई I

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