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केहर के शोले

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कैसे बढ़ते हैं हवाओं में केहर के शोले I

किसने पाले हैं छिपाए हैं केहर के शोले I

 

गर्म बाहें वो पनाहें वो दोस्ती का चलन,

बुझ गए सारे अलम रह गए फकत शोले I

 

हमने माना की शुभा है तुम्हे उनपे लेकिन,

नफरतें कब से, जमा कब से दिलों में शोले I

 

उनसे कह दो जो भुला बैठे हैं इमां अपना,

उनके दीवान जला देंगे उन्ही के शोले I

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