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कहाँ जाइएगा आप

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खुद से बिछड़ के दूर कहाँ जाइएगा आप,

जलती है सुबहो शाम कहाँ जाइएगा आप I

 

शहरों से मोहोब्बत के निशां मिट रहें हैं रोज़,

मंजिल ख़बर नहीं है कहाँ जाइएगा आप I

 

कांटे बिछे राह में सूरज चढ़ा हुआ,

बिन साया नंगे पाँव कहाँ जाइएगा आप I

 

दुनिया ये नफरतों के शिकंजे में फंसी है,

अपनी गली से दूर कहाँ जाइएगा आप I

 

इक आग सी लगी है मेरे दिल के आस पास,

ये घर भी जल गया तो कहाँ जाइएगा आप I

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