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कच्ची कली

यह कितनी कोमल और भली है

क्योंकि अभी यह कच्ची कली है

इसका काम अभी तो बढ़ना

बनकर फूल अभी तो खिलना

रहने दो इसे अभी यों ही

इसे अभी और है सजना

होकर बड़ी एक दिन यह

स्वतः फूल बन जायेगी

बनकर फूल सुगंधित यह

फिर दुनिया को महकायेगी

या फिर कोई चुन लेगा इसको

और यह धागे में पिरोई जायेगी

फिर पड़कर किसी माला में यह

किसी गले का हार बन जायेगी

या गजरे का यह फूल बनेगी

और किसी देवी के सिर खूब सजेगी

या फिर अन्य फूलों के साथ मिलकर

यह दुनिया को खूब सजायेगी

या ले जाएगा कोई पुजारी इसको

और किसी देव पर चढ़ाई जायेगी

फूल होते हैं सुगन्धि देने के लिए

नहीं होते यह कुचलने के लिए

यह दूसरों को खुशियां देते हैं

फूल नहीं होते मसलने के लिए

इसे तोड़कर न यों फेंको ज़मीं पर

कदमों तले किसी के यों ही कुचली जायेगी

या कुछ दिन पड़े-पड़े ज़मीं पर

यह यों ही स्वयं मुर झायेगी

गल जायेगी वर्षा के पानी में

या फिर धूप इसे सुखायेगी

या फिर कोई सिरफिरा आकर

इसे उठा कर ले जायेगा

खेलेगा फिर उसके तन से

और चिथड़े कर उसे उड़ाएगा

इतने दरिंदे न बनो तुम भी

अभी तो यह नाज़ुक सी कली है

अभी तो यह कच्ची कली है ।

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