2017 Culture Education Food Happiness Health Life Medicine Opinion Optimism Work

आर्थ्राइटिस लाइलाज नहीं है!

FacebookTwitterGoogleLinkedIn


आज ‘विश्व आर्थ्राइटिस दिवस’ है। आर्थ्राइटिस आम भाषा मे ‘जोड़ों का दर्द’ होता है। यह ग्रीक शब्द से लिया गया है। ग्रीक मे आथ्रो का मतलब है ‘जोड़ा’ और आईटिस का मतलब है ‘सूजन’। इंसान के शरीर मे जोड़ों की एहम भूमिका होती है। विभिन्न तरह के चलन और काम-काज इंसान जोड़ों की मदद से ही कर पाता है। एक तरह से हम यह भी कह सकते हैं की जोड़े हमे कोई भी काम करने के लिए आवाश्यक लचीलापन देते हैं। लेकिन कई बार जननिक या अनियमित जीवन-व्यापन से जोड़े अपना लचीलापन या चुस्ती खो देते हैं। ज़्यादातर मामलों मे जोड़ों के सूजन के कारण शरीर ‘अकड़’ जाता है और अंततः आर्थ्राइटिस का रूप ले लेता है। हालांकि आर्थ्राइटिस के 100 से भी ऊपर टाइप हैं, अधिकतर लोग ऑस्टियोआर्थराइटिस (ओ.ए.)  या रीयूमातोइड आर्थ्राइटिस (आर.ए.) के शिकार होते हैं।

ओ.ए. शरीर मे दो हड्डियों के बीच जॉइंट कार्टीलेज (नरम हड्डी) की कमी की वजह से होता है। घटते कार्टीलेज की वजह से हड्डियों के बीच घिसाव की मात्रा बढ़ जाती है। बड़ते रगड़ से हड्डी अपनी लचीलापन खो देते हैं और इंसान को भीषण दर्द का अनुभव होता है। ओ.ए. मे सूजन की संभावना कम होती है और ज़्यादातर मामलों मे ओ.ए. शरीर के एक हिस्से तक ही सीमित रहती है।

आर.ए. ओ.ए. से कुछ बातों मे अलग है। हालांकि आर.ए. मे भी इंसान के हड्डियों के बीच घिसाव बढ़ती जाती है, आर.ए. मे जोड़े अकड़ने के साथ फूल भी जाते हैं। यह इंसान के जीवनकाल मे कभी भी हो सकती है।   

भारत मे करीब 20 करोड़ लोग हर साल आर्थ्राइटिस का शिकार होते हैं। यह कैंसर और एड्स जैसे खतरनाक बीमारियों की श्रेणी मे आता है। खुश-किस्मती से इससे बचने का रास्ता भी है। दिए गए सुझाव से पीड़ितों को मदद ज़रूर मिलेगी;

  1. अपने बढ़ते वज़न पर ध्यान केन्द्रित होना चाहिए। यदि शरीर को ज्यादा भार उठाना पड़ा, तो इसका सीधा प्रभाव हड्डियों पर पड़ेगा। योगा, साइकिलिंग, रनिंग से वज़न कम हो सकता है। जितना खाएं, उतना ही व्यायाम करें। इससे शरीर का संतुलन बना रहेगा।
  2. गरम या ठन्डे पानी से स्नान करने पर भी जोड़ों के दर्द से काफी राहत मिलती है। इससे जोड़ों के बीच घिसाव की संभावना भी कम हो जाती है।
  3. कुछ समय तक ध्यान करने से या कोमल संगीत सुनने से भी आर्थ्राइटिस की संभावना कम हो जाती है। आजकल ज़्यादातर मामलों मे बढ़ती टेंशन और स्ट्रेस से आर्थ्राइटिस को बढ़ावा मिलता है।
  4. ज़्यादातर पकवान मे हल्दी का उपयोग करें। हल्दी मे एक रसायन ‘करक्यूमिन’ आर्थ्राइटिस से होने वाली सूजन को काफी हद तक कम कर देता है।
  5. हालांकि ऐलोपथी भी आर्थ्राइटिस को कम करने मे सक्षम रही है, इसके सेवन से दुष्प्रभाव की संभावना भी हो सकती है।

यदि समग्र रूप से देखा जाए तो आर्थ्राइटिस लाईलाज बीमारी नहीं है। सही समय पर सही और उपर्युक्त चिकित्सा से इसका पक्का इलाज हो सकता है। ऐलोपथी के अलावा आयुर्वेद, योग, उनानी, सिद्धा एवं होमिओपैथी के उपचार से भी पीड़ित व्यक्ति राहत की उम्मीद कर सकता है।

 

Leave a Reply


Your email address will not be published. Required fields are marked *